PoK की आवाज दबाने के लिए पाकिस्तान ने पार की सारी हदें, भोजन-ईंधन और दवाओं पर लगाई रोक; मचा हाहाकार

JAAC द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम के कारण मुजफ्फरआबाद, पुंछ, रावलकोट, बाग और नीलम घाटी जैसे इलाकों में जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार और दवाइयां बेचने वाली दुकानें हफ्तों से बंद हैं.

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शहबाज शरीफ सरकार और आसिम मुनीर की आर्मी द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए सारी हदें पार की जा रही हैं. पीओके में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों के बीच, पाकिस्तानी अधिकारियों पर आरोप है कि वे जानबूझकर पीओके में भोजन, ईंधन और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति को रोक रहे हैं. स्थानीय निवासियों, ट्रक चालकों और विपक्षी दलों का दावा है कि इस नाकेबंदी के कारण क्षेत्र में मानवीय संकट गहरा गया है, जबकि पाकिस्तानी प्रशासन इन आरोपों को खारिज कर रहा है.

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क्या है PoK में विरोध प्रदर्शन की वजह?


पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन पीओके विधानसभा में उन 12 सीटों के आरक्षण को लेकर शुरू हुआ है, जो भारतीय क्षेत्र से आए शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं. स्थानीय प्रदर्शनकारियों और ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का दुरुपयोग कर चुनावों को प्रभावित करता है और अपनी कठपुतली सरकारें बिठाता है. इस आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तान सरकार ने JAAC को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है, जिसके बाद भड़की हिंसा में अब तक कम से कम 58 लोगों की मौत हो चुकी है.

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बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसे लोग


JAAC द्वारा बुलाई गई अनिश्चितकालीन हड़ताल और चक्का जाम के कारण मुजफ्फरआबाद, पुंछ, रावलकोट, बाग और नीलम घाटी जैसे इलाकों में जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार, बाजार और दवाइयां बेचने वाली दुकानें हफ्तों से बंद हैं. नीलम घाटी के निवासियों का कहना है कि डिपो में पैसे जमा करने के बावजूद उन्हें राशन का आटा नहीं मिल पा रहा है. वहीं, परिवहन ठप होने और पेट्रोल पंप बंद होने से ईंधन की भयंकर किल्लत हो गई है, जिससे लोग काले बाजार से महंगे दामों पर तेल खरीदने को मजबूर हैं.

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चेकपोस्टों पर रोकी जा रही राशन की गाड़ियां


हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग आवश्यक सामान खरीदने के लिए पड़ोसी खैबर पख्तूनख्वा और रावलपिंडी का रुख कर रहे हैं. हालांकि, आरोप है कि पंजाब पुलिस और सुरक्षाबल आजाद पत्तन, फगवारी और मीरपुर जैसे प्रवेश द्वारों पर लोगों को रोक रहे हैं. कई निवासियों ने आपबीती बताते हुए कहा कि उनके द्वारा खरीदे गए भोजन और दवाओं को चेकपोस्टों पर ही जबरन फिकवा दिया गया. इसके अलावा, व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला को भी निशाना बनाया जा रहा है; आवश्यक वस्तुओं से लदे सैकड़ों ट्रक सीमाओं पर फंसे हुए हैं, जिससे सब्जियां और अन्य खराब होने वाली सामग्रियां सड़ रही हैं.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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