मुख्य बिंदु
- बड़ी अचीवमेंट: साउथ कोस्ट रेलवे ने ऐतिहासिक गोदावरी ब्रिज पर जंग लगी 672 हैंगर केबलों में से 500 को सफलतापूर्वक बदल दिया है.
- बिना रुकावट ट्रैफिक: ये मुश्किल मरम्मत का काम यात्रियों या मालगाड़ियों के ऑपरेशन को रोके बिना किया जा रहा है.
- ग्लोबल एक्सपर्टाइज़: इस प्रोजेक्ट में इटली की खास स्ट्रेसिंग तकनीक, यूरोप की चार-परत वाली जंग-रोधी केबल और IIT-मुंबई की तकनीकी देखरेख का इस्तेमाल किया जा रहा है.
- स्मार्ट मॉनिटरिंग: 24x7 रियल-टाइम स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए ऑस्ट्रेलियन इंस्ट्रूमेंटेशन एक्सपर्ट्स ने 272 से ज़्यादा स्मार्ट सेंसर लगाए हैं.
- डेडिकेटेड टेक लैब: शुरुआती चेतावनी वाले डेटा एनालिसिस के लिए राजामहेंद्रवरम की तरफ एक पर्मानेंट ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) लैब बनाई गई है.
Godavari Arch Bridge Hanger Cables Replaced: साउथ कोस्ट रेलवे जोन ने ऐतिहासिक गोदावरी बो स्ट्रिंग आर्च रेलवे ब्रिज (ब्रिज नंबर 248) पर जंग लगी 672 हैंगर केबल्स में से 500 को कामयाबी के साथ बदलकर इंजीनियरिंग का एक शानदार माइलस्टोन हासिल किया है. बहुत ज़्यादा व्यस्त विजयवाड़ा-विशाखापत्तनम सेक्शन पर स्थित, यह 30 साल पुराना और 2.8 किलोमीटर लंबा पुल आंध्र प्रदेश में कोव्वुरु और राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) के बीच विशाल गोदावरी नदी पर एक अहम कड़ी का काम करता है.
74 फीसदी काम पूरा
खास बात ये है कि इसके 28 स्पैन में से 20 स्पैन की तकरीबन 74 फीसदी जरूरी हैंगर केबल्स को पहले ही अपग्रेड किया जा चुका है. इस काम को जो चीज वाकई खास बनाती है, वो ये है कि मरम्मत की पूरी जटिल प्रक्रिया यात्रियों या मालगाड़ियों की भारी आवाजाही में बिना किसी रुकावट के की जा रही है, जिससे हर स्टेज में पूरी स्ट्रक्चरल अस्टेबिलिटी बनी रहती है.
जंग वाले तार को हटाने का काम
इंटरनेशनल सेफ्टी और स्ट्रक्चरल स्टैंडर्ड को एन्शोयर करने के लिए, पुरानी हो रही DINA केबल्स को अत्याधुनिक, जंग-रोधी केबल सिस्टम से बदला जा रहा है. इस नए लगाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर में हाई-UTS स्ट्रेंथ वाले PSC स्ट्रैंड्स शामिल हैं, जो यूरोप से आयातित एडवांस्ड चार-परत वाली जंग-रोधी शील्ड से सुरक्षित हैं. इसमें वैक्स-भरी एंकरेज और आधुनिक स्ट्रेसिंग तकनीक भी शामिल है. स्ट्रेसिंग का खास विधि इटली के अंतरराष्ट्रीय केबल-स्टेयड ब्रिज एक्सपर्ट्स की तरफ से डिजाइन की गई थी, और इस जटिल इंस्टॉलेशन की निगरानी IIT-मुंबई के बेहतरीन इंजीनियरों के साथ मिलकर सावधानी के साथ की जा रही है.
एडवांस हुआ ब्रिज
वक्त रहते रखरखाव (प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस) सुनिश्चित करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाते हुए, साउथ कोस्ट रेलवे ने ऑस्ट्रेलिया स्थित इंस्ट्रूमेंटेशन एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अत्याधुनिक ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) लगाया है. पुल पर 272 से ज्यादा एडवांस्ड स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं जो 24/7 रियल-टाइम डेटा इकट्ठा और ट्रांसमिट करते हैं. ये क्लाउड-आधारित सिस्टम आर्च शिफ्टिंग, डेक बिहेवियर, हैंगर स्ट्रेस, हवा के असर और बदलते मौसम के पैटर्न जैसे फैक्टर्स का बारीकी से विश्लेषण करता है. राजमहेंद्रवरम की तरफ एक खास, स्थायी BHMS प्रयोगशाला भी बनाई गई है ताकि शुरुआती चेतावनी मिल सके और तुरंत, सक्रिय रखरखाव किया जा सके.
ब्रिज की बढ़ गई लाइफ
इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए किया जा रहा ये रिहैब प्रोजेक्ट तय समय सीमा के भीतर पूरा होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है. आखिरकार, ये पहल भारत के सबसे मशहूर रेलवे लैंडमार्क में से एक की ऑपरेशनल एज और स्ट्रक्चरल रिलायबिलिटी को काफी बढ़ा देगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहेगी.
निष्कर्ष
साउथ कोस्ट रेलवे का ये बड़ा रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग की बेहतरीन मिसाल है. इटली, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेशनल टेक्निकल एक्सपर्टीज को IIT-मुंबई जैसे नामी राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलाकर, ये प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए एक नया बेंचमार्क बनाता है. जरूरी रेल ट्रैफ़िक को रोके बिना काम करना इसकी बेहतरीन प्लानिंग और काम करने के तरीके को दिखाता है. आखिर में, ये अपग्रेड एनश्योर करता है कि मशहूर गोदावरी बो स्ट्रिंग आर्च ब्रिज मजबूत, सुरक्षित और पूरी तरह चालू रहे, और आने वाले दशकों तक अपनी ऐतिहासिक अहमियत बनाए रखे.
मुख्य बिंदु
- बड़ी अचीवमेंट: साउथ कोस्ट रेलवे ने ऐतिहासिक गोदावरी ब्रिज पर जंग लगी 672 हैंगर केबलों में से 500 को सफलतापूर्वक बदल दिया है.
- बिना रुकावट ट्रैफिक: ये मुश्किल मरम्मत का काम यात्रियों या मालगाड़ियों के ऑपरेशन को रोके बिना किया जा रहा है.
- ग्लोबल एक्सपर्टाइज़: इस प्रोजेक्ट में इटली की खास स्ट्रेसिंग तकनीक, यूरोप की चार-परत वाली जंग-रोधी केबल और IIT-मुंबई की तकनीकी देखरेख का इस्तेमाल किया जा रहा है.
- स्मार्ट मॉनिटरिंग: 24×7 रियल-टाइम स्ट्रक्चरल हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए ऑस्ट्रेलियन इंस्ट्रूमेंटेशन एक्सपर्ट्स ने 272 से ज़्यादा स्मार्ट सेंसर लगाए हैं.
- डेडिकेटेड टेक लैब: शुरुआती चेतावनी वाले डेटा एनालिसिस के लिए राजामहेंद्रवरम की तरफ एक पर्मानेंट ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) लैब बनाई गई है.
Godavari Arch Bridge Hanger Cables Replaced: साउथ कोस्ट रेलवे जोन ने ऐतिहासिक गोदावरी बो स्ट्रिंग आर्च रेलवे ब्रिज (ब्रिज नंबर 248) पर जंग लगी 672 हैंगर केबल्स में से 500 को कामयाबी के साथ बदलकर इंजीनियरिंग का एक शानदार माइलस्टोन हासिल किया है. बहुत ज़्यादा व्यस्त विजयवाड़ा-विशाखापत्तनम सेक्शन पर स्थित, यह 30 साल पुराना और 2.8 किलोमीटर लंबा पुल आंध्र प्रदेश में कोव्वुरु और राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) के बीच विशाल गोदावरी नदी पर एक अहम कड़ी का काम करता है.
74 फीसदी काम पूरा
खास बात ये है कि इसके 28 स्पैन में से 20 स्पैन की तकरीबन 74 फीसदी जरूरी हैंगर केबल्स को पहले ही अपग्रेड किया जा चुका है. इस काम को जो चीज वाकई खास बनाती है, वो ये है कि मरम्मत की पूरी जटिल प्रक्रिया यात्रियों या मालगाड़ियों की भारी आवाजाही में बिना किसी रुकावट के की जा रही है, जिससे हर स्टेज में पूरी स्ट्रक्चरल अस्टेबिलिटी बनी रहती है.
जंग वाले तार को हटाने का काम
इंटरनेशनल सेफ्टी और स्ट्रक्चरल स्टैंडर्ड को एन्शोयर करने के लिए, पुरानी हो रही DINA केबल्स को अत्याधुनिक, जंग-रोधी केबल सिस्टम से बदला जा रहा है. इस नए लगाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर में हाई-UTS स्ट्रेंथ वाले PSC स्ट्रैंड्स शामिल हैं, जो यूरोप से आयातित एडवांस्ड चार-परत वाली जंग-रोधी शील्ड से सुरक्षित हैं. इसमें वैक्स-भरी एंकरेज और आधुनिक स्ट्रेसिंग तकनीक भी शामिल है. स्ट्रेसिंग का खास विधि इटली के अंतरराष्ट्रीय केबल-स्टेयड ब्रिज एक्सपर्ट्स की तरफ से डिजाइन की गई थी, और इस जटिल इंस्टॉलेशन की निगरानी IIT-मुंबई के बेहतरीन इंजीनियरों के साथ मिलकर सावधानी के साथ की जा रही है.
एडवांस हुआ ब्रिज
वक्त रहते रखरखाव (प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस) सुनिश्चित करने के लिए एक सक्रिय कदम उठाते हुए, साउथ कोस्ट रेलवे ने ऑस्ट्रेलिया स्थित इंस्ट्रूमेंटेशन एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अत्याधुनिक ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम (BHMS) लगाया है. पुल पर 272 से ज्यादा एडवांस्ड स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं जो 24/7 रियल-टाइम डेटा इकट्ठा और ट्रांसमिट करते हैं. ये क्लाउड-आधारित सिस्टम आर्च शिफ्टिंग, डेक बिहेवियर, हैंगर स्ट्रेस, हवा के असर और बदलते मौसम के पैटर्न जैसे फैक्टर्स का बारीकी से विश्लेषण करता है. राजमहेंद्रवरम की तरफ एक खास, स्थायी BHMS प्रयोगशाला भी बनाई गई है ताकि शुरुआती चेतावनी मिल सके और तुरंत, सक्रिय रखरखाव किया जा सके.
ब्रिज की बढ़ गई लाइफ
इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए किया जा रहा ये रिहैब प्रोजेक्ट तय समय सीमा के भीतर पूरा होने की ओर तेजी से बढ़ रहा है. आखिरकार, ये पहल भारत के सबसे मशहूर रेलवे लैंडमार्क में से एक की ऑपरेशनल एज और स्ट्रक्चरल रिलायबिलिटी को काफी बढ़ा देगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए इसकी ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित रहेगी.
निष्कर्ष
साउथ कोस्ट रेलवे का ये बड़ा रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट आधुनिक भारतीय इंजीनियरिंग की बेहतरीन मिसाल है. इटली, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया की इंटरनेशनल टेक्निकल एक्सपर्टीज को IIT-मुंबई जैसे नामी राष्ट्रीय संस्थानों के साथ मिलाकर, ये प्रोजेक्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव के लिए एक नया बेंचमार्क बनाता है. जरूरी रेल ट्रैफ़िक को रोके बिना काम करना इसकी बेहतरीन प्लानिंग और काम करने के तरीके को दिखाता है. आखिर में, ये अपग्रेड एनश्योर करता है कि मशहूर गोदावरी बो स्ट्रिंग आर्च ब्रिज मजबूत, सुरक्षित और पूरी तरह चालू रहे, और आने वाले दशकों तक अपनी ऐतिहासिक अहमियत बनाए रखे.