अमेरिका ने कर दिया जमीनी हमला तो कैसे बचेगा ईरान? IRGC और बसीज ने बनाया खतरनाक प्लान

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने द्वीप के आसपास के पानी और तट क्षेत्र में एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स लगाए हैं, जो किसी भी जमीनी या समुद्री हमले को जोखिमपूर्ण बना देंगे.

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ईरान ने अमेरिका के संभावित जमीनी हमले की आशंका को लेकर अपनी सैन्य तैयारी और गहरा दिया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी सेना ने हाल के दिनों में 10 लाख से अधिक लड़ाकों को एकजुट किया है, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), बसीज मिलिशिया और नियमित सेना के जवान शामिल हैं. युवाओं में भर्ती के लिए आवेदनों में भारी उछाल आया है, जिसे ईरान राष्ट्रवादी भावना और विदेशी हमले के खिलाफ प्रतिरोध विज्ञापन की तरह दिखाने में लगा है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी सैनिकों को ईरानी धरती पर ‘नरक’ का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए तैयारी दक्षिणी मोर्चे और फारस की खाड़ी क्षेत्र पर विशेष रूप से केंद्रित है.

ईरान ने की खतरनाक तैयारी


ईरान ने अपनी सैनिक तैनाती को बस्तर बनाकर खर्ग द्वीप, होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के रणनीतिक इलाकों में अतिरिक्त जवान भेजे हैं. IRGC और बसीज बलों को इन क्षेत्रों में जुड़ी पहाड़ी और तटीय जगहों पर तैनात किया गया है, जहां नौसैनिक अभ्यास और द्वीप समूहों पर नियंत्रण बढ़ाया गया है. इस तैनाती में सिर्फ नियमित सैनिक नहीं, बल्कि लाखों प्रशिक्षित मिलिशिया भी शामिल हैं, जो घुसपैठ, गुरिल्ला युद्ध और लंबे समय तक लड़ाई के लिए ट्रेंड हैं. ईरान की रणनीति भूभाग और जलमार्ग का भरपूर उपयोग करते हुए युद्ध को खींचकर ले जाने पर आधारित है.

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एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स


खर्ग द्वीप पर विशेष ध्यान दिया गया है, क्योंकि यह ईरान के तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत संभालता है. अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने द्वीप के आसपास के पानी और तट क्षेत्र में एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स लगाए हैं, जो किसी भी जमीनी या समुद्री हमले को जोखिमपूर्ण बना देंगे. इसके अलावा, द्वीप पर शोल्डर-फायर्ड सर्फेस‑टू‑एयर मिसाइल सिस्टम (MANPADS) और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए गए हैं, ताकि अमेरिकी विमानों और हेलीकॉप्टरों के आकार में बड़ा नुकसान हो सके. ईरान का लक्ष्य है कि किसी भी टॉपडाउन या लैंडिंग ऑपरेशन को इतनी भारी कीमत पर ले जाया जाए कि अमेरिका के लिए यह जारी रखना लगभग असंभव हो जाए.

अमेरिका के लिए हर कदम पर खतरा


बाब अल‑मंडेब स्ट्रेट पर भी ईरान ने रणनीतिक नजर टिकाई है. अगर अमेरिका खर्ग द्वीप पर जमीनी कार्रवाई करता है, तो ईरान यमन के हूती विद्रोहियों के जरिए इस स्ट्रेट को बाधित या नियंत्रित करने की धमकी दे चुका है. यह स्ट्रेट रेड सी और गल्फ ऑफ एडन को जोड़ता है, जहां वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण जहाजों का आवागमन होता है. हूतियों ने पहले भी इस क्षेत्र में जहाजों पर यूनैन्ड वाहनों और मिसाइलों से हमले किए हैं, अब बड़े स्तर पर निरंतर कार्रवाई की तैयारी दिखाई जा रही है. इससे अमेरिकी और सहयोगी देशों की नौसेना, व्यापारिक जहाजों और तेल लाइनों पर गंभीर असर पैदा हो सकता है.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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