मिडिल ईस्ट में एक तरफ शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना (IDF) पर आरोप लग रहे हैं कि वह रणनीतिक रूप से पूरे के पूरे गांवों का नामो-निशान मिटा रही है. 'गार्जियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर भारी मात्रा में विस्फोटक लगाकर उन्हें रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ा दिया है.
पूरे के पूरे गांव उड़ाए
सोशल मीडिया पर वायरल और इजरायली सेना द्वारा शेयर किए गए वीडियो में तैयबेह, नकौरा और देर सेरयान जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर विस्फोट होते देखे जा सकते हैं. एक्सपर्ट्स ने इजरायल की इस रणनीति को 'डोमिसाइड' का नाम दिया है. इसका अर्थ है घरों का व्यवस्थित विनाश, ताकि उस क्षेत्र को भविष्य में इंसानी बसावट के लायक ही न छोड़ा जाए. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने पहले ही सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को नष्ट करने का आह्वान किया था, जो गाजा के राफा मॉडल की याद दिलाता है.
यह भी पढ़ें : ईरान को एहसास तक नहीं होगा और उड़ जाएंगी होर्मुज की बारूदी सुरंगें, जानिए US का प्लान!
2000 से ज्यादा मौतें और 'सुरक्षा क्षेत्र' का दावा
इजरायल का तर्क है कि वह इन घरों के नीचे बने हिजबुल्लाह के सुरंगों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इजरायल अब लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर एक सिक्योरिटी जोन बनाने की तैयारी में है. लेबनानी मीडिया के अनुसार, हमलों में मरने वालों की संख्या 2,000 पार कर चुकी है और विस्थापितों की वापसी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.
इस्लामाबाद वार्ता से क्या निकला?
इधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने अपनी "अंतिम और सबसे अच्छी पेशकश" मेज पर रख दी है, अब फैसला ईरान को करना है.
यह भी पढ़ें : 21 घंटे की शांति वार्ता के दौरान जेडी वेंस ने ट्रंप को किए दर्जनों कॉल, फिर भी ईरान-अमेरिका में नहीं बनी बात
दूसरी ओर, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि उन्होंने रचनात्मक पहल की थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में विफल रहा. फिलहाल क्षेत्र में एक नाजुक युद्धविराम की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन लेबनान में गांवों की तबाही एक गहरे मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही है.
मिडिल ईस्ट में एक तरफ शांति वार्ताओं का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ युद्ध के मैदान से दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आ रही हैं. दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना (IDF) पर आरोप लग रहे हैं कि वह रणनीतिक रूप से पूरे के पूरे गांवों का नामो-निशान मिटा रही है. ‘गार्जियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सीमावर्ती गांवों में घरों के भीतर भारी मात्रा में विस्फोटक लगाकर उन्हें रिमोट कंट्रोल के जरिए उड़ा दिया है.
पूरे के पूरे गांव उड़ाए
सोशल मीडिया पर वायरल और इजरायली सेना द्वारा शेयर किए गए वीडियो में तैयबेह, नकौरा और देर सेरयान जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर विस्फोट होते देखे जा सकते हैं. एक्सपर्ट्स ने इजरायल की इस रणनीति को ‘डोमिसाइड’ का नाम दिया है. इसका अर्थ है घरों का व्यवस्थित विनाश, ताकि उस क्षेत्र को भविष्य में इंसानी बसावट के लायक ही न छोड़ा जाए. इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने पहले ही सीमावर्ती गांवों के सभी घरों को नष्ट करने का आह्वान किया था, जो गाजा के राफा मॉडल की याद दिलाता है.
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2000 से ज्यादा मौतें और ‘सुरक्षा क्षेत्र’ का दावा
इजरायल का तर्क है कि वह इन घरों के नीचे बने हिजबुल्लाह के सुरंगों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. इजरायल अब लिटानी नदी तक दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर कब्जा कर एक सिक्योरिटी जोन बनाने की तैयारी में है. लेबनानी मीडिया के अनुसार, हमलों में मरने वालों की संख्या 2,000 पार कर चुकी है और विस्थापितों की वापसी की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है.
इस्लामाबाद वार्ता से क्या निकला?
इधर, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चल रही अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने तेहरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन ने अपनी “अंतिम और सबसे अच्छी पेशकश” मेज पर रख दी है, अब फैसला ईरान को करना है.
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दूसरी ओर, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि उन्होंने रचनात्मक पहल की थी, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरानी प्रतिनिधिमंडल का विश्वास जीतने में विफल रहा. फिलहाल क्षेत्र में एक नाजुक युद्धविराम की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन लेबनान में गांवों की तबाही एक गहरे मानवीय संकट की ओर इशारा कर रही है.