घरों के नीचे बारूद और रिमोट से धमाका… इजरायल ने उड़ाए लेबनान के पूरे के पूरे गांव, लिटानी नदी तक 'कब्जे' की तैयारी!

इजरायल का तर्क है कि वह इन घरों के नीचे बने हिजबुल्लाह के सुरंगों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इजरायल अब लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर एक सिक्योरिटी जोन बनाने की तैयारी में है.

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मिडिल ईस्ट में एक तरफ शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना (IDF) पर आरोप लग रहे हैं कि वह रणनीतिक रूप से पूरे के पूरे गांवों का नामो-निशान मिटा रही है. ‘गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर भारी मात्रा में विस्फोटक लगाकर उन्हें रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ा दिया है.

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पूरे के पूरे गांव उड़ाए

सोशल मीडिया पर वायरल और इजरायली सेना द्वारा शेयर किए गए वीडियो में तैयबेह, नकौरा और देर सेरयान जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर विस्फोट होते देखे जा सकते हैं. एक्सपर्ट्स ने इजरायल की इस रणनीति को ‘डोमिसाइड’ का नाम दिया है. इसका अर्थ है घरों का व्यवस्थित विनाश, ताकि उस क्षेत्र को भविष्य में इंसानी बसावट के लायक ही न छोड़ा जाए. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने पहले ही सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को नष्ट करने का आह्वान किया था, जो गाजा के राफा मॉडल की याद दिलाता है.

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2000 से ज्यादा मौतें और ‘सुरक्षा क्षेत्र’ का दावा

इजरायल का तर्क है कि वह इन घरों के नीचे बने हिजबुल्लाह के सुरंगों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इजरायल अब लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर एक सिक्योरिटी जोन बनाने की तैयारी में है. लेबनानी मीडिया के अनुसार, हमलों में मरने वालों की संख्या 2,000 पार कर चुकी है और विस्थापितों की वापसी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.

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इस्लामाबाद वार्ता से क्या निकला?

इधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने अपनी “अंतिम और सबसे अच्छी पेशकश” मेज पर रख दी है, अब फैसला ईरान को करना है.

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दूसरी ओर, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि उन्होंने रचनात्मक पहल की थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में विफल रहा. फिलहाल क्षेत्र में एक नाजुक युद्धविराम की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन लेबनान में गांवों की तबाही एक गहरे मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही है.

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लेखक के बारे में

Arif Khan

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.
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