नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब इसके आर्थिक नुकसान का आकलन किया जाएगा. नेपाल की प्रतिनिधि सभा की वित्त समिति ने बुधवार को सात सदस्यों वाली एक उपसमिति बनाई है. यह टीम बाढ़ से देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े असर के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन और क्लाइमेट फाइनेंस से जुड़े मामलों का अध्ययन करेगी. उपसमिति को अपनी रिपोर्ट 18 सितंबर तक सौंपनी है.
सात सांसदों की टीम करेगी अध्ययन
यह उपसमिति सांसद सुशीला खड़का के समन्वय में काम करेगी. इसके अन्य सदस्यों में नरेंद्र कुमार केरुंग, परशुराम तमांग, पुष्पराज कंडेल, लीमा अधिकारी, पुष्पा चौधरी और सुशांत वैदिक शामिल हैं. वित्त समिति की बैठक में उपसमिति बनाने का फैसला किया गया. समिति को खास तौर पर बाढ़ से अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान और जलवायु वित्त से जुड़े पहलुओं की पड़ताल करने की जिम्मेदारी दी गई है. वित्त समिति के अध्यक्ष कृष्ण हरि बुधाथोकी ने बताया कि उपसमिति अध्ययन पूरा करके तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी. रिपोर्ट के जरिए बाढ़ से हुए आर्थिक नुकसान और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए जरूरी कदमों पर भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.
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बाढ़ ने कई इलाकों में मचाई तबाही
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ ने रसुवा समेत कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया. भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचाया. कई जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुईं. नेपाल के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और नदी के आसपास के अन्य जिलों में बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है. हजारों लोग अब भी लापता हैं.
यह आपदा नेपाल की हाल की सबसे गंभीर प्राकृतिक आपदाओं में शामिल हो गई है. 7-8 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी और हजारों लोग अब भी लापता थे. राहत और बचाव अभियान जारी है. कई जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग भी लापता बताए गए हैं, जिसके चलते सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
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बाढ़ से सिर्फ जान-माल नहीं, अर्थव्यवस्था पर भी असर
इस आपदा से सड़कों, पुलों, घरों और जलविद्युत ढांचे को हुए नुकसान का सीधा असर नेपाल की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. खासकर जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान होने से बिजली उत्पादन और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसी वजह से संसदीय उपसमिति का अध्ययन महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे और भविष्य की आपदाओं के लिए जलवायु वित्त की जरूरत पर भी समिति विचार करेगी.
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