पूर्वी चीन सागर में मछली पकड़ने वाली हजारों चीनी नावों के एक साथ इकट्ठा होने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नावों का संगठित तरीके से एक जगह जमा होना सामान्य मछली पकड़ने की गतिविधि नहीं लगता और इससे संभावित मिलिट्री स्ट्रैटजी या क्षेत्रीय संकट की तैयारी की आशंका जताई जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्री निगरानी करने वाले एक्सपर्ट्स ने सैटेलाइट इमेज और जहाजों के ट्रैकिंग डेटा के जरिए इस एक्टिविटी को देखा. डाटा से पता चला कि हजारों चीनी नावें पूर्वी चीन सागर में असामान्य ज्यामितीय (geometry) आकृतियों में खड़ी थीं. कई नावें एक-दूसरे से लगभग 500 मीटर की दूरी पर कतारों में खड़ी थीं, जिससे ये कार्रवाई और भी असामान्य लग रही थी.
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पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ था
विश्लेषकों के मुताबिक, ये घटना पहली बार नहीं हुई है. इससे पहले भी दिसंबर और जनवरी के बीच इसी इलाके में करीब 1000 से 2000 चीनी नावों के ग्रुप देखे गए थे. ये नावें कई घंटों तक एक ही जगह पर खड़ी रहीं और फिर अचानक अलग-अलग दिशाओं में फैल गईं. समुद्री मामलों के एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नावों का कॉर्डिनेटिड तरीके से एक साथ खड़ा होना किसी सामान्य मछली पकड़ने की एक्टिविटी से मेल नहीं खाता. उनका मानना है कि ये चीन की उस क्षमता का परीक्षण हो सकता है जिसके तहत बड़ी संख्या में नागरिक नावों को किसी रणनीतिक या सैन्य ऑपरेशन के लिए एक साथ तैनात किया जा सके. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी नावों का इस्तेमाल भविष्य में किसी संभावित सैन्य अभियान, समुद्री नाकाबंदी या क्षेत्रीय विवाद के दौरान किया जा सकता है. खासकर ताइवान और आसपास के समुद्री इलाकों को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है, इसलिए इस तरह की गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं.
चीन ने नहीं दिया कोई बयान
बताया जाता है कि चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के बेड़ों में से एक है, जो पीला सागर, पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों में एक्टिव रहती हैं. इन क्षेत्रों में जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम और फिलीपींस जैसे देशों के मछुआरे भी काम करते हैं, जिसकी वजह से अक्सर समुद्री विवाद और होड़ देखने को मिलती है. हालांकि चीन की ओर से इन घटनाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नावों का जमावड़ा क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री रणनीति के लिहाज से अहम कड़ी हो सकती है.
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