हत्या या मौत? बांग्लादेश में हिंदू नेता रमेश चंद्र के निधन पर उठे सवाल, चुनाव से पहले आवामी लीग के लीडर हो रहे टारगेट!

Hindu Leader Died in Bangladesh: बांग्लादेश में चुनाव से पहले शेख हसीना की आवामी लीग के नेताओं को टारगेट करने का आरोप मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार पर लग रहा है। वहीं यह आरोप पुलिस हिरासत में शेख हसीना के करीबी और उनकी सरकार में मंत्री रहे रमेश चंद्र सेन की मौत के बाद लगा है।

Ramesh Chandra Sen

रमेश चंद्र सेन की मौत को कस्टोडियल किलिंग बताया जा रहा है।

Hindu Leader Dieed in Bangladesh: बांग्लादेश में एक और हिंदू नेता की मौत हो गई है, जिनका नाम रमेश चंद्र सेन था। शेख हसीना के करीबी और उनकी पार्टी आवामी लीग की सरकार में मंत्री रह चुके रमेश चंद्र की मौत पुलिस हिरासत में दिनाजपुर जेल में हुई है, लेकिन रमेश की मौत को हत्या बताते हुए मोहम्मद युनूस की सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि चुनाव से पहले शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के नेताओं को टारगेट किया जा रहा है।

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रमेश की मौत को बताया गया प्रिजन मर्डर

रमेश चंद्र की मौत पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की जा रही हैं। कुछ लोगों ने रमेश की मौत को प्रिजन मर्डर और कस्टोडियल किलिंग करार दिया है. पहीं पुलिस की हिरासत में रहते हुए जेल में करने वाले आवामी लीग के नेताओं की सख्या 5 हो गई है। वहीं रमेश चंद्र की मौत ने बांग्लादेश में मानवाधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और पॉलिटिकल रिवेंज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं, जो मोहम्मद युनूस के लिए महंगे साबित हो सकते हैं।

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16 अगस्त 2024 से जेल में ही थे रमेश चंद्र

बता दें कि रमेश चंद्र सेना बांग्लादेश के ठाकुरगांव-1 से कई बार सांसद रहे। शेख हसीना की अवामी लीग का सदस्य होने के साथ-साथ प्रेसिडियम मेंबर भी रहे। वे 16 अगस्त 2024 से जेल में थे और उनके खिलाफ हत्या के 3 केस दर्ज थे। शनिवार सुबह अचानक उनकी तबियत खराब हुई तो दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले इलाज के लिए ले जाया गया, जहां करीब 9:29 बजे डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जेल अधीक्षक फरहाद सरकार ने पुष्टि की।

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2024 में हुआ था हसीना सरकार का पतन

बता दें कि बांग्लादेश में अगस्त 2024 से ही हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। पहले छात्रों ने हिंसक आंदोलन छेड़कर शेख हसीना की सरकार का पतन किया। फिर बांग्लादेश में नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिनके राज में बांग्लादेश में भारत का विरोध और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा शुरू हुई, जिसे मानवाधिकारों का उल्लंघन कहा गया और हिंदुओं पर अत्याचारों के लिए युनूस सरकार पर सवाल उठे। अब 5 मार्च को बांग्लादेश में आम चुनाव होने जा रहे हैं।

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बता दें कि आम चुनाव में शेख हसीना की सरकार आवामी लीक हिस्सा नहीं लेगी, क्योंकि उसे चुनाव लड़ने के अयोग्य करार दिया गया है। वहीं अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद शेख हसीना देश छोड़कर चली गई थीं और उन्होंने भारत में पनाह ले रखी है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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