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पाकिस्तान चुनाव: 1947 के बाद से एक भी प्रधानमंत्री पूरा नहीं कर पाया कार्यकाल, पढ़िए राजनीतिक इतिहास

Pakistan Election 2024: 1947 में भारत से अलग होकर नया देश बनने के बाद से पाकिस्तान में एक भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल नहीं हो पाया है।

Pakistan Election 2024 : पाकिस्तान में नई सरकार के चयन के लिए गुरुवार को मतदान हो रहा है। चर्चा चल रही है कि आर्थिक और राजनितिक संकट से जूझ रहे पड़ोसी देश की कमान अब किसके हाथ में आएगी और कौन प्रधानमंत्री बनेगा। बात करें प्रधानमंत्री की तो क्या आपको पता है कि भारत से अलग होकर अलग देश बनने के बाद यानी साल 1947 से पाकिस्तान का एक भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। अधिकतर प्रधानमंत्री या तो डिसमिस कर दिए गए थे या फिर अयोग्य करार दे दिए गए थे।

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पाकिस्तान मुस्लिम लीग की सरकार (1947 से 1956)

अलग देश बनने के बाद लियाकत अली खान पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री बने थे। उन्हें और उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग को पश्चिमी पाकिस्तान में सोशलिस्ट्स से और पूर्वी पाकिस्तान में कम्युनिस्ट्स के चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। 16 अक्टूबर 1951 को लियाकत अली खान रावलपिंडी में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर रहे थे जब उन्हें गोली मार दी गई थी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया था लेकिन उनकी मौत हो गई थी। इस तरह पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए थे।

इसके बाद गवर्नर जनरल ख्वाजा निजामुद्दीन को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया था। लेकिन लहौर में दंगों और देश की आर्थिक स्थिति व आंतरिक सुरक्षा को बेहतर करने में उनकी सरकार की नाकामी के चलते उन्हें डिसमिस कर दिया गया था। फिर साल 1953 से 1955 तक मोहम्मद अली बोगरा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। लेकिन उनका कार्यवाहक गवर्नर जनरल इस्कंदर मिर्जा के साथ विवाद हो गया था जिसकी वजह से उन्होंने साल 1955 में प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

चौधरी मोहम्मद अली पाकिस्तान के चौथे प्रधानमंत्री थे जो केवल 13 महीने इस कुर्सी पर बैठ पाए। मोहम्मद अय्यूब खान की सैन्य तानाशाही के दौरान मोहम्मद अली इसका विरोध करते हुए विपक्ष में चले गए थे।

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अय्यूब खान की अगुवाई में पहला सैन्य तख्तापलट

राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जडा ने 7 अक्टूबर 1958 को संविधान को निरस्त करते हुए तख्तापलट का ऐलान किया था। इसके बाद उन्होंने मार्शल लॉ घोषित करते हुए जनरल अय्यूब खान को चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किया था। अय्यूब खान ने सिविल एडमिनिस्ट्रेशन दुरुस्त किया। इस दौरान जनता का मूड जानने के लिए एक पोल कराया गया था जिसमें 95 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा था कि उन्हें राष्ट्रपति पर पूरा भरोसा है।

साल 1965 में भारत के साथ हुआ युद्ध इस्कंदर खान के लिए टर्निंग प्वाइंट बना और यह जंग एक समझौते पर पहुंची जो अय्यूब खान ने ताशकंद में किया था। 25 मार्च 1969 को अय्यूब खान ने राष्ट्रपति पग से इस्तीफा दिया और सेना के जनरल याहया खान को देश का नियंत्रण संभालने के लिए आमंत्रित किया था। राष्ट्रपति याहया खान ने 6 दिसंबर 1971 को नूरुल अमीन को प्रधानमंत्री बनाया था। लेकिन, 20 दिसंबर को ही उन्हें पद छोड़ना पड़ गया था क्योंकि याहया खान ने भी इस्तीफा दे दिया था।

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जुल्फिकार अली भुट्टो का नेतृत्व (1973 से 1977)

जुल्फिकार अली भुट्टो साल 1971 से 1973 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे और साल 1973 से 1977 तक उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला था। उनकी सरकार को सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल मोहम्मद जिया उल हक ने 5 जुलाई 1977 को सीज कर लिया था। मार्च 1978 में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी और अप्रैल 1979 मे उन्हें फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था।

इसके बाद फिर 5 जुलाई 1977 को फिर तख्तापलट हुआ और जिया उल हर चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर बन गए। 1985 में जिया उल हक की एक विमान हादसे में मौत हो गई थी।

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जब पाकिस्तान को मिली पहली महिला प्रधानमंत्री

पाकिस्तान की कमान संभालने वाली पहली महिला नेता बेनजीर भुट्टो थीं। प्रधानमंत्री के तौर पर उनका पहला कार्यकाल 1988 से 1990 और 1993 सले 1996 तक था। उन्होंने निर्दलीय सांसदों के साथ मिलकर एक गठबंधन बनाया था लेकिन उन्हें सेना के गुस्से का सामना करना पड़ा था। अगस्त 1990 में राष्ट्रपति गुलाम इशक खान ने भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें सस्पेंड कर दिया था। अक्टूबर 1990 के चुनाव में नवाज शरीफ ने उनकी पार्टी (पाकिस्तान पीपल्स पार्टी) को हराया था।

फिर सत्ता में आए नवाज शरीफ, उनके बाद इमरान

नवाज शरीफ तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे हैं लेकिन एक बार भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। 1990 के दशक में नवाज और जनरल परवेज मुशर्रफ के बीच विवाद हो गया था जिसके चलते हुए तख्तापलट में शरीफ की कुर्सी चली गई थी। नवाज शरीफ के बाद पाकिस्तान की सत्ता क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान के हाथ में आई लेकिन वह भी कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और इस समय जेल में बंद हैं।

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