मिडिल ईस्ट की जंग में चीन के बाद रूस की एंट्री भी हो गई है। हालांकि चीन जंग में ईरान की मदद करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से कूदा है, लेकिन रूस ने नेक काम के लिए दखल दिया है। जी हां, अमेरिका और ईरान की इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता फेल हो गई है तो अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका और ईरान में मध्यस्थता कराने का ऑफर दिया है। उन्होंने इस बारे में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की है।
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रूस मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता चाहता
पुतिन ने पेजेशकियान से कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह भी प्रयास करने के लिए तैयार है। अगर बातचीत करके समस्या का समाधान निकलता है तो बातचीत होनी चाहिए। दरअसल, रूस खुद को अमेरिका और ईरान में समझौते के लिए बातचीत आगे बढ़ाने वाला मध्यस्थ बना रहा है, क्योंकि रूस के ईरान से संबंध अच्छे हैं और ईरान ने रूस-यूक्रेन में मध्यस्थता कराने का ऑफर दिया था।
प्रयासों के बाद सीजफायर को माने तीनों देश
बता दें कि 28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग से मिडिल ईस्ट में हालात नाजुक हैं। काफी प्रयासों के बाद तीनों देश 2 हफ्ते के सीजफायर के लिए तैयार हुए। साथ ही इस्लामाबाद की रिक्वेस्ट पर अमेरिका और ईरान समझौता वार्ता करने के लिए आमने-सामने बैठे। अमेरिका और ईरान 1979 के बाद पहली बार आपसी मतभेद सुलझाने के लिए साथ में बैठे थे, लेकिन बैठक का नतीजा कुछ नहीं निकला, वार्ता फेल हो गई।
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भरोसे की कमी शांति समझौते में बड़ी बाधा
बता दें कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है, इस वजह से भी समझौता नहीं हो पा रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहते हैं कि अमेरिका अब तक तेहरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है। शांति वार्ता के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास है, जो किसी भी समझौते में बड़ी बाधा बन सकता है और वही हुआ। अमेरिकी की शर्तें ईरान ने नहीं मानी और ईरान की शर्तें अमेरिका ने नहीं मानी, जिस वजह से वार्ता फेल हुई।
मिडिल ईस्ट की जंग में चीन के बाद रूस की एंट्री भी हो गई है। हालांकि चीन जंग में ईरान की मदद करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से कूदा है, लेकिन रूस ने नेक काम के लिए दखल दिया है। जी हां, अमेरिका और ईरान की इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता फेल हो गई है तो अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिका और ईरान में मध्यस्थता कराने का ऑफर दिया है। उन्होंने इस बारे में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की है।
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रूस मिडिल ईस्ट में शांति और स्थिरता चाहता
पुतिन ने पेजेशकियान से कहा कि रूस मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करना चाहता है। इसके लिए वह भी प्रयास करने के लिए तैयार है। अगर बातचीत करके समस्या का समाधान निकलता है तो बातचीत होनी चाहिए। दरअसल, रूस खुद को अमेरिका और ईरान में समझौते के लिए बातचीत आगे बढ़ाने वाला मध्यस्थ बना रहा है, क्योंकि रूस के ईरान से संबंध अच्छे हैं और ईरान ने रूस-यूक्रेन में मध्यस्थता कराने का ऑफर दिया था।
प्रयासों के बाद सीजफायर को माने तीनों देश
बता दें कि 28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग से मिडिल ईस्ट में हालात नाजुक हैं। काफी प्रयासों के बाद तीनों देश 2 हफ्ते के सीजफायर के लिए तैयार हुए। साथ ही इस्लामाबाद की रिक्वेस्ट पर अमेरिका और ईरान समझौता वार्ता करने के लिए आमने-सामने बैठे। अमेरिका और ईरान 1979 के बाद पहली बार आपसी मतभेद सुलझाने के लिए साथ में बैठे थे, लेकिन बैठक का नतीजा कुछ नहीं निकला, वार्ता फेल हो गई।
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भरोसे की कमी शांति समझौते में बड़ी बाधा
बता दें कि ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं है, इस वजह से भी समझौता नहीं हो पा रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहते हैं कि अमेरिका अब तक तेहरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है। शांति वार्ता के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास है, जो किसी भी समझौते में बड़ी बाधा बन सकता है और वही हुआ। अमेरिकी की शर्तें ईरान ने नहीं मानी और ईरान की शर्तें अमेरिका ने नहीं मानी, जिस वजह से वार्ता फेल हुई।