News24 हिंदी
न्यूज 24 डेस्क प्रतिष्ठित पत्रकारों की पहचान है। इससे कई पत्रकार देश-दुनिया, खेल और मनोरंजन जगत की खबरें साझा करते हैं।
Read More---विज्ञापन---
Nepal Currency: नेपाल एक ऐसा देश जो अपने बैंक नोटों की छपाई के लिए भारत पर निर्भर रहता था, फिर साल 2015 में उसने अचानक पाला बदला और फिर नेपाल अपनी मुद्रा छपवाने के लिए चीन से मदद लेने लगा और भारत में अपने नोट छपवाने पूरी तरह से बंद कर दिए. भारत के ज्यादातर पड़ोसी देश, जिनमें श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और म्यांमार भी शामिल हैं, उन्होंने अब चीन से रुपया छपवाना शुरू कर दिया है. नेपाल का भारत को छोड़कर चीन को रुपया छपवाने की फैक्ट्री बनाने के पीछे कई वजहें हैं.
वहीं, नेपाल सरकार द्वारा नोटों की प्रिटिंग के लिए भारत की जगह चीन को प्राथमिकता देने का एक अहम कारण यह है कि चीनी कंपनी ने टेंडर के लिए जो बोली लगाई है, वह सबसे कम की थी. इसके अलावा उसने एडवांस टेक्नोलॉजी की भी पेशकश की थी.
वहीं, दूसरी ओर नेपाल की ओली सरकार की तरफ से भारत के कुछ हिस्सों को नेपाल के नक्शे में दिखाया जा रहा था और नए छपने वाले नोटों पर भी ओली सरकार ये नक्शा छपवाना चाहती थी. जिसके बाद से ही नेपाल और भारत के रिश्तों के बीच दूरी दिखी और नेपाल के नोट छापना भारत के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था.
नेपाल के इस फैसले के बीच सबसे बड़ा कारण है नेपाल और भारत के रिश्तों के बीच तल्खी आना. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने 10 सालों के कार्यकाल में एक बार भी नेपाल नहीं गए. इस दौरान नेपाल में भारत समर्थक राजशाही का अंत हुआ और वामपंथी दल सत्ता में आ गए. यहीं से नेपाल का रास्ता चीन के लिए खुल गया और चीन को नेपाल में रोकने की जो कोशिशें होनी चाहिए थी, वो नहीं की गई. पीएम नरेन्द्र मोदी ने नेपाल को फिर से भारत से जोड़ने की काफी कोशिशें की, उन्होंने नेपाल की कई यात्राएं भी कीं, लेकिन चीन तब तक नेपाल में इस कदर अपना प्रभाव बढ़ा चुका था, कि अब नेपाल का चीन से निर्भरता कम करना काफी मुश्किल हो चुका था.
नरेन्द्र मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बने थे और 2015 में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, जो चीन के इशारे पर काम कर रहे थे, उन्होंने भारत के तीन क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा बता दिया. इसके बाद ही नेपाल और भारत के रिश्तों के बीच दरार देखी गई थी.
यह भी पढ़ें- क्या हैं सुपर रिच टैक्स? जिनके कारण ब्रिटेन छोड़ने को मजबूर हुए स्टील बिजनेस टायकून लक्ष्मी मित्तल
बता दें कि नेपाली नोट 1945 से 1955 तक नासिक की प्रेस में छपते थे. दशकों बाद नेपाल ने अन्य विकल्प तलाशने भी शुरू कर दिए और इसके बाद भी साल 2015 तक नेपाल के नोट भारत में ही छपते रहे. 1000 के नए नोट छापने का टेंडर चीनी कंपनी के पास जाने के साथ ही अब नेपाल के सभी नोट चीन में ही छपेंगे.
चीन हर क्षेत्र में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत कर रहा है और करेंसी छापने में भी चीन ने कुछ ऐसा ही किया है. चीनी सरकारी कंपनी, चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन (CBPMC), अब नेपाल की मुद्रा छापने लगी है. नेपाल नेशनल बैंक ने CBPMC को 1,000 रुपये के 43 करोड़ नोटों के डिजाइन और मुद्रण का ठेका दिया है, जिसकी लागत करीब 16.985 मिलियन डॉलर है. चीन ने पिछले कुछ सालों में एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए नोट छापना शुरू कर दिया है. CBPMC पानी के निशान, कलर-शिफ्टिंग इंक, होलोग्राम, सुरक्षा धागे और नई Colordance टेक्नोलॉजी से नोट छाप रहा है, जिससे नोटों की नकल कर पाना बेहद मुश्किल हो गया है.
न्यूज 24 पर पढ़ें दुनिया, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।