संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने सितंबर 2026 में ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव को मंजूर किया है. मैप को साल 2018 में बनाया गया था, जिसे ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ कहा गया है. महासभा में नए मैप के प्रस्ताव को अफ्रीकी देशों विशेषकर टोगो के द्वारा स्पॉन्सर किया गया है और इन्हीं देशों ने महासभा में प्रस्तुत भी किया, जिसे मतदान करके भारत समेत 164 देशों ने समर्थन दिया है, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया है, वहीं 6 देशों ने तो मतदान में भाग ही नहीं लिया. 16वीं सदी से इस्तेमाल हो रहे मार्केटर मैप में अफ्रीका का साइज ग्रीनलैंड के बराबर है, जबकि रियल में वह 14 गुना ज्यादा बड़ा है. नए मैप में अफ्रीका महाद्वीप को उसके रियल साइज में दिखाया गया है और यूरोप-अमेरिका का साइज कुछ छोटा लेकिन रियल साइज में होगा.
दुनिया का पुराना नक्शा किसने बनाया था?
बता दें कि पुराना नक्शा 1569 में फ्लेमिश भूगोलवेत्ता और मानचित्राकार जेरार्डस मर्केटर ने बनाया था, जिसे मर्केटर मैप नाम दिया गया था. इस मैप में ध्रुवों के पास वाले इलाकों को बड़ा और भूमध्य रेखा के पास वाले इलाकों को छोटा दिखाया गया था. मर्केटर मैप को समुद्री नेविगेशन में मदद के लिए डिजाइन किया गया था. यूरोपीय समुद्र में एक्सप्लोरेशन और लंबी दूरी तक जाने के लिए नेविगेशन के लिए नाविकों को मैप की जरूरत पड़ी थी, ताकि महासागरों में यात्रा करते समय वे सही दिशा का पता लगा सकें. इसमें नाविक कंपास को सीधी लाइन के रूप में मैपिंग करके अपने रास्ते और सही दिशा का पता लगाकर आगे बढ़ते थे. इसलिए पृथ्वी का डिटॉर्शन एक गलती नहीं थी, बल्कि गोल-गोल धरती के सपाट मैप का रिजल्ट थी.
दुनिया के नए मैप की जरूरत क्यों पड़ी?
UN की रिपोर्ट के अनुसार, पुराने मर्केटर मैप में देशों और महाद्वीपों के आकार असंतुलित था. जिसे बड़ा दिखाया जाना चाहिए था, उसे छोटा दिखाया गया गया था और जो छोटा था, उसे बड़ा दिखाया गया था. इसी वजह से आज अफ्रीका जैसे सबसे बड़े महाद्वीप की वैल्यू नहीं और अमेरिका जैसे एक देश को दुनिया का सबसे बड़ा देश कहा जाता है. इस असंतुलन को दूर करने के लिए ही नए नक्शे की जरूरत पड़ी.
16वीं सदी में बने नक्शे को भूमध्य रेखा के पास वाले इलाकों को बहुत छोटा और ध्रुवों के पास वाले इलाकों को जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाया गया था. पुराने नक्शे में अफ्रीका और ग्रीनलैंड का साइज एक जैसा है, जबकि अफ्रीका 14 गुना ज्यादा बड़ा है. दक्षिण अमेरिका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया भी अपने रियल साइज से काफी छोटे हैं. जबकि इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन में महाद्वीपों और देशों को उनके सही साइज में प्रदर्शित करके शैक्षणिक और अंतरराष्ट्रीय शिक्षण्रा संस्थानों की भ्रांतियों को खत्म किया गया है.
नए मैप को लेकर क्या है भारत का रुख?
भारत ने दुनिया के नए नक्शे को समर्थन दिया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर थोड़ी आपत्ति है. भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि नक्शे में भारत के क्षेत्र को शायद गलत तरीके से दिखाय गया है. भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत पूरे देश को भारत के ऑफिशियल मैप के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए. किसी भारतीय राज्य का गलत या भ्रामक चित्रण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हालांकि नए मैप में भारत का क्षेत्रफल वही, लेकिन आकार बड़ा दिख रहा है. नए मैप से देशों की सीमाएं नहीं बदली हैं, लेकिन नक्शे में धरती को दिखाने तरीका बदल गया है. इसलिए भारत का नक्शा भी थोड़ा अलग दिख रहा है, हालांकि कोई बदलाव नहीं हुआ है, बस भारत पहले से अलग दिख रहा है.