खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच जापान ने एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को ऐलान किया कि जापान अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक हिस्सा जारी करेगा. ऐसा करने वाला वह G7 देशों के समूह में पहला देश बन गया है.
प्रधानमंत्री ताकाइची ने टोक्यो में बताया कि जापान 16 मार्च से अपने निजी क्षेत्र के तेल भंडार से 15 दिनों की खपत के बराबर और सरकारी तेल भंडार से एक महीने की खपत के बराबर तेल बाजार में जारी करने की योजना बना रहा है. इस कदम का मुख्य मकसद खाड़ी में जारी ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से सप्लाई की बाधा और कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करना है.
जापान क्रूड ऑयल के लिए बहुत ज्यादा मिडल ईस्ट देशों पर निर्भर है. ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की सप्लाई पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. इसी वजह से जापान ने यह कदम उठाया है.
जापान का यह फैसला प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों के बीच हुई चर्चाओं के बाद आया है. भारत जैसे देश फिलहाल अपने रणनीतिक भंडार को न छूने की नीति पर चल रहे हैं, वहीं जापान ने बाजार में अतिरिक्त तेल सप्लाई करके कीमतों को काबू में रखने का जोखिम भरा लेकिन कड़ा फैसला लिया है. अब देखना ये होगा कि क्या अन्य G7 देश भी जापान की राह पर चलते हैं या नहीं?
खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध और तनाव के बीच जापान ने एनर्जी मार्केट को स्थिर करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बुधवार को ऐलान किया कि जापान अपने रणनीतिक तेल भंडार का एक हिस्सा जारी करेगा. ऐसा करने वाला वह G7 देशों के समूह में पहला देश बन गया है.
प्रधानमंत्री ताकाइची ने टोक्यो में बताया कि जापान 16 मार्च से अपने निजी क्षेत्र के तेल भंडार से 15 दिनों की खपत के बराबर और सरकारी तेल भंडार से एक महीने की खपत के बराबर तेल बाजार में जारी करने की योजना बना रहा है. इस कदम का मुख्य मकसद खाड़ी में जारी ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से सप्लाई की बाधा और कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करना है.
जापान क्रूड ऑयल के लिए बहुत ज्यादा मिडल ईस्ट देशों पर निर्भर है. ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव की वजह से क्रूड ऑयल की सप्लाई पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं. इसी वजह से जापान ने यह कदम उठाया है.
जापान का यह फैसला प्रमुख ऊर्जा उपभोक्ता देशों के बीच हुई चर्चाओं के बाद आया है. भारत जैसे देश फिलहाल अपने रणनीतिक भंडार को न छूने की नीति पर चल रहे हैं, वहीं जापान ने बाजार में अतिरिक्त तेल सप्लाई करके कीमतों को काबू में रखने का जोखिम भरा लेकिन कड़ा फैसला लिया है. अब देखना ये होगा कि क्या अन्य G7 देश भी जापान की राह पर चलते हैं या नहीं?