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2007 में मनमोहन सिंह के राज में शुरू हुई थी यूरोपीय संघ से व्यापार वार्ता, ट्रेड डील फाइनल होने में क्यों लगे 18 साल?

India European Union Trade Deal: भारत और यूरोपीय संघ के बीच साल 2007 में मनमोहन सिंह के राज में व्यापार वार्ता शुरू हुई थी और 18 साल बाद साल 2026 में ट्रेड डील हुई. इन 18 साल में व्यापार वार्ता में कई उतार चढ़ाव आए. 9 साल तो कोई व्यापार वार्ता हुई ही नहीं थी.

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India European Union Trade Inside Story: भारत और यूरोपियन यूनियन में व्यापार समझौता हो गया है. यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सला वॉन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने भारत के साथ रक्षा, सुरक्षा, आयात, निर्यात समझौते किए और साइन करके दोनों देशों ने व्यापार समझौते की औपचारिक घोषणा की. भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता होने से दोनों पक्षों के बीच जहां आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, वहीं दोनों देशों के बिजनेस सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा.

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18 साल लंबी बातचीत का रिजल्ट समझौता

बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता करीब 18 साल चली बातचीत का का परिणाम है. यूरोपीय संघ के साथ व्यापार वार्ता कांग्रेस की सरकार के समय मनमोहन सिंह के राज में साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन साल 2013 में व्यापार की शर्तों और मुद्दों के कारण वार्ता लंबित हो गई. साल 2022 में व्यापार वार्ता फिर शुरू हुई और पिछले 3 साल में बातचीत में तेजी लाकर व्यापार वार्ता को फाइनल स्टेज तक पहुंचाया गया. लक्ष्य साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है.

इन वजहों से 9 साल बंद रही व्यापार वार्ता

बता दें कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापार वार्ता में 18 साल लगने का कारण व्यापार समझौते की जटिल शर्तें और मुद्दे थे. यूरोपीय संघ को टैरिफ में कटौती और भारत के बाजार में पहुंच चाहिए थी, जबकि भारत को अपने कृषि और डेयरी सेक्टर की सिक्योरिटी चाहिए थी. भारत ने किसानों और डेयरी उद्योग को सस्ते आयात से बचाने के लिए सख्त शर्तें रखीं, जिनसे यूरोपीय संघ सहमत नहीं था.

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भारत अपने प्रोफेशनल्स के लिए वीजा और काम के आसान नियम चाहता था. यूरोपीय संघ के कड़े क्वालिट स्टैंडर्ड, सर्टिफिकेशन और रेगुलेटरी भी समस्या बने. यूरोपीय संघ को भारत से व्यापार वार्ता करने के लिए 27 सदस्य देशों की सहमति और संसद की मंजूरी चाहिए, लेकिन भारत के लिए किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा जरूरी थी, इसलिए कोई फैसला नहीं होने के कारण साल 2013 में वार्ता बंद हो गई थी.

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अब व्यापार समझौते से होंगे ये फायदे

बता दें कि व्यापार समझौता होने के बाद भारत और यूरोपीय संघ के 27 देशों के बीच व्यापार संबंध बन गए हैं, इसलिए यूरोपीय संघ के साथ समझौते को ‘मदर ऑफ डील्स’ कहा गया है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) भारत को यूरोपीय संघ के साथ सीधा व्यापार करने की सुविधा देगा, जिससे आयात की लागत में भारी कमी आएगी. यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, इसलिए दोनों के बीच 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 120 बिलियन यूरो से ज्यादा का हुआ था.

वहीं ताजा समझौते से न केवल भारतीय निर्यात, खासकर फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल और IT सेक्टर को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि आयात शुल्क में कटौती होने से उपभोक्ताओं को सस्ते आयात मिलेंगे.कपड़ा, चमड़ा, रत्न, आभूषण, केमिकल, मशीनरी के बिजनेस सेक्टर को बड़ा फायदा होगा. यूरोपीय संघ ने कई उत्पादों पर करीब 10% शुल्क लगाया हुआ है, जो ट्रेड डील साइन होने के बाद खत्म हो जाएगा. रक्षा और सुरक्षा सहयोग के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास और टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान शामिल है.

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First published on: Jan 27, 2026 10:39 AM

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About the Author

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन एवं एमफिल कोर्स किया है। 13 साल से डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी हूं। वर्तमान में BAG Convergence Limited के माल‍िकाना हक वाले News 24 हिंदी डिजिटल विंग से बतौर चीफ सब एडिटर जुड़ी हूं। चीफ सब एडिटर की भूमिका निभाते हुए यहां की कोर टीम का हिस्सा हूं। नेशनल, इंटरनेशनल, राजनीति, क्राइम, फीचर आदि टॉपिक कवर करती हूं। घूमने, खाने और शॉपिंग की शौकीन खुशबू को नए ट्रेंड, नई जगह और ऐडवेंचर की तलाश रहती है।

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