पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट ने उपनलकर्मियों, राज्य आंदोलनकारियों और कर्मचारी-पेंशनरों की गोल्डन कार्ड योजना पर अहम फैसले लिए हैं. उपनलकर्मियों को 1 मार्च 2026 से समान वेतन का लाभ मिलेगा. धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर मुहर लगी है.
उपनल वालों को समान वेतन
उत्तराखंड में समान कार्य समान वेतन सुविधा के दायरे में आ रहे कर्मचारियों को एक मार्च 2026 से इसका लाभ मिलेगा. दूसरी तरफ, समान वेतन के लिए नई कट ऑफ डेट 15 अक्टूबर 2024 करने पर कैबिनेट ने सहमति दे दी. नई कट ऑफ लागू करने की प्रक्रिया तय करने की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी को सौंप दी गई है. अब तक उपनलकर्मियों को समान वेतन की सुविधा की कट ऑफ 12 नवंबर 2018 से की जा रही थी. अब नई व्यवस्था के तहत 16 हजार के करीब कर्मचारियों को लाभ मिलेगा.
गोल्डन कार्ड में उपचार के लिए वित्तीय संकट दूर
गोल्डन कार्ड योजना में अस्पतालों के बकाया भुगतान को वित्तीय मदद की मंजूरी कैबिनेट की ओर से की गई है. कर्मचारी संगठन लंबे समय से अस्पतालों के बकाया का भुगतान कर गोल्डन कार्ड की सुविधा शुरू किए जाने की मांग कर रहे थे. बकाया भुगतान न होने से बड़ी संख्या में अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड योजना में इलाज की सुविधा देना बंद कर दिया था. इसके साथ ही कर्मचारी, पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भी भुगतान नहीं हो पा रहा था. इसे लेकर कर्मचारी संगठनों की नाराजगी बढ़ रही थी.
राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण पर राहत
राज्य में 18 अगस्त 2024 से 24 नवंबर 2024 के बीच विभागों में हुई पांच भर्तियों में राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को भी आरक्षण पर लाभ मिलेगा. सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की नियमावलि 18 अगस्त 2024 और जीओ 24 नवंबर 2024 को निकला था. बीच की भर्तियों में शामिल हुए आंदोलनकारी आरक्षण के प्रमाण पत्र नहीं दे पाए थे. अब प्रमाण पत्र जांच के दौरान वे राज्य आंदोलनकारी आरक्षण प्रमाण पत्र दिखा सकेंगे. कैबिनेट ने यह सुविधा एक बार के लिए दी है.
सरकार गोल्डन कार्ड योजना में अस्पतालों का बकाया चुकाने के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को गैप फंडिंग के तहत 100 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी. धामी कैबिनेट के इस फैसले से राज्य के तीन लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी. गोल्डन कार्ड योजना के तहत राज्य में अस्पतालों का राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर करीब 200 करोड़ बकाया है. इससे अस्पताल गोल्डन कार्ड के जरिए अब कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रितों के इलाज में आनाकानी कर रहे हैं. मजबूरन लोगों को कर्मचारियों को इलाज के लिए अपने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लगातार सरकार से योजना की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने की मांग कर रहे थे. इस संदर्भ में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से भी सरकार से गैप फंडिंग के रूप में 175 करोड़ रुपये दिए जाने की मांग की गई थी. इसके बाद अब योजना में अस्पतालों व बिलों का बकाया चुकाने के लिए प्राधिकरण को 100 करोड़ का बजट देने को मंजूरी दी गई है. इससे अस्पतालों का पचास फीसदी के करीब भुगतान हो जाएगा और मरीजों को भर्ती करने में पेश आ रही दिक्कतें भी काफी हद तक दूर हो जाएंगी.
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प्रीमियम बढ़ोतरी का हुआ था फैसला
योजना को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने पूर्व में गैप फंडिंग के साथ ही कर्मचारी, पेंशनर्स के प्रीमियम में भी बढ़ोतरी का भी निर्णय लिया था. कैबिनेट में इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पारित किया गया. लेकिन कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए उस फैसले को लागू नहीं किया जा सका. इसका नतीजा यह रहा कि वित्त विभाग ने गैप फंडिंग के लिए बजट भी नहीं दिया जिससे योजना का बकाया लगातार बढ़ता गया. लेकिन अब गैप फंडिंग के लिए 100 करोड़ मिलने की मंजूरी से योजना के पटरी पर लौटने की उम्मीद जागी है.
पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट ने उपनलकर्मियों, राज्य आंदोलनकारियों और कर्मचारी-पेंशनरों की गोल्डन कार्ड योजना पर अहम फैसले लिए हैं. उपनलकर्मियों को 1 मार्च 2026 से समान वेतन का लाभ मिलेगा. धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर मुहर लगी है.
उपनल वालों को समान वेतन
उत्तराखंड में समान कार्य समान वेतन सुविधा के दायरे में आ रहे कर्मचारियों को एक मार्च 2026 से इसका लाभ मिलेगा. दूसरी तरफ, समान वेतन के लिए नई कट ऑफ डेट 15 अक्टूबर 2024 करने पर कैबिनेट ने सहमति दे दी. नई कट ऑफ लागू करने की प्रक्रिया तय करने की जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गठित सब कमेटी को सौंप दी गई है. अब तक उपनलकर्मियों को समान वेतन की सुविधा की कट ऑफ 12 नवंबर 2018 से की जा रही थी. अब नई व्यवस्था के तहत 16 हजार के करीब कर्मचारियों को लाभ मिलेगा.
गोल्डन कार्ड में उपचार के लिए वित्तीय संकट दूर
गोल्डन कार्ड योजना में अस्पतालों के बकाया भुगतान को वित्तीय मदद की मंजूरी कैबिनेट की ओर से की गई है. कर्मचारी संगठन लंबे समय से अस्पतालों के बकाया का भुगतान कर गोल्डन कार्ड की सुविधा शुरू किए जाने की मांग कर रहे थे. बकाया भुगतान न होने से बड़ी संख्या में अस्पतालों ने गोल्डन कार्ड योजना में इलाज की सुविधा देना बंद कर दिया था. इसके साथ ही कर्मचारी, पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भी भुगतान नहीं हो पा रहा था. इसे लेकर कर्मचारी संगठनों की नाराजगी बढ़ रही थी.
राज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण पर राहत
राज्य में 18 अगस्त 2024 से 24 नवंबर 2024 के बीच विभागों में हुई पांच भर्तियों में राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को भी आरक्षण पर लाभ मिलेगा. सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण की नियमावलि 18 अगस्त 2024 और जीओ 24 नवंबर 2024 को निकला था. बीच की भर्तियों में शामिल हुए आंदोलनकारी आरक्षण के प्रमाण पत्र नहीं दे पाए थे. अब प्रमाण पत्र जांच के दौरान वे राज्य आंदोलनकारी आरक्षण प्रमाण पत्र दिखा सकेंगे. कैबिनेट ने यह सुविधा एक बार के लिए दी है.
सरकार गोल्डन कार्ड योजना में अस्पतालों का बकाया चुकाने के लिए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण को गैप फंडिंग के तहत 100 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देगी. धामी कैबिनेट के इस फैसले से राज्य के तीन लाख सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स को बड़ी राहत मिलेगी. गोल्डन कार्ड योजना के तहत राज्य में अस्पतालों का राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण पर करीब 200 करोड़ बकाया है. इससे अस्पताल गोल्डन कार्ड के जरिए अब कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके आश्रितों के इलाज में आनाकानी कर रहे हैं. मजबूरन लोगों को कर्मचारियों को इलाज के लिए अपने पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं.
विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर्स संगठन लगातार सरकार से योजना की आर्थिक दिक्कतों को दूर करने की मांग कर रहे थे. इस संदर्भ में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से भी सरकार से गैप फंडिंग के रूप में 175 करोड़ रुपये दिए जाने की मांग की गई थी. इसके बाद अब योजना में अस्पतालों व बिलों का बकाया चुकाने के लिए प्राधिकरण को 100 करोड़ का बजट देने को मंजूरी दी गई है. इससे अस्पतालों का पचास फीसदी के करीब भुगतान हो जाएगा और मरीजों को भर्ती करने में पेश आ रही दिक्कतें भी काफी हद तक दूर हो जाएंगी.
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प्रीमियम बढ़ोतरी का हुआ था फैसला
योजना को पटरी पर लाने के लिए सरकार ने पूर्व में गैप फंडिंग के साथ ही कर्मचारी, पेंशनर्स के प्रीमियम में भी बढ़ोतरी का भी निर्णय लिया था. कैबिनेट में इस संदर्भ में प्रस्ताव भी पारित किया गया. लेकिन कर्मचारियों के विरोध को देखते हुए उस फैसले को लागू नहीं किया जा सका. इसका नतीजा यह रहा कि वित्त विभाग ने गैप फंडिंग के लिए बजट भी नहीं दिया जिससे योजना का बकाया लगातार बढ़ता गया. लेकिन अब गैप फंडिंग के लिए 100 करोड़ मिलने की मंजूरी से योजना के पटरी पर लौटने की उम्मीद जागी है.