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सपा सांसद इकरा हसन बुधवार देर शाम यूपी के सहारनपुर गंगोह के छापुर पहुंची। यहां कैराना सांसद इकरा ने कहा कि मंदिर खंडित करने की घटना से दुखी हूं, समाज को तोड़ने वालों को नहीं छोडूंगी। भावुक होकर बोली मुझे गालियां देना सिर्फ मुझे नहीं, इस पूरे इलाके की महिलाओं का अपमान है। बुधवार को कैराना सांसद इकरा हसन सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र के छापुर गांव पहुंचीं, जहां उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान सांसद इकरा हसन बेहद भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले गांव में जो घटना हुई, उससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा किसी भी आस्था स्थल को खंडित करना बेहद निंदनीय है। मंदिर को तोड़ने जैसी घटना किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है।
कोमल गुर्जर पर की गई अभद्र टिप्पणी की निंदा करते हुए इकरा ने कहा कि उनका सवाल पूर्व सांसद से है। क्या वे अपने समर्थक के बयान की निंदा करेंगे, जिसने मुझे आतंकवादी कहा? यह सिर्फ मेरे खिलाफ नहीं, पूरे समाज की महिलाओं का अपमान है।
इकरा ने स्पष्ट कहा कि इस प्रकरण में जो लोग जेल गए हैं, उनका उन्होंने कभी समर्थन नहीं किया, न ही किसी के पक्ष में कोई फोन किया है। उन्होंने कहा अगर किसी और की संलिप्तता है तो उसे भी सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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बैठक में उन्होंने कहा कि विरोध करने का अधिकार सबको है, लेकिन विरोध के दौरान जिस तरह की भाषा धर्म, बिरादरी और महिलाओं के खिलाफ इस्तेमाल की गई, वह समाज को तोड़ने का काम करती है।
सांसद इकरा ने कहा कि जब मैं चुनाव जीती थी तो मेरी सबसे बड़ी खुशी यह थी कि हर धर्म और हर जाति के लोगों ने मुझे अपनी बेटी और बहन मानकर वोट दिया। लेकिन आज जिस तरह की गालियां दी गई हैं, वह सिर्फ मुझे नहीं बल्कि इस क्षेत्र की हर महिला का अपमान है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी धर्म या बिरादरी की राजनीति नहीं की, हमेशा सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की है। इकरा बोलीं, अगर किसी को मेरा काम पसंद नहीं तो 5 साल बाद मुझे बदल सकते हैं, लेकिन क्या मैं आपके समाज की बेटी नहीं हूं? मेरे खिलाफ जो घटिया भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह शर्मनाक है।
इकरा ने आगे कहा कि वह राजनीतिक परिवार से हैं और उनके परिवार ने हमेशा लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि राजनीति का स्तर अब गिर गया है हमारे विरोधी परिवार से मतभेद जरूर रहे, लेकिन कभी किसी ने व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। अब जो हो रहा है, वह राजनीति नहीं, नफरत फैलाने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग धर्म के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति कर रहे हैं। जो लोग खुद को महापुरुष कहलवा रहे हैं, असल में वे समाज को तोड़ रहे हैं। असली महापुरुष बाबू हुकुम सिंह जैसे लोग थे, जिन्होंने समाज को जोड़ा।
सांसद ने कहा कि उन्हें प्रशासन से फोन आया कि वे छापुर न जाएं, लेकिन उन्होंने कहा कि यह मेरा इलाका है, मैं क्यों न जाऊं? मैं राजनीति की नहीं, समाज की बात करने आई हूं।
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इकरा ने बताया कि इस मामले में एसएसपी ने खुद फोन कर तहरीर मांगी है और उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा एक तरफ सरकार बहनों-बेटियों को सम्मान देने की बात करती है, दूसरी तरफ महिलाओं को गालियां दी जाती हैं। यह दोहरा चरित्र अब नहीं चलेगा।
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