Google ने कैसे की भूकंप की भविष्यवाणी! वेनेजुएला में Earthquake आने से कुछ सेकेंड पहले भेजा था अलर्ट
वेनेजुएला में आए भूकंप से पहले कई लोगों के फोन पर Google का Earthquake Alert पहुंच गया. इससे लोगों के मन में सवाल उठा कि क्या Google को पहले से भूकंप की जानकारी मिल जाती है? जानिए कैसे यह सिस्टम झटके महसूस होने से पहले आपको चेतावनी दे देता है.
भूकंप आने से पहले Google ने कैसे भेज दिया अलर्ट? जानिए आपके फोन में छिपी इस खास तकनीक का राज.
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Google Earthquake Alert In Venezuela: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस दौरान एक ऐसी बात सामने आई जिसने लोगों को हैरान कर दिया. कई लोगों ने दावा किया कि उनके एंड्रॉयड फोन पर भूकंप के झटके महसूस होने से कुछ सेकेंड पहले ही Google का अलर्ट आ गया था. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर Google को भूकंप आने की जानकारी पहले कैसे मिल गई? क्या कंपनी सच में भूकंप की भविष्यवाणी कर सकती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं इसके पीछे काम करने वाली तकनीक.
वेनेजुएला में आए दो बड़े भूकंप
बुधवार को वेनेजुएला में एक के बाद एक दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिनकी तीव्रता 7.1 और 7.5 मापी गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पिछले करीब 100 सालों में देश में आए सबसे ताकतवर भूकंपों में शामिल हैं. भूकंप की वजह से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
(Image Credit-jamoran1356/X)
भूकंप से पहले फोन पर पहुंचा अलर्ट
भूकंप के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर किए. इनमें Google की तरफ से भेजा गया Earthquake Alert दिखाई दे रहा था. एक यूजर को मिले नोटिफिकेशन में बताया गया था कि करीब 341 किलोमीटर दूर 6.2 तीव्रता का संभावित भूकंप दर्ज किया गया है. यह अलर्ट लोगों तक झटके महसूस होने से पहले पहुंच गया था.
स्मार्टफोन में छिपा है इसका राज
Google का Earthquake Alerts System किसी जादू या भविष्यवाणी पर काम नहीं करता. इसके पीछे आपके स्मार्टफोन में मौजूद एक खास सेंसर काम करता है, जिसे एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) कहा जाता है. यही सेंसर फोन को घुमाने पर स्क्रीन को ऑटोमैटिक रोटेट करने में मदद करता है. लेकिन यह जमीन में होने वाले कंपन को भी महसूस कर सकता है.
कैसे पता चलता है कि भूकंप आने वाला है?
जब किसी एंड्रॉयड फोन का एक्सेलेरोमीटर असामान्य कंपन महसूस करता है, तो वह Google के सर्वर को एक सिग्नल भेजता है. इसके साथ फोन की अनुमानित लोकेशन भी साझा की जाती है. इसके बाद Google आसपास मौजूद दूसरे एंड्रॉयड फोन से आने वाले डेटा की जांच करता है. अगर एक ही इलाके में बड़ी संख्या में फोन एक जैसे कंपन रिकॉर्ड करते हैं, तो सिस्टम समझ जाता है कि भूकंप की स्थिति बन रही है.
Image Credit-AI
दुनिया का सबसे बड़ा भूकंप डिटेक्शन नेटवर्क
Google के मुताबिक दुनियाभर में 2 अरब से ज्यादा एंड्रॉयड डिवाइस इस सिस्टम का हिस्सा हैं. यही वजह है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्मोग्राफ नेटवर्क माना जाता है. जितने ज्यादा फोन होंगे, सिस्टम उतनी ही तेजी और सटीकता से भूकंप की पहचान कर पाएगा.
झटके महसूस होने से पहले अलर्ट कैसे मिल जाता है
भूकंप एक ही झटके में नहीं आता, बल्कि अलग-अलग तरंगों के रूप में फैलता है. सबसे पहले P-Waves यानी प्राइमरी वेव्स आती हैं. ये लगभग 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलती हैं, लेकिन इनसे ज्यादा नुकसान नहीं होता. इसके बाद S-Waves आती हैं, जो अपेक्षाकृत धीमी होती हैं लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.
Image Credit-AI
लाइट की स्पीड से दौड़ता है सिस्टम
जैसे ही फोन P-Waves को महसूस करता है, वह तुरंत Google के सर्वर को जानकारी भेज देता है. इंटरनेट सिग्नल प्रकाश की गति के करीब यात्रा करते हैं, जो भूकंप की तरंगों से कहीं ज्यादा तेज है. इसी वजह से Google के पास कुछ सेकेंड का समय मिल जाता है, जिसमें वह डेटा का विश्लेषण कर लोगों को चेतावनी भेज सकता है.
341 किमी दूर होने पर क्यों मिला समय
अगर भूकंप का केंद्र किसी व्यक्ति से 341 किलोमीटर दूर है, तो भूकंप की तरंगों को वहां पहुंचने में कुछ समय लगता है. इस दौरान Google का सिस्टम पहले ही कंपन का पता लगाकर अलर्ट भेज देता है. यही वजह है कि वेनेजुएला के कई लोगों को झटके महसूस होने से पहले चेतावनी मिल गई.
Android में मिलते हैं दो तरह के अलर्ट
Android Earthquake Alerts System दो प्रकार के अलर्ट जारी करता है. पहला 'Be Aware Alert' होता है, जो हल्के झटकों की जानकारी देता है. दूसरा 'Take Action Alert' होता है, जो मध्यम या तेज भूकंप की स्थिति में लोगों को पहले से सावधान करता है ताकि वे सुरक्षित जगह पर जा सकें.
भारत में भी उपलब्ध है यह सुविधा
Google का Earthquake Alerts System भारत में भी 2023 से उपलब्ध है. Android 5 या उससे ऊपर के वर्जन वाले फोन इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए फोन में इंटरनेट या मोबाइल डेटा कनेक्शन सक्रिय होना जरूरी है. अगर कोई यूजर ऐसे अलर्ट नहीं पाना चाहता, तो वह फोन की सेटिंग में जाकर Earthquake Alerts फीचर को बंद भी कर सकता है.
Google Earthquake Alert In Venezuela: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. इस दौरान एक ऐसी बात सामने आई जिसने लोगों को हैरान कर दिया. कई लोगों ने दावा किया कि उनके एंड्रॉयड फोन पर भूकंप के झटके महसूस होने से कुछ सेकेंड पहले ही Google का अलर्ट आ गया था. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर Google को भूकंप आने की जानकारी पहले कैसे मिल गई? क्या कंपनी सच में भूकंप की भविष्यवाणी कर सकती है? आइए आसान भाषा में समझते हैं इसके पीछे काम करने वाली तकनीक.
वेनेजुएला में आए दो बड़े भूकंप
बुधवार को वेनेजुएला में एक के बाद एक दो शक्तिशाली भूकंप आए, जिनकी तीव्रता 7.1 और 7.5 मापी गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये पिछले करीब 100 सालों में देश में आए सबसे ताकतवर भूकंपों में शामिल हैं. भूकंप की वजह से कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
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(Image Credit-jamoran1356/X)
भूकंप से पहले फोन पर पहुंचा अलर्ट
भूकंप के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने स्क्रीनशॉट शेयर किए. इनमें Google की तरफ से भेजा गया Earthquake Alert दिखाई दे रहा था. एक यूजर को मिले नोटिफिकेशन में बताया गया था कि करीब 341 किलोमीटर दूर 6.2 तीव्रता का संभावित भूकंप दर्ज किया गया है. यह अलर्ट लोगों तक झटके महसूस होने से पहले पहुंच गया था.
स्मार्टफोन में छिपा है इसका राज
Google का Earthquake Alerts System किसी जादू या भविष्यवाणी पर काम नहीं करता. इसके पीछे आपके स्मार्टफोन में मौजूद एक खास सेंसर काम करता है, जिसे एक्सेलेरोमीटर (Accelerometer) कहा जाता है. यही सेंसर फोन को घुमाने पर स्क्रीन को ऑटोमैटिक रोटेट करने में मदद करता है. लेकिन यह जमीन में होने वाले कंपन को भी महसूस कर सकता है.
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कैसे पता चलता है कि भूकंप आने वाला है?
जब किसी एंड्रॉयड फोन का एक्सेलेरोमीटर असामान्य कंपन महसूस करता है, तो वह Google के सर्वर को एक सिग्नल भेजता है. इसके साथ फोन की अनुमानित लोकेशन भी साझा की जाती है. इसके बाद Google आसपास मौजूद दूसरे एंड्रॉयड फोन से आने वाले डेटा की जांच करता है. अगर एक ही इलाके में बड़ी संख्या में फोन एक जैसे कंपन रिकॉर्ड करते हैं, तो सिस्टम समझ जाता है कि भूकंप की स्थिति बन रही है.
Image Credit-AI
दुनिया का सबसे बड़ा भूकंप डिटेक्शन नेटवर्क
Google के मुताबिक दुनियाभर में 2 अरब से ज्यादा एंड्रॉयड डिवाइस इस सिस्टम का हिस्सा हैं. यही वजह है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्मोग्राफ नेटवर्क माना जाता है. जितने ज्यादा फोन होंगे, सिस्टम उतनी ही तेजी और सटीकता से भूकंप की पहचान कर पाएगा.
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झटके महसूस होने से पहले अलर्ट कैसे मिल जाता है
भूकंप एक ही झटके में नहीं आता, बल्कि अलग-अलग तरंगों के रूप में फैलता है. सबसे पहले P-Waves यानी प्राइमरी वेव्स आती हैं. ये लगभग 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलती हैं, लेकिन इनसे ज्यादा नुकसान नहीं होता. इसके बाद S-Waves आती हैं, जो अपेक्षाकृत धीमी होती हैं लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.
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लाइट की स्पीड से दौड़ता है सिस्टम
जैसे ही फोन P-Waves को महसूस करता है, वह तुरंत Google के सर्वर को जानकारी भेज देता है. इंटरनेट सिग्नल प्रकाश की गति के करीब यात्रा करते हैं, जो भूकंप की तरंगों से कहीं ज्यादा तेज है. इसी वजह से Google के पास कुछ सेकेंड का समय मिल जाता है, जिसमें वह डेटा का विश्लेषण कर लोगों को चेतावनी भेज सकता है.
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341 किमी दूर होने पर क्यों मिला समय
अगर भूकंप का केंद्र किसी व्यक्ति से 341 किलोमीटर दूर है, तो भूकंप की तरंगों को वहां पहुंचने में कुछ समय लगता है. इस दौरान Google का सिस्टम पहले ही कंपन का पता लगाकर अलर्ट भेज देता है. यही वजह है कि वेनेजुएला के कई लोगों को झटके महसूस होने से पहले चेतावनी मिल गई.
Android में मिलते हैं दो तरह के अलर्ट
Android Earthquake Alerts System दो प्रकार के अलर्ट जारी करता है. पहला ‘Be Aware Alert’ होता है, जो हल्के झटकों की जानकारी देता है. दूसरा ‘Take Action Alert’ होता है, जो मध्यम या तेज भूकंप की स्थिति में लोगों को पहले से सावधान करता है ताकि वे सुरक्षित जगह पर जा सकें.
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भारत में भी उपलब्ध है यह सुविधा
Google का Earthquake Alerts System भारत में भी 2023 से उपलब्ध है. Android 5 या उससे ऊपर के वर्जन वाले फोन इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसके लिए फोन में इंटरनेट या मोबाइल डेटा कनेक्शन सक्रिय होना जरूरी है. अगर कोई यूजर ऐसे अलर्ट नहीं पाना चाहता, तो वह फोन की सेटिंग में जाकर Earthquake Alerts फीचर को बंद भी कर सकता है.