Europe Heatwave 2026: यूरोप में आसमान से बरस रही आग अब जानलेवा साबित हो रही है. फ्रांस की राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने रविवार को एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह आई भीषण हीटवेव (लू) के चरम के दौरान फ्रांस में करीब 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. यह आंकड़ा केवल तीन दिनों के भीतर का है, जिसने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित पेरिस क्षेत्र रहा है, जहां अकेले रहने वाले बुजुर्गों ने अपने घरों में ही दम तोड़ दिया. एजेंसी ने आशंका जताई है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि रेजिडेंशियल केयर सेंटरों और घरों में हुई मौतों के सटीक आंकड़े आना अभी बाकी है.
इटली और पोलैंड में पारा 40 डिग्री के पार
गर्मी का यह कहर सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है. जर्मनी, इटली और पोलैंड जैसे देश भी इस समय भीषण तपिश की चपेट में हैं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनजीवन और ज्यादा प्रभावित हो सकता है.
WHO चीफ टेड्रोस की चेतावनी
इस भयावह स्थिति पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने गहरी चिंता जताई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जो हीटवेव पीढ़ी में एक बार आती थी, वह अब हर साल आ रही है. अत्यधिक गर्मी एक 'साइलेंट किलर' है. यूरोप के घर, दफ्तर और स्कूल इस तरह के रिकॉर्ड तापमान को झेलने के लिए नहीं बने हैं." WHO प्रमुख के मुताबिक, 21 जून से अब तक पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं.
'वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन' के वैज्ञानिकों की ताजा स्टडी के मुताबिक, इंसानी गतिविधियों के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन के बिना यूरोप में ऐसी रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी और उमस का होना नामुमकिन था. 50 साल पहले ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.
जर्मनी और चेक रिपब्लिक में भी टूटे रिकॉर्ड
गर्मी का यह खतरनाक सिस्टम अब धीरे-धीरे महाद्वीप के पूर्वी हिस्सों की ओर बढ़ रहा है, जिससे नए रिकॉर्ड बन रहे हैं:
जर्मनी: जर्मनी के मॉकर्न-ड्रैविट्ज़ में दिन का तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि कुबशुट्ज़ में रात का तापमान भी 29.4 डिग्री से नीचे नहीं गिरा. भीषण गर्मी के कारण जर्मनी के उन जंगलों में भयंकर आग लग गई है, जहां दूसरे विश्व युद्ध के समय के जिंदा बम दबे हुए हैं, जिससे धमाके हो रहे हैं.
चेक रिपब्लिक: देश के उत्तरी शहर डोक्सानी में रविवार को पारा 41.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.
जर्मनी में हाहाकार: बर्लिन में पुलिस को भीड़ को ठंडा करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछारों) का सहारा लेना पड़ा. वहीं, एक ओवरहीट ट्रेन की एसी फेल होने के बाद 600 यात्रियों को खिड़कियां-दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया.
Europe Heatwave 2026: यूरोप में आसमान से बरस रही आग अब जानलेवा साबित हो रही है. फ्रांस की राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने रविवार को एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह आई भीषण हीटवेव (लू) के चरम के दौरान फ्रांस में करीब 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं. यह आंकड़ा केवल तीन दिनों के भीतर का है, जिसने सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. सबसे ज्यादा प्रभावित पेरिस क्षेत्र रहा है, जहां अकेले रहने वाले बुजुर्गों ने अपने घरों में ही दम तोड़ दिया. एजेंसी ने आशंका जताई है कि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है, क्योंकि रेजिडेंशियल केयर सेंटरों और घरों में हुई मौतों के सटीक आंकड़े आना अभी बाकी है.
इटली और पोलैंड में पारा 40 डिग्री के पार
गर्मी का यह कहर सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं है. जर्मनी, इटली और पोलैंड जैसे देश भी इस समय भीषण तपिश की चपेट में हैं. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इन देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की उम्मीद है, जिससे आने वाले दिनों में आम जनजीवन और ज्यादा प्रभावित हो सकता है.
WHO चीफ टेड्रोस की चेतावनी
इस भयावह स्थिति पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने गहरी चिंता जताई है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण जो हीटवेव पीढ़ी में एक बार आती थी, वह अब हर साल आ रही है. अत्यधिक गर्मी एक ‘साइलेंट किलर’ है. यूरोप के घर, दफ्तर और स्कूल इस तरह के रिकॉर्ड तापमान को झेलने के लिए नहीं बने हैं.” WHO प्रमुख के मुताबिक, 21 जून से अब तक पूरे यूरोप में गर्मी से जुड़ी 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो चुकी हैं.
‘वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन’ के वैज्ञानिकों की ताजा स्टडी के मुताबिक, इंसानी गतिविधियों के कारण हो रहे जलवायु परिवर्तन के बिना यूरोप में ऐसी रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी और उमस का होना नामुमकिन था. 50 साल पहले ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.
जर्मनी और चेक रिपब्लिक में भी टूटे रिकॉर्ड
गर्मी का यह खतरनाक सिस्टम अब धीरे-धीरे महाद्वीप के पूर्वी हिस्सों की ओर बढ़ रहा है, जिससे नए रिकॉर्ड बन रहे हैं:
जर्मनी: जर्मनी के मॉकर्न-ड्रैविट्ज़ में दिन का तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि कुबशुट्ज़ में रात का तापमान भी 29.4 डिग्री से नीचे नहीं गिरा. भीषण गर्मी के कारण जर्मनी के उन जंगलों में भयंकर आग लग गई है, जहां दूसरे विश्व युद्ध के समय के जिंदा बम दबे हुए हैं, जिससे धमाके हो रहे हैं.
चेक रिपब्लिक: देश के उत्तरी शहर डोक्सानी में रविवार को पारा 41.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं.
जर्मनी में हाहाकार: बर्लिन में पुलिस को भीड़ को ठंडा करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछारों) का सहारा लेना पड़ा. वहीं, एक ओवरहीट ट्रेन की एसी फेल होने के बाद 600 यात्रियों को खिड़कियां-दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला गया.