अफगानिस्तान में गुरुवार की सुबह भूकंप के तेज झटकों से धरती कांप उठी. जब लोग अपने दिन की शुरुआत कर रहे थे, तभी अचानक जमीन हिलने लगी और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई. झटके महसूस होते ही लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों और इमारतों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागे. सीस्मोलॉजिकल एजेंसियों के अनुसार, रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 5.3 से 5.4 के आसपास दर्ज की गई है. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के हिंदू कुश पहाड़ी क्षेत्र में जमीन के भीतर बताया जा रहा है. पहाड़ी इलाका और झटके काफी तेज होने की वजह से आसपास के बड़े दायरे में कंपन महसूस किया गया.
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जानमाल के नुकसान की समीक्षा जारी
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फिलहाल किसी बड़े जानमाल के नुकसान या हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है. हालांकि, दूरदराज और पहाड़ी गांवों में कच्चे मकानों के दरकने की आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है. आपदा प्रबंधन दल प्रभावित इलाकों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं ताकि जमीनी हालात का सही आकलन किया जा सके.
जमीन के नीचे की भिड़ंत बनती है वजह
भूगर्भ वैज्ञानिकों के मुताबिक, अफगानिस्तान की भौगोलिक बनावट ही इसके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार है. यह देश इंडियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के ठीक टकराव वाले जोन पर बसा हुआ है. इंडियन प्लेट लगातार हर साल कुछ सेंटीमीटर उत्तर की तरफ यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक रही है. जब ये दोनों विशालकाय चट्टानें आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे पर दबाव बनाती हैं, तो इनके फॉल्ट लाइन्स में भारी ऊर्जा जमा हो जाती है. यही ऊर्जा जब अचानक बाहर निकलती है, तो भयानक भूकंप का रूप ले लेती है.
हिंदू कुश और चमन फॉल्ट, खतरे का बड़ा केंद्र
अफगानिस्तान का हिंदू कुश पहाड़ी इलाका और चमन फॉल्ट लाइन भूकंप के लिहाज से ‘रेड जोन’ माने जाते हैं. हिंदू कुश में अक्सर आने वाले भूकंप कम गहराई वाले होते हैं. वैज्ञानिक बताते हैं कि भूकंप का केंद्र जमीन की सतह के जितना करीब होगा, ऊपर की तबाही उतनी ही ज्यादा भयानक होगी.