ट्रंप के ‘No War’ ऐलान पर ईरानी मीडिया का तंज, बोला-‘हवा निकल गई?’
ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को रोकने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'No War' ऐलान पर ईरानी मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने इसे अमेरिका की रणनीतिक मजबूरी बताते हुए तंज कसा और दावा किया कि बढ़ते दबाव के चलते वॉशिंगटन को अपना रुख बदलना पड़ा है.
Edited By : Versha Singh|Updated: Aug 3, 2026 09:52
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फाइल फोटो
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भीषण सैन्य हमलों को फिलहाल रोकने का फैसला किया है. ट्रंप का कहना है कि खाड़ी देशों की अपील और क्षेत्र में तनाव कम करने के मकसद से उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है. हालांकि ईरानी मीडिया ने ट्रंप के इस फैसले का जमकर मजाक उड़ाया है.
ट्रंप के इस ऐलान को ईरान के सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने अलग नजरिए से पेश किया है. ईरानी मीडिया संस्थानों ने इसे अमेरिका की रणनीतिक कमजोरी बताया और दावा किया कि वॉशिंगटन सैन्य कार्रवाई करने की स्थिति में नहीं था और अब बातचीत का रास्ता अपनाने को मजबूर हो गया है.
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VIDEO | US President Donald Trump (@POTUS) says, "I prefer to reach an agreement with Iran. I'm not looking to kill people."
ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज-एजेंसी फार्स ने अपनी एक रिपोर्ट में ट्रंप पर तंज कसते हुए लिखा, ‘बेवकूफ की हवा निकल गई.’ ईरानी मीडिया का आरोप है कि अमेरिका ने दबाव और परिस्थितियों के चलते अपना रुख बदला है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे क्षेत्र में शांति बनाए रखने की पहल के रूप में पेश कर रहा है.
ट्रंप ने युद्ध रोकने का किया था ऐलान
दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़े हमले को फिलहाल रोक दिया है ताकि दोनों देशों के बीच संभावित समझौते और परमाणु मुद्दे पर बातचीत का मौका मिल सके. उनके अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के कई सहयोगी देशों ने भी तनाव कम करने और सैन्य टकराव से बचने की सलाह दी थी. अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और कूटनीतिक समाधान तलाशना है.
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हालांकि, तेहरान ने अमेरिकी दावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है. ईरानी पक्ष का कहना है कि वह अमेरिका की घोषणाओं को सतर्कता के साथ देख रहा है, क्योंकि इससे पहले भी कई बार युद्धविराम या सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान हो चुका है लेकिन बाद में हालात फिर से बिगड़ चुके हैं. इसी वजह से ईरान ने अपनी सुरक्षा तैयारियों में किसी तरह की ढील नहीं दी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की पूरी तैयारी कर ली गई थी, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगी देशों के अनुरोध के बाद इसे फिलहाल रोकने का फैसला लिया गया. उनके मुताबिक, खाड़ी देशों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत के जरिए समाधान निकालने की संभावना अभी भी है.
मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया कि प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी कार्रवाई साबित हो सकती थी. उन्होंने कहा कि सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन जब सहयोगी देशों ने युद्ध टालने और कूटनीतिक प्रयासों से इस युद्ध को खत्म करने की अपील की, तो अमेरिका ने उस पर गंभीरता से विचार किया.
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ट्रंप के अनुसार, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर ने स्पष्ट रूप से सैन्य हमले के बजाय बातचीत का समर्थन किया. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने सऊदी अरब के शाह और क्राउन प्रिंस से भी चर्चा की थी. दोनों नेताओं का मानना था कि किसी बड़े सैन्य संघर्ष के परिणामों का अनुमान लगाना मुश्किल है और इससे पूरे क्षेत्र में मानवीय संकट पैदा हो सकता है.
ईरान ने समझौते की खबरों से किया इनकार
हालांकि, ईरान के सरकारी मीडिया और आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है कि तेहरान ने किसी समझौते की पहल की या अमेरिका से संभावित सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था. ईरानी पक्ष का कहना है कि ऐसी खबरों का वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है.