मिडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच सीजफायर की खबर आई है. लेबनान में एक दिन की भीषण गोलाबारी और भारी मौतों के बाद आखिरकार इजरायल और हिज्बुल्लाह सीजफायर पर सहमत हो गए हैं. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम उस समय उठाया गया जब दोनों पक्षों के बीच बढ़ता हिंसक टकराव मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति स्थापित करने के वैश्विक प्रयासों को पूरी तरह पटरी से उतारने की कगार पर पहुंच गया था.
यह युद्धविराम लेबनान के स्थानीय समयानुसार शाम 4 बजे से ठीक पहले प्रभावी हुआ. इस समझौते को कराने में अमेरिका और कतर ने अहम भूमिका निभाई, जिन्हें परदे के पीछे से ईरान का भी पूरा सहयोग मिला.
22 मौतों के बाद थमीं बंदूकें
यह युद्धविराम दक्षिणी लेबनान में भड़के उस भीषण तनाव के बाद आया है, जिसने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया था. इजरायली हवाई हमलों में जहां लेबनान के 18 नागरिक मारे गए, वहीं हिज्बुल्लाह के लड़ाकों के हमलों में इजरायल के 4 सैनिकों की भी जान चली गई. इस अचानक भड़की हिंसा ने चिंता बढ़ा दी थी. आशंका जताई जा रही थी कि इजरायल की उत्तरी सीमा पर बढ़ता यह तनाव ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे बड़े कूटनीतिक समझौतों को हमेशा के लिए दफन कर सकता है. यही वजह रही कि अमेरिकी और कतरी मध्यस्थों ने बेहद कम समय में गहन बातचीत कर दोनों पक्षों को शत्रुता रोकने के लिए राजी कर लिया.
रद्द करनी पड़ी थी अमेरिका-ईरान की गुप्त वार्ता
लेबनान में जारी इस जंग ने वैश्विक कूटनीति को कितना जटिल बना दिया था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका और ईरान की बेहद अहम बैठक को ऐन वक्त पर रद्द करना पड़ा. यह बैठक ग्लोबल ट्रेड के सबसे मुख्य समुद्री मार्ग ‘स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज’ को फिर से सुरक्षित खोलने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही थी.
हिज्बुल्लाह के एक वरिष्ठ सांसद ने खुलासा किया कि ईरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि जब तक लेबनान में पूर्ण युद्धविराम लागू नहीं होता, तब तक वह अमेरिका के साथ किसी भी कूटनीतिक चर्चा को आगे नहीं बढ़ाएगा. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने रद्द हुई बातचीत पर सीधे कुछ नहीं कहा, लेकिन लेबनान में इजरायली सेना की कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की बात दोहराई है.
इजरायल की दोटूक
भले ही लेबनान में बंदूकें शांत हो गई हों, लेकिन इजरायल के कड़े तेवर अभी भी बरकरार हैं. इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने एक बड़ा बयान देते हुए साफ किया कि हिज्बुल्लाह के साथ इस समझौते के बावजूद इजरायली सैनिकों के पास किसी भी संभावित खतरे के खिलाफ कार्रवाई करने की पूरी आजादी रहेगी.