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दुनिया

वार्ता फेल होने के बाद एक बार फिर कोशिश करेंगे ईरान-अमेरिका, इस बार बन जाएगी बात?

US-Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता भले ही बिना किसी समझौते के खत्म हो गई हो, लेकिन दोनों देशों के बीच ये दरवाजे अभी भी खुले हैं. उम्मीद है कि अमेरिका-ईरान एक बार फिर बातचीत के लिए आमने-सामने आ सकते हैंं

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Written By: Varsha Sikri Updated: Apr 14, 2026 09:58
US-Iran Peace Talks
Credit: Social Media

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई हाई-लेवल शांति वार्ता भले ही किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाई, लेकिन दोनों देशों ने आगे बातचीत जारी रखने के संकेत दिए हैं. अमेरिका-ईरान के बीच गुरुवार को एक बार फिर बातचीत हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, दोनों देश इस खास मीटिंग की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि अभी ये तय नहीं हुआ है कि मीटिंग कहां की जाएगी. दोनों देशों के सीनियर प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हो सकते हैं.

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क्या है मकसद?

इस खास बातचीत का मकसद मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करना और दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करना है. अमेरिका की कोशिश है कि ईरान के साथ उन मुद्दों पर सहमति बने, जिनकी वजह से दोनों देश आपस में भिड़े हैं. इससे पहले, हाल ही में अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई. ये 1979 के बाद दोनों देशों के बीच सबसे हाई लेवल की प्रत्यक्ष बातचीत मानी जा रही है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच 21 घंटे तक चली ये वार्ता फेल हो गई. इस वार्ता में ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए. वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी मौजूद रहे.

क्यों नहीं बन पाई सहमति?

इस बातचीत के असफल रहने के पीछे कई बड़ी वजह सामने आई. अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त कंट्रोल मंजूर करे और भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करने का वादा करे. वहीं ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया और इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया. इसके अलावा, ईरान ने अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंध हटाने और अपने तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों को खत्म करने की मांग की. लेकिन अमेरिका इसके लिए पहले ठोस परमाणु प्रतिबद्धता चाहता था. इस वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच अविश्वास भी बड़ी रुकावट बना. लंबे समय से चले आ रहे विवाद और राजनीतिक दबाव की वजह से कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं था.

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First published on: Apr 14, 2026 09:02 AM

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