इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फट गया है और उसमें भयानक विस्फोट हुआ है, जिससे निकला लावा आस-पास के इलाके में फैल गया है और वन संपदा को जला रहा है. वहीं ज्वालामुखी से निकली राख आसमान में करीब 50000 फीट ऊंचाई तक फैल गई है. जहरीली गैसों वाली हवा, धूल मिट्टी भरी राख के कारण जीरो विजिबिलिटी के चलते जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ने वाली 209 फ्लाइटें रोक दी गई हैं, जिससे करीब 23000 यात्री परेशान हो गए हैं. घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानें प्रभावित हुई हैं, लोगों से सहयोग की अपील भी की गई है.
विस्फोट के बाद निकले राख के 2 विशालकाय गुबार
बता दें कि क्राकाटोआ ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में है. शनिवार से ही इस ज्वालामुखी से धुंआ निकल रहा था. इसलिए आस-पास के इलाके खाली करा दिए गए थे. रविवार सुबह 3:53 बजे करीब ज्वालामुखी फटा और करीब 30 सेकंड तक विस्फोट होते रहे. फिर राख के 2 बड़े गुबार निकले, जिसमें से एक गुबार 20000 फीट यानी करीब 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ा. यह गुबार जकार्ता, बैंटन और पश्चिमी जावा तक गया है. दूसरा गुबार करीब 50000 फीट यानी 15 किलोमीट ऊंचाई तक पहुंचा और पश्चिम एवं उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा. यह गुबार बैंटन, लामपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के ऊपर फैला है .
सुकर्णो-हट्टा एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स सस्पेंड
सुकर्णो-हट्टा एयरपोर्ट ने पहले सुबह 5:30 बजे तक उड़ानें रोकने की बात कही थी, लेकिन राख के कारण इसे बढ़ाकर सुबह 9:30 बजे तक कर दिया गया. एयरपोर्ट पर रात में खड़े 170 विमान वहीं मौजूद रहे. यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस मांगा और अपना चेक-इन सामान भी वापस लिया. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सिंगापुर जाने वाली फ्लाइट सबसे प्रभावित रही. हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानें भी रद्द, लेट या री-शेड्यूल हुईं. लामपुंग, बाली, सुराबाया और मकासर की कुछ घरेलू उड़ानों पर भी असर पड़ा.
स्थानीय लोगों के लिए क्या एडवाइजरी जारी हुई?
अभी किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है और लोगों को वहां से हटाने का आदेश भी नहीं दिया गया है. ज्वालामुखी के सबसे नजदीक आबादी करीब 16 किमी दूर है. हालांकि, लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किमी दूर रहने को कहा गया है. राख गिरने वाले इलाकों में लोगों को मास्क और आंखों की सुरक्षा करने, बाहर कम निकलने, पानी के स्रोत ढकने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. राख से आंखों में जलन की शिकायतें आई हैं. कुछ स्कूलों ने गतिविधियां रद्द कीं और मछुआरों ने समुद्र में जाना रोक दिया.
अधिकारियों ने फिलहाल तुरंत सुनामी का खतरा नहीं बताया है. हालांकि, अनाक क्राकाटोआ का इतिहास गंभीर रहा है. 2018 में इसी ज्वालामुखी के विस्फोट से आई सुनामी में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी. फिलहाल इंडोनेशिया की ज्वालामुखी, आपदा और मौसम एजेंसियां इसकी गतिविधि और राख के फैलाव पर लगातार नजर रख रही हैं.