क्या है MDR? UPI में 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजेक्शन से लिंक, राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा

यूएपीआई ट्रांजैक्शन में 2000 से ऊपर के चार्ज को लेकर लोगों के बीच और राजनीतिक गलियारों में सरकार को अलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इस दौरान एमडीआर की बात काफी ज्यादा हो रही है. आइए जानते हैं कि ये क्या चीज है.

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यूपीआई ट्रांजैक्शन (AI Image)

What is MDR: 15 अक्टूबर से सरकार ने ज्यादा कीमत वाले UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने का फैसला किया है, जिसकी वजह से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसकी आलोचना की है. सरकार के हाल के नोटिफिकेशन में बैंकों और पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स को 2000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर फीस लेने से छूट दी गई है, लेकिन इससे ज्यादा रकम वाले पेमेंट के लिए ये छूट नहीं मिली है.

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MDR क्या है?

इस का फुल फॉर्म है मर्चेंट डिस्काउंट रेट, ये वो फीस है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए देते हैं. ये रकम आम तौर पर बैंकों और ट्रांजैक्शन पूरा करने में शामिल दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाती है. क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर आम तौर पर लगभग 1-3% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर ये चार्ज 0.9% तक हो सकता है.

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यूपीआई जनवरी 2020 से जीरो-एमडीआर फ्रेमवर्क के तहत काम कर रहा है. हालांकि हाल के नोटिफिकेशन से 2000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट पेमेंट पर ऐसे चार्ज लगाने की कानूनी संभावना बन गई है. प्रपोज्ड सिस्टम पर्सन टू पर्सन (P2P) ट्रांसफर पर लागू नहीं होगा, जैसे कि किसी दोस्त को 2000 रुपये से ज्यादा भेजना.

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ये मुद्दा क्यों अहम है?

इसकी सबसे बड़ी चिंता ये है कि क्या मर्चेंट आखिरकार ये एडिशनल कॉस्ट कस्टमर पर डालेंगे. ऐसा कुछ कार्ड ट्रांजैक्शन में पहले ही देखा जा चुका है, जहां बिजनेस ज्यादा कीमतें या एक्सट्रा फीस लगाकर पेमेंट-प्रोसेसिंग चार्ज वसूल सकते हैं. ज्यादा कीमत वाले यूपीआई पेमेंट सिस्टम के टोटल ट्रांजैक्शन वैल्यू का एक बड़ा हिस्सा भी हैं. 2025-26 के दौरान 2000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन की संख्या पर्सन टू मर्चेंट यूपीआई पेमेंट का सिर्फ 4% थी, लेकिन उनके वैल्यू का लगभग दो-तिहाई हिस्सा था. कुल मिलाकर, UPI ने साल के दौरान लगभग 314 लाख करोड़ रुपये वैल्यू के 24000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन दर्ज किए.

ग्राहकों पर क्या हो सकता है असर?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 2000 से ज्यादा लोगों के बीच किए गए एक सर्वे से पता चला है कि अगर चार्ज ग्राहकों पर डाले जाते हैं तो यूजर अपनी पेमेंट की पसंद बदल सकते हैं. सिर्फ 12% लोगों ने कहा कि अगर बड़े मर्चेंट 3,000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर फीस लेते हैं तो भी वे UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे, जबकि अगर मर्चेंट सीधे ग्राहकों से ट्रांजैक्शन लागत वसूलते हैं तो ये आंकड़ा घटकर 2% रह गया. ऐसे में चिंता इस बात की है कि जब डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने की बात दशकों से चली आ रही है, तब सरकार के इस कदम से लोग फिर से कैश पेमेंट की तरफ लौटने लगेंगे.

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कैसे कैलकुलेट होगा MDR?

MDR की कैलकुलेशन हर ट्रांजैक्शन की वैल्यू के बेस पर की जाती है. 3000 रुपये की खरीदारी पर 0.4% की दर से MDR 12 रुपये होगा, जिसे मर्चेंट अपने एक्वायरिंग बैंक को चुकाता है. 75000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए मैक्सिमम MDR 300 रुपये है, जबकि 2000 रुपये से कम के पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा. 50000 रुपये के ट्रांजैक्शन के लिए, इसी दर से MDR 200 रुपये होगा. हालांकि 1 लाख की पेमेंट के लिए 0.4% चार्ज 400 रुपये होगा, लेकिन कैप की वजह से मर्चेंट सिर्फ 300 ही चुकाएगा.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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