अमेरिकी ट्रंप सरकार ने फिलिस्तीन को लेकर बड़ा ऐलान किया है। विदेश मंत्री ने मार्कों रुबियो ने बताया कि आगामी UN जनरल असेंबली की बैठक में फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) और फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) के मेंबरों को भाग नहीं लेने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि नए वीजा नहीं दिए जाएंगे। साथ ही जो वीजा पहले से दिए गए हैं उन्हें भी कैंसिल किया जाएगा।
ट्रंप सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?
विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, ये दोनों संगठन शांति के लिए काम नहीं कर रहे हैं। अगर उन्हें इस बैठक का हिस्सा बनना है तो उन्हें पहले आतंकवाद को पूरी तरह छोड़ना होगा। इसके बाद ही उन पर विचार किया जाएगा। उनका कहना है कि फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) और फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) ने अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन न करने और शांति की संभावनाओं को कमजोर करने के लिए जवाबदेह है। जिसमें पिछले साल 7 अक्तूबर का नरसंहार भी शामिल है।
आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करना होगा
विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि इन दोनों संगठनों शिक्षा में आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करना होगा। ये संगठन शिक्षा में आतंकवाद का खुले तौर पर समर्थन कर रहे हैं। PLO को अमेरिकी कानून वादे के अनुसार इसे हर हाल में बंद करना होगा। उन्होंने कहा कि PA फिलिस्तीन को एक देश के रूप में एकतरफा मान्यता प्राप्त करने का लगातार प्रयास कर रहा है। कई इंटरनेशल मंचों पर वे इस मुद्दे को रख चुके हैं। विदेश मंत्री का कहना है कि PA को इन प्रयासों को दरकिनार करते हुए बंद करना होगा।
गाजा युद्धविराम वार्ता को किया विफल
विदेश मंत्री ने बताया कि इन दोनों सगठनों ने हमास द्वारा अपने बंधकों को रिहा करने से इनकार करने और गाजा युद्धविराम वार्ता को विफल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों संगठन अभी भी पूरी तरह से आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त हैं। इसे लेकर कई दोनों संगठनों को चेताया गया था, लेकिन उन्होंने इसे जारी रखा। इसी वजह से ट्रंप सरकार को इन पर कड़ा फैसला लेना पड़ा है।
इजरायल से समझौते के बाद होगी बात
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका अपने कानूनों के अनुरूप उनसे संपर्क के लिए तैयार है। इससे पहले फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) और फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) को इजरायल के साथ शांति को लेकर समझौता करना होगा। इसके बाद ही दोनों संगठनों से बात की जाएगी।