Arif Khan
आरिफ खान मंसूरी को डिजिटल मीडिया में करीब 15 वर्षों का अनुभव है . वर्तमान में न्यूज24 की डिजिटल विंग में कार्यरत हैं. इससे पहले देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं.
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पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से भारत के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है. समुद्री खुफिया डेटा फर्म ‘केपलर’ के आंकड़ों के मुताबिक, फारस की खाड़ी से भारत की ओर आने वाले अधिकांश कमर्शियल जहाजों और ऑयल टैंकर्स ने संभावित ईरानी हमलों से बचने के लिए अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद करना शुरू कर दिया है. समुद्री भाषा में इस रणनीति को ‘गोइंग डार्क’ कहा जाता है.
आमतौर पर सभी कमर्शियल जहाज अपनी पहचान, लाइव लोकेशन और डेस्टिनेशन की जानकारी देने के लिए ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ ट्रांसपोंडर्स को हमेशा ऑन रखते हैं. लेकिन इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जोखिम इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि 1 मई से 25 जून के बीच भारत आने वाले 73 जहाजों में से 45 जहाजों ने इसे पार करते समय अपने ट्रांसपोंडर्स पूरी तरह बंद रखे ताकि वे ईरान की नजरों में न आ सकें.
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इनमें पनामा, लाइबेरिया, यूएई और मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले वे जहाज भी शामिल हैं जो भारत के लिए माल या कच्चा तेल लेकर आ रहे हैं. इस दौरान गुजरे 4 भारतीय झंडे वाले जहाजों में से भी 2 ने अपनी पहचान और रूट की जानकारी छुपाकर ही इस खतरनाक रास्ते को पार किया.
शिपिंग पैटर्न्स से पता चलता है कि जिन देशों को पश्चिमी देशों का करीबी या ईरान का विरोधी माना जाता है, उनके जहाजों पर हमले का खतरा सबसे ज्यादा है. ऐसे जहाज ओमान की ओर वाले शिपिंग लेन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसे अमेरिका और ओमान का समर्थन प्राप्त है, लेकिन ईरान इसे मान्यता नहीं देता. दूसरी ओर, जो जहाज ईरान के नियंत्रण वाले रास्तों से गुजर रहे हैं, वे भी अब डर के मारे अपने ट्रांसपोंडर्स बंद कर रहे हैं.
कई मामलों में तो ईरान द्वारा क्लियरेंस मिलने के बाद भी जहाजों को निशाना बनाया गया है.
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मिड-अप्रैल में भारत के झंडे वाले एक बड़े तेल टैंकर ‘सानमार हेराल्ड’ पर लारक द्वीप के पास हमला किया गया था, जहां ईरानी नौसेना यातायात को नियंत्रित करती है. घटना के बाद सामने आए एक ऑडियो क्लिप में जहाज के कैप्टन को साफ कहते सुना गया था कि हमले से ठीक पहले ईरान के ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ की नेवी ने उन्हें आगे बढ़ने की मंजूरी दी थी.
इसके बाद मई की शुरुआत में कई जहाजों ने ओमान के तट से सटे कॉरिडोर का उपयोग करना शुरू किया, जिसे अमेरिकी नौसेना और संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ने सुरक्षित सुरक्षा घेरे के रूप में मान्यता दी थी.
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भले ही अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के कारण ओमान वाले रास्ते को तुलनात्मक रूप से सुरक्षित माना जा रहा है, लेकिन यह भी खतरों से पूरी तरह मुक्त नहीं है. मई के मध्य में, भारत के झंडे वाला एक अन्य मालवाहक जहाज ओमान के लीमा के पास डूब गया था, जिसके पीछे कथित तौर पर ईरानी हमला होने की आशंका जताई गई थी. यही वजह है कि अमेरिकी सुरक्षा कवच होने के बावजूद, भारत आने वाले मर्चेंट जहाज कोई जोखिम नहीं लेना चाहते और चुपचाप अपने रडार बंद करके इस रास्ते को पार कर रहे हैं.
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