होर्मुज स्ट्रेट से टैक्स वसूली के लिए ईरान अपनाएगा ‘तुर्किये मॉडल’, अमेरिका ने जताई आपत्ति, कतर में होगी बातचीत
अमेरिका और ईरान दोहा में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ विवाद को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं. ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों देश मंगलवार को दोहा में मिलेंगे और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने पर बातचीत करेंगे. एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया, हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है.
Edited By : Versha Singh|Updated: Jun 29, 2026 07:51
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अमेरिका और ईरान दोहा में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ विवाद को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं. ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों देश मंगलवार को दोहा में मिलेंगे और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने पर बातचीत करेंगे. एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया, हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है.
क्या है तुर्किये मॉडल?
ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुरजने वाले जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में ईरान तुर्किये का मॉडल अपनाना चाह रहा है, लेकिन ट्रंप न सिर्फ इसके खिलाफ हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए ईरान को चेतावनी भी दे रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर तुर्किये का वो कौन सा फॉर्मूला है, जिसे ईरान होर्मुज स्ट्रेट में लागू करना चाहता है, उससे बड़ा सवाल ये है कि अगर ईरान ने फीस वसूलना शुरू किया, तो क्या इसका परिणाम एक और युद्ध होगा?
होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका जो रुख है, वो एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत है. ईरान इस समुद्री मार्ग पर न सिर्फ नियंत्रण चाहता है, बल्कि इस रूट से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है. ट्रंप ईरान की इसी मांग के खिलाफ हैं. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान की ये शर्त किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होगी.
ईरान होर्मुज स्ट्रेट में फीस वसूलने को लेकर किस तरह से अड़ा है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में उन जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है, जो ईरान के नियम और व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं.
दोनों देशों के प्रतिनिधि कतर में करेंगे मुलाकात
दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर में मिलेंगे, जहां हाई लेवल मीटिंग होनी है. इसका उद्देश्य हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बाद उस नाजुक शांति समझौते को बचाना है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच मोहर लगी थी.
दरअसल होर्मुज में कार्गो शिप पर ईरानी अटैक के बाद संघर्ष का दायरा बढ़ने लगा था. 24 घंटे के भीतर अमेरिका ने दो बार ईरान की मिलिट्री साइट्स और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगियों के ठिकानों पर हमले का दावा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तो ईरान को सख्त चेतावनी दे डाली थी.
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रहने तक सभी प्रकार के मिलिट्री एक्शन को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है. कतर में होने वाली बातचीत में होर्मुज से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होगी. प्रस्तावित वार्ता को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है. समझौते के अनुसार, ईरान ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया था. बदले में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति दी थी.
भविष्य में ऐसे टकराव से बचने के लिए पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड में अमेरिकी सेना और आईआरजीसी के बीच हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति बनी थी, ताकि जहाजों की आवाजाही का बेहतर समन्वय किया जा सके. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक शुरू नहीं हो सकी थी.
युद्ध के हमलों में मारे गए लोगों के लिए क्या बोले खामेनेई?
ईरानी सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने रविवार (28 जून, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई ट्वीट्स शेयर किए, जिसमें उन्होंने कहा, ‘नवजातों की हत्या से लेकर हमारे प्रिय बुजुर्गों की मौत तक और इन सबसे बढकर हमारे युग के अद्वितीय, अनोखे रत्न और महान मुजाहिद नेता की शहादत. इनमें से हर एक मामला हजारों गंभीर कानूनी मामालों में शामिल है, जिन पर देश की अदालतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी पूरी गंभीरता और मजबूती के कार्रवाई होनी चाहिए.’
उन्होंने कहा, ‘जो बात तय है, वो यह है कि इन अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाकर उनके आपराधिक कार्यों के लिए न्याय के कटघर में खड़ा किया जाना चाहिए.’
जहाजों पर हो रहे हमलों से बढ़ा विवाद
तेहरान का यह दावा अमेरिका के साथ कई दिनों तक चले जवाबी हमलों के बाद आया है. इन हमलों की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने ओमान के तट के पास से जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को पार करने की कोशिश कर रहे एक जहाज पर हमला किया. तेहरान चाहता है कि जहाज उसके तट के साथ एक अलग रास्ते का इस्तेमाल करें. उसने जहाजों को उस दूसरे रास्ते का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी थी.
होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की जिम्मेदारी
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, जून की शुरुआत में ट्रंप द्वारा साइन किए गए समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की जिम्मेदारी ईरान को सौंपी गई है. इसमें कहा गया है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अपनी पूरी कोशिश करेगा और ईरान क्षेत्र के अन्य देशों के साथ बातचीत करके होर्मुज के प्रशासन और समुद्री सेवाओं के भविष्य के लिए नियम तय करेगा.
अमेरिका और ईरान दोहा में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ विवाद को सुलझाने पर सहमत हो गए हैं. ‘एक्सियोस’ की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों देश मंगलवार को दोहा में मिलेंगे और ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने पर बातचीत करेंगे. एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने बताया, हमने सभी तरह की सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया है.
क्या है तुर्किये मॉडल?
ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुरजने वाले जहाजों से फीस वसूलने की तैयारी कर रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में ईरान तुर्किये का मॉडल अपनाना चाह रहा है, लेकिन ट्रंप न सिर्फ इसके खिलाफ हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए ईरान को चेतावनी भी दे रहे हैं. सवाल यही है कि आखिर तुर्किये का वो कौन सा फॉर्मूला है, जिसे ईरान होर्मुज स्ट्रेट में लागू करना चाहता है, उससे बड़ा सवाल ये है कि अगर ईरान ने फीस वसूलना शुरू किया, तो क्या इसका परिणाम एक और युद्ध होगा?
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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका जो रुख है, वो एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत है. ईरान इस समुद्री मार्ग पर न सिर्फ नियंत्रण चाहता है, बल्कि इस रूट से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है. ट्रंप ईरान की इसी मांग के खिलाफ हैं. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि ईरान की ये शर्त किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं होगी.
ईरान होर्मुज स्ट्रेट में फीस वसूलने को लेकर किस तरह से अड़ा है. ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबाबादी ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में उन जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है, जो ईरान के नियम और व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं.
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दोनों देशों के प्रतिनिधि कतर में करेंगे मुलाकात
दोनों देशों के प्रतिनिधि मंगलवार को कतर में मिलेंगे, जहां हाई लेवल मीटिंग होनी है. इसका उद्देश्य हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव के बाद उस नाजुक शांति समझौते को बचाना है, जिस पर दोनों पक्षों के बीच मोहर लगी थी.
दरअसल होर्मुज में कार्गो शिप पर ईरानी अटैक के बाद संघर्ष का दायरा बढ़ने लगा था. 24 घंटे के भीतर अमेरिका ने दो बार ईरान की मिलिट्री साइट्स और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान ने भी अमेरिका के सहयोगियों के ठिकानों पर हमले का दावा किया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तो ईरान को सख्त चेतावनी दे डाली थी.
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Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रहने तक सभी प्रकार के मिलिट्री एक्शन को अस्थायी रूप से रोकने पर सहमति बनाई है. कतर में होने वाली बातचीत में होर्मुज से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होगी. प्रस्तावित वार्ता को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते को लागू करने में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा है. समझौते के अनुसार, ईरान ने इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया था. बदले में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर सहमति दी थी.
भविष्य में ऐसे टकराव से बचने के लिए पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड में अमेरिकी सेना और आईआरजीसी के बीच हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमति बनी थी, ताकि जहाजों की आवाजाही का बेहतर समन्वय किया जा सके. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक शुरू नहीं हो सकी थी.
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युद्ध के हमलों में मारे गए लोगों के लिए क्या बोले खामेनेई?
ईरानी सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने रविवार (28 जून, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई ट्वीट्स शेयर किए, जिसमें उन्होंने कहा, ‘नवजातों की हत्या से लेकर हमारे प्रिय बुजुर्गों की मौत तक और इन सबसे बढकर हमारे युग के अद्वितीय, अनोखे रत्न और महान मुजाहिद नेता की शहादत. इनमें से हर एक मामला हजारों गंभीर कानूनी मामालों में शामिल है, जिन पर देश की अदालतों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी पूरी गंभीरता और मजबूती के कार्रवाई होनी चाहिए.’
From murdering newborns to our dear elderly population – & above all, the martyrdom of the peerless, unique gem of our era, our magnanimous, mujahid Leader – is each a file among thousands of major legal cases that must be earnestly pursued in domestic & international courts.
— Ayatollah Mojtaba Khamenei (@MKhamenei_ir) June 28, 2026
उन्होंने कहा, ‘जो बात तय है, वो यह है कि इन अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाकर उनके आपराधिक कार्यों के लिए न्याय के कटघर में खड़ा किया जाना चाहिए.’
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जहाजों पर हो रहे हमलों से बढ़ा विवाद
तेहरान का यह दावा अमेरिका के साथ कई दिनों तक चले जवाबी हमलों के बाद आया है. इन हमलों की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने ओमान के तट के पास से जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को पार करने की कोशिश कर रहे एक जहाज पर हमला किया. तेहरान चाहता है कि जहाज उसके तट के साथ एक अलग रास्ते का इस्तेमाल करें. उसने जहाजों को उस दूसरे रास्ते का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी थी.
होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की जिम्मेदारी
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, जून की शुरुआत में ट्रंप द्वारा साइन किए गए समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की जिम्मेदारी ईरान को सौंपी गई है. इसमें कहा गया है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान कमर्शियल जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अपनी पूरी कोशिश करेगा और ईरान क्षेत्र के अन्य देशों के साथ बातचीत करके होर्मुज के प्रशासन और समुद्री सेवाओं के भविष्य के लिए नियम तय करेगा.