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आसनसोल के बाजार में छाई ‘मोदी राखी’ और ‘कॉकरोच छाप’ राखी, सियासी चर्चा के बीच ग्राहकों का खींच रही ध्यान

इन राखियों की बिक्री और ग्राहकों की वास्तविक पसंद को लेकर अंतिम तस्वीर रक्षाबंधन के बाद ही साफ होगी. फिलहाल इतना जरूर है कि आसनसोल के बाजार में ‘मोदी राखी’ और ‘कॉकरोच छाप’ राखी ने रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है.

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रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही पश्चिम बंगाल के आसनसोल के बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं. बाजार में बच्चों से लेकर युवाओं और महिलाओं तक के लिए एक से बढ़कर एक डिजाइन की राखियां उपलब्ध हैं. हालांकि, इन तमाम डिजाइनों के बीच कुछ ऐसी राखियां भी लोगों का खास ध्यान खींच रही हैं, जिनमें त्योहार के साथ-साथ राजनीति और मौजूदा राजनीतिक माहौल की झलक देखने को मिल रही है.

आसनसोल के बाजार में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाली राखियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. इसके साथ ही ‘कॉकरोच छाप’ वाली राखियां भी ग्राहकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं. दुकानदारों का कहना है कि इस साल राखियों में डिजाइन और वैरायटी की कोई कमी नहीं है. पारंपरिक राखियों से लेकर कार्टून कैरेक्टर, आकर्षक मोतियों और अलग-अलग थीम वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं. लेकिन मोदी और कॉकरोच वाली राखियों को लेकर लोगों में अलग तरह की उत्सुकता देखने को मिल रही है.

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ग्राहकों का ध्यान खींच रहीं राखियां

स्थानीय दुकानदारों के मुताबिक, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के दौरान ग्राहक अक्सर ऐसी राखियां तलाशते हैं, जो सामान्य डिजाइन से कुछ अलग हों. इसी वजह से राजनीतिक चेहरों या चर्चित प्रतीकों से जुड़ी राखियां भी बाजार में अपनी जगह बना लेती हैं. आसनसोल के कुछ ग्राहकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब त्योहार के बाजार में राजनीति की झलक दिखाई दे रही हो. इससे पहले भी अलग-अलग चुनावी और राजनीतिक दौर में ‘मोदी छाप’, ‘ममता छाप’, कमल के निशान और तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह वाली राखियां बाजार में लोगों के आकर्षण का केंद्र रही हैं.

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अब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद बाजार में दिखाई दे रही इन राखियों को कुछ लोग राजनीतिक बदलाव से जोड़कर भी देख रहे हैं. ग्राहकों के बीच चर्चा है कि जिस तरह दिल्ली की राजनीति में अलग-अलग राजनीतिक प्रतीकों और नेताओं की लोकप्रियता बाजार के सामानों में दिखाई देती रही है, उसी तरह अब बंगाल में भी राजनीतिक प्रतीकों का असर त्योहारों के बाजार तक पहुंचता नजर आ रहा है.

‘कॉकरोच छाप’ राखी को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं

खास तौर पर ‘कॉकरोच छाप’ राखी को लेकर बाजार में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं. कुछ लोग इसे मौजूदा राजनीतिक माहौल और उभरती राजनीतिक पहचान से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ ग्राहक इसे महज एक आकर्षक और मजेदार डिजाइन के तौर पर खरीद रहे हैं.

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आसनसोल के बाजार में राखी खरीदने पहुंचे ग्राहकों का कहना है कि त्योहारों का बाजार हमेशा से समाज और समय की तस्वीर पेश करता आया है. कभी फिल्मों के कलाकार, कभी कार्टून कैरेक्टर और कभी लोकप्रिय राजनीतिक चेहरे राखियों के डिजाइन का हिस्सा बनते रहे हैं. इस बार भी बाजार में मौजूद राखियां लोगों की पसंद और मौजूदा माहौल की एक अलग तस्वीर पेश कर रही हैं.

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हालांकि, इन राखियों की बिक्री और ग्राहकों की वास्तविक पसंद को लेकर अंतिम तस्वीर रक्षाबंधन के बाद ही साफ होगी. फिलहाल इतना जरूर है कि आसनसोल के बाजार में ‘मोदी राखी’ और ‘कॉकरोच छाप’ राखी ने रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच राजनीतिक चर्चा को गर्म कर दिया है.

त्योहार की खरीदारी के लिए बाजार पहुंच रहे लोगों की नजर अब सिर्फ राखियों की कीमत और डिजाइन पर ही नहीं, बल्कि इन अनोखे राजनीतिक रंग वाली राखियों पर भी टिक रही है. यही वजह है कि इस बार आसनसोल का राखी बाजार सिर्फ त्योहार की रौनक ही नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल की एक दिलचस्प तस्वीर भी पेश करता नजर आ रहा है.

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First published on: Aug 27, 2026 03:49 PM

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