Iran Israel War Update: क्या मिडिल ईस्ट की जंग दुनिया में विश्व युद्ध को दस्तक दे चुकी है? अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 7 खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर हमला कर दिया है। ईरान की इस कार्रवाई के विरोध में यूरोपीय संघ और NATO देश आ गए हैं। उधर हिजबुल्लाह, हूती और अन्य आतंकी संगठन ईरान के समर्थन में इजरायल पर हमला कर रहे हैं। लाल सागर और होर्मुज खाड़ी ब्लॉक हो सकती है।
🇬🇧🇺🇸🇮🇷 British Prime Minister Keir Starmer:
The only way to stop the threat is to destroy Iranian missiles at source, in their storage depots or the launchers which are used to fire the missiles.
The United States has requested permission to use British bases for that specific… pic.twitter.com/29LlfqrcCB---विज्ञापन---— Visioner (@visionergeo) March 1, 2026
युद्धक्षेत्र में उतर सकती है NATO देशों की सेना
बेशक रूस-चीन और पाकिस्तान ने ईरान का समर्थन किया है, लेकिन 7 खाड़ी देशों समेत यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी ईरान के विरोधी हो गए हैं। NATO देशों की सेना खाड़ी देशों का बचाव करने को रणक्षेत्र में उतर सकती है। इन सभी देशों ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के हमलों को रोकने की तैयारी कर ली है। एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी करके ये देश कह चुके हैं कि नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा में एकजुट खड़े हैं। ईरान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराते हैं।
चीन और रूस ने हमले को अमानवीय बताया
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन को शोक संदेश भेजा है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के हमले की तीखी निंदा की गई है। पुतिन ने खामेनेई और उनके परिवार की ‘हत्या’ को अमानवीय करार दिया है। ईरान पर हमले को पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की हत्या ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है। चीन ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का अपमान बताया।
🚨BREAKING: FRANCE HAS ENTERED THE WAR 🇫🇷
— BRITAIN IS BROKEN 🇬🇧 (@BROKENBRITAIN0) March 1, 2026
The French Aircraft carrier Charles de Gaulle has been deployed to the eastern Mediterranean amid escalations in the Iran – Israel war.
This comes after a French airbase in Abu Dhabi was struck by Iranian Missiles earlier today. pic.twitter.com/dVFsCYH2YQ
ईरान के हमले रोकने के लिए हुए एकजुट
ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने साफ कहा है कि वे अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के हमलों को रोकेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का कहना है कि ईरान के हमले से मध्य पूर्व में तैनात उनके सैनिकों और नागरिकों की जान खतरे में पड़ रही है। अपने हितों और सहयोगी देशों के नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी और संतुलित कदम उठाने होंगे। इसके लिए अमेरिका तीनों देशों के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल कर सकता है।
फ्रांस ने तैनात किया विशालकाय युद्धपोत
ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस ने अपने विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात कर दिया है। यह तैनाती अबू धाबी में फ्रांस के एयरपोर्ट पर ईरानी मिसाइलों के हमले के बाद हुई है। ब्रिटेन ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ हमलों के लिए मिलिट्री बेस के इस्तेमाल की इजाजत दी तो ईरान ने ड्रोन से साइप्रस में एयर बेस पर हमला किया। इसके बाद ब्रिटेन ने अमेरिका को डिएगो ग्रेसिया मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने को अमेरिका को का दिया।
Vice-President of the European Commission, Kaja Kallas tweets, "Iran’s attacks of a number of countries in the Middle East are inexcusable. The events must not lead to further escalation that could threaten the region, Europe and beyond, with unpredictable consequences. We are… pic.twitter.com/T3ntrJz6Os
— ANI (@ANI) March 2, 2026
ब्रिटेन के फाइटर जेट भी आसमान में चढ़े
ब्रिटेन के फाइटर जेट अमेरिकी एयरफोर्स के साथ आसमान में मंडरा रहे हैं, लेकिन ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर का यह भी कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि हम युद्ध में शामिल हो रहे हैं। सिर्फ बचाव करने के लिए मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई है। ईरानी मिसाइलों को आसमान में ही नष्ट करना, उनके स्टॉक और मिसाइल लॉन्चर को तबाह करना मकसद है। अमेरिका ने ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति मांगी है और हमने अनुरोध स्वीकार किया।
यूरोपीय संघ खाड़ी देशों के बचाव में आया
यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने ट्वीट किया कि मध्य पूर्व के कई देशों पर ईरान के हमले अक्षम्य हैं। ऐसा तनाव नहीं बढ़ना चाहिए, जो यूरोप के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए मिडिल ईस्ट में यूरोपीय संघ के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। तनाव कम करने और ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए एक स्थायी समाधान निकालने के सभी राजनयिक प्रयासों में अपना योगदान जारी रखेंगे।

ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मोर्चा लामबंद
बता दें कि अगर ईरान ने NATO देशों में से किसी एक देश पर हमला किया तो संगठन के सभी देशों को रणक्षेत्र में उतरना पड़ सकता है। वहीं अगर हालात और बिगड़े तो अमेरिका अपने साथी यूरोपीय देशों पर भी युद्ध में शामिल होने का दबाव बना सकता है। कुल मिलाकर ईरान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत मोर्चा बन गया है। दुनिया की महाशक्तियां भी अप्रत्यक्ष रूप से जंग के मैदान में हैं। पश्चिमी देशों का धैर्य जवाब दे रहा है। देखते हैं आगे क्या होता है…










