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Ali Khamenei Funeral: खामेनेई के अंतिम संस्कार में बिहार के राज्यपाल ही क्यों, कौन हैं सैयद अता हसनैन?

Iran Khamenei Funeral: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत ने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को भेजा है. पीएम मोदी को न्योता मिलने के बाद भी भारत ने एक राज्य के राज्यपाल को क्यों चुना? जानिए अमेरिका-इज़राइल के साथ कूटनीतिक संतुलन और चाबहार पोर्ट से जुड़ा पूरा समीकरण.

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Ayatollah Ali Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत सरकार की ओर से एक विशेष प्रतिनिधिमंडल हिस्सा ले रहा है. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा कर रहे हैं. हालांकि, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कार्यक्रम के लिए व्यक्तिगत तौर पर आमंत्रित किया था, लेकिन भारत ने एक राज्य के संवैधानिक प्रमुख को भेजने का फैसला किया. जानिए कश्मीर में 15 कोर के पूर्व कमांडर और शिया समुदाय के इस बड़े चेहरे के बारे में, जिन्हें MEA ने इस नाजुक कूटनीतिक मिशन के लिए चुना है.

कोई साधारण राजनेता नहीं, सेना के जांबाज कमांडर रहे हैं हसनैन

बिहार के वर्तमान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन का भारतीय सेना में एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक करियर रहा है. वे भारतीय सेना की रणनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील 15 कोर (श्रीनगर) के कमांडर रह चुके हैं. कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों और सीमा सुरक्षा को लेकर उनका अनुभव बेजोड़ माना जाता है.

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मिडिल ईस्ट और सामरिक मामलों के बड़े एक्सपर्ट

सेना से रिटायर होने के बाद भी वे अंतरराष्ट्रीय मामलों और रणनीतिक समीकरणों पर अपनी गहरी पकड़ के लिए जाने जाते हैं. उन्हें मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के सैन्य, राजनीतिक और धार्मिक समीकरणों की असाधारण समझ है. वे कई अंतरराष्ट्रीय थिंक-टैंक का हिस्सा रहे हैं और रक्षा मामलों पर लगातार अपनी विशेषज्ञ राय देते रहे हैं.

भारत के शिया समुदाय का बड़ा और सम्मानित चेहरा

सैयद अता हसनैन की एक और बड़ी पहचान यह है कि वे भारत के शिया मुस्लिम समुदाय में एक बेहद सम्मानित और क्रेडिबल नाम हैं. चूंकि ईरान एक शिया बहुल धर्मतांत्रिक देश है, इसलिए भारत सरकार ने कूटनीतिक रूप से एक ऐसा चेहरा चुना जो वहां के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई और ईरान के शीर्ष सैन्य जनरलों के साथ ‘पीपल-टू-पीपल’ और ‘कल्चरल कनेक्ट’ को मजबूती से स्थापित कर सके.

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क्यों खुद प्रधानमंत्री नहीं जा सके ईरान?

ईरान ने भारत को सर्वोच्च कूटनीतिक सम्मान देते हुए सीधे प्रधानमंत्री को आमंत्रित किया था. हालांकि, कूटनीतिक प्रोटोकॉल के अनुसार, प्रधानमंत्री का 6 से 11 जुलाई के बीच पहले से ही इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का महत्वपूर्ण दौरा तय था. चूंकि खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलने वाले हैं, ऐसे में समय के टकराव के कारण पीएम मोदी का जाना संभव नहीं था. वहीं, साल 2024 में जब ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का निधन हुआ था, तब भारत ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भेजा था. लेकिन इस बार मध्य पूर्व में तनाव के अत्यधिक बढ़ जाने के कारण कूटनीतिक प्रतिनिधित्व के स्तर को थोड़ा संतुलित रखा गया है.

अमेरिका और इज़राइल के साथ कूटनीतिक संतुलन

फरवरी 2026 में अमेरिकी और इज़राइली हवाई हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति है. भारत के संबंध जहां ईरान (चाबहार पोर्ट और ऊर्जा सुरक्षा) से बेहद मजबूत हैं, वहीं इज़राइल और अमेरिका के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी अपने चरम पर है. ऐसी नाजुक स्थिति में अगर भारत अपने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या कैबिनेट रैंक के मुख्य विदेश मंत्री को ईरान भेजता तो वैश्विक स्तर पर यह संदेश जा सकता था कि भारत इस भू-राजनीतिक युद्ध में ईरान के पाले में खड़ा है. अतः विदेश राज्य मंत्री के साथ एक सम्मानित सैन्य पृष्ठभूमि वाले राज्यपाल को भेजकर भारत ने अपनी ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ का परिचय दिया है—यानी हम ईरान के साथ अपनी दोस्ती भी निभाएंगे और अपने अन्य वैश्विक मित्रों को भी नाराज नहीं करेंगे.

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Frequently Asked Questions

उत्तर: भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान गए हैं.
उत्तर: ईरान के राष्ट्रपति के व्यक्तिगत निमंत्रण के बावजूद, पीएम मोदी पूर्व निर्धारित प्रतिबद्धताओं के कारण 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के राजकीय दौरे पर हैं, जिसके चलते वे शामिल नहीं हो सके.
उत्तर: राज्यपाल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के पूर्व शीर्ष कमांडर होने के साथ-साथ मध्य पूर्व मामलों के विशेषज्ञ हैं. उन्हें भेजना यह दर्शाता है कि भारत ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक संबंधों को बिना किसी बड़े वैश्विक विवाद (अमेरिका-इज़राइल के साथ संतुलन) के गरिमापूर्ण तरीके से बनाए रखना चाहता है.
First published on: Jul 03, 2026 09:39 AM

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Vijay Jain

विजय जैन भारतीय मीडिया जगत का एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्तमान में न्यूज 24 में सीनियर न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत विजय को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 23 से अधिक वर्षों का लंबा और समृद्ध अनुभव है. राजनीति, चुनाव, बिजनेस, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसी हर प्रमुख बीट पर मजबूत पकड़ रखने वाले विजय अपनी निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. पत्रकारिता में उनके अद्वितीय योगदान और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए उन्हें साल 2018 में प्रतिष्ठित 'नेशनल श्रीफल अवार्ड' से सम्मानित किया गया था. डिजिटल दौर में वे ट्रेडिशनल जर्नलिज्म के अनुभवों को न्यू-एज मीडिया और SEO स्ट्रेटेजी के साथ जोड़कर खबरों को नया आयाम दे रहे हैं.

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