मिडल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध के बाद गहराते वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर है. सरकारी सूत्रों ने कहा है कि देश की एनर्जी सिक्योरिटी वर्तमान में बेहद मजबूत स्थिति में है. भारत के पास पर्याप्त एनर्जी स्टॉक मौजूद है और इसे हर दिन तेजी से भरा जा रहा है.
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पूरी दुनिया में भले ही कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता हो, लेकिन भारत के पास फिलहाल आपूर्ति की कोई कमी नहीं है. एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) का स्टॉक भी संतोषजनक है. साथ ही भरोसा दिलाया है कि दुनिया के बाजार में कच्चे तेल की कोई किल्लत नहीं है और भारत लगातार नए सप्लायर्स के संपर्क में है.
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ऑस्ट्रेलिया-कनाडा ने दिया ऑफर
सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारत 195 मिलियन मीट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (MMSCMD) गैस इंपोर्ट करता है. इसमें कतर की हिस्सेदारी केवल 60 MMSCMD है. भारत ने हाल ही यूएस (US) और यूएई (UAE) के साथ नए कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं. इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भी भारत को गैस बेचने का बड़ा ऑफर दिया है. भारत गैस खरीदने के लिए दूसरे मार्केट भी ढूंढ रहा है.
Government source say –
— ANI (@ANI) March 5, 2026
* India is in a very comfortable position in energy security. Current position of stock is comfortable. Stock is being replenished every day.
* No shortage of LPG or LNG. There is no shortage of Crude oil in the world. India is in touch with other… pic.twitter.com/09r88Hdv2Y
दिन में दो बार हो रहा रिव्यू
साथ ही बताया गया है कि भारत क्रूड और LPG खरीदने के लिए बड़े ऑयल प्रोड्यूसर्स और ट्रेडर्स से बात कर रहा है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) और ऑर्गनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज (OPEC) से बात कर रहा है. इसके साथ ही भारत जहाजों का इंश्योरेंस लेने के लिए USA से बात कर रहा है. दिन में दो बार एनर्जी की स्थिति का रिव्यू किया जा रहा है.
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क्यों हुआ संकट?
अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता बंद कर दिया गया है. इस रास्ते से ग्लोबल ऑयल एंड गैस का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है. इसे दुनिया का तेल सप्लाई के लिए अहम चेकपॉइंट माना जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों टैंकरों ने खाड़ी जल में लंगर डाले हुए हैं.
यह ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है. यह रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है.
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भारत पर क्या असर?
भारत की क्रूड ऑयल के लिए इस रास्ते पर ज्यादा निर्भरता नहीं है. लेकिन एलपीजी और एलएनजी गैस के लिए भारत इस रास्ते पर ज्यादा निर्भर है. भारत के कुल ऑयल इंपोर्ट का आधा हिस्सा (करीब 2.5-2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन) इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से इस रास्ते से आता है.
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भारत के पास LNG और LPG के लिए कोई स्ट्रक्चरल बफर्स नहीं हैं. भारत का करीब 60% LNG इंपोर्ट इसी रास्ते से आता है. LPG और LNG की स्पॉट कार्गो अवेलेबिलिटी भी कम है, यानी कमी होने के सूरत में इसकी दूसरे स्रोत या तरीके से इसकी सप्लाई नहीं हो सकती.










