चीन-नेपाल सीमा से लगे इलाकों में आई भीषण बाढ़ के एक सप्ताह से अधिक समय बाद भी राहत बचाव दल पीड़ितों को बचाने के काम में जुटा हुआ है. अब तक कई लोगों को बचाया जा चुका है, लेकिन मृतकों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है. चीन और नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा से 1,300 से अधिक लोगों की मौत और 5,600 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है. हालांकि, चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस त्रासदी से जुड़ी जानकारी अब भी पूरी तरह सामने नहीं आ रही है. आरोप है कि चीनी प्रशासन ने प्रभावित इलाकों तक मीडिया की पहुंच को नियंत्रित करने के साथ-साथ आपदा की रिपोर्टिंग पर भी कड़ी निगरानी रखी है.
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तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या कितनी?
चीनी अधिकारियों की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है, जबकि 531 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. इससे पहले 21 मौतों और 541 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी. इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल थे. आपदा की जानकारी सामने आने में देरी और प्रभावित इलाकों में स्वतंत्र मीडिया की सीमित पहुंच ने चीन की आपदा रिपोर्टिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.
सिर्फ सरकारी मीडिया को ही कवरेज की अनुमति
चीनी सरकारी मीडिया संस्थान शिन्हुआ और सीसीटीवी को प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग की अनुमति दी गई है, लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि सरकारी मीडिया की कवरेज सिर्फ प्रशासन के राहत और बचाव अभियान पर फोकस रहा है. रिपोर्टों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निर्देश, मुश्किल परिस्थितियों में काम कर रहे बचाव दल और प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिशों को प्रमुखता दी जा रही है. इसके उलट, मृतकों और लापता लोगों के परिवारों की आवाज और उनकी आपबीती कम दिखाई दे रही हैं.
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मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, कुछ चीनी पत्रकारों को कथित तौर पर मृतकों और लापता लोगों के परिजनों से बातचीत न करने और सिर्फ शिन्हुआ की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री पर निर्भर रहने के निर्देश दिए गए. एसोसिएटेड प्रेस ने भी प्रभावित इलाकों में जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उसे अब तक अनुमति नहीं मिली.
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