वापस ले लो शौर्य चक्र… दफ्तरों के चक्कर काट रही शहीद की बुजुर्ग मां; 22 साल से है वादे पूरे होने का इंतजार
मणिपुर में 2003 में शहीद हुए शौर्य चक्र विजेता विवेक सक्सेना के परिवार को 22 साल बाद भी जमीन और अन्य वादों का लाभ नहीं मिल सका है. सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर परेशान 80 वर्षीय मां ने अब सम्मान और पदक लौटाने की पेशकश की है.
Edited By : Versha Singh|Updated: Sep 7, 2026 11:55
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साल 2003 में शहीद हुए विवेक सक्सेना की मां से UP कांग्रेस की राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर अनामिका यादव ने मुलाकात की (फोटो- @INCUttarPradesh)
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देश की सुरक्षा के लिए बेटे की शहादत के बाद जिस परिवार को सरकार की ओर से सम्मान और मदद का भरोसा दिया गया था, वही परिवार दो दशक से अधिक समय बाद भी अपने अधिकारों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा है. लखनऊ की 80 वर्षीय सावित्री सक्सेना ने अब अपने शहीद बेटे को मिले सम्मान वापस करने की पेशकश की है. उनका कहना है कि अगर शहादत के 22 साल बाद भी परिवार को अपने हक के लिए अपमान और परेशानी झेलनी पड़े, तो ऐसे सम्मान का क्या अर्थ रह जाता है.
मिली जानकारी के अनुसार, सावित्री सक्सेना के बेटे विवेक सक्सेना मणिपुर में आतंकवादियों से मुकाबले के दौरान 8 जनवरी 2003 को शहीद हुए थे. वह पूर्व सहायक कमांडेंट थे. उनकी वीरता और बलिदान के लिए उन्हें शौर्य चक्र के साथ राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था.
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परिवार के लिए जमीन आवंटित करने का दिया था आश्वासन
परिवार के मुताबिक, विवेक की शहादत के बाद सरकार की ओर से परिवार के लिए जमीन आवंटित करने और उनकी याद में स्मारक पार्क विकसित करने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन सालों का समय बीतने के बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. साल 2016 में तत्कालीन लखनऊ जिलाधिकारी राज शेखर ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इसके बाद जमीन आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन परिवार के सामने स्थायी निवास को लेकर नया सवाल खड़ा कर दिया गया.
शहीद के भाई ने लगाए गंभीर आरोप
शहीद के बड़े भाई रंजीत सक्सेना ने भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि परिवार से उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होने का प्रमाण मांगा गया था. उन्होंने आगे कहा, परिवार लंबे समय से लखनऊ में रह रहा है और बच्चों की पढ़ाई भी यहीं हुई है. इसके बावजूद अधिकारियों ने दस्तावेजों और हलफनामे के जरिए निवास साबित करने को कहा. परिवार ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए, लेकिन इसके बाद भी जमीन आवंटन का मामला आगे नहीं बढ़ सका.
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रंजीत ने इंडिया टुडे को बताया, उन्हें एक पुरानी रसीद भी मिली, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से परिवार को 75 हजार रुपये का चेक उसी लखनऊ के पते पर जारी किए जाने का जिक्र था. परिवार का सवाल है कि जब पहले सरकारी सहायता इसी पते पर दी जा चुकी थी, तो बाद में उसी पते को लेकर निवास संबंधी आपत्ति क्यों उठाई गई.
इतना ही नहीं, परिवार का दावा है कि शौर्य चक्र से जुड़ी सम्मान राशि पाने के लिए भी उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा और यह राशि साल 2024 में मिली. लगातार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से परेशान सावित्री सक्सेना ने अब राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है. उन्होंने कहा कि अगर बेटे की शहादत के बाद भी परिवार को अपने जायज अधिकार के लिए सालों तक भटकना पड़े, तो सरकार शौर्य चक्र, अन्य पदक और सम्मान राशि वापस ले ले.
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मामला सामने आने के बाद उपजिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शिकायत की जांच कर एक सप्ताह में उचित निस्तारण के निर्देश दिए हैं.
UP कांग्रेस ने साधा योगी सरकार पर निशाना
वहीं, UP कांग्रेस की राष्ट्रीय को-ऑर्डिनेटर अनामिका यादव ने शहीद के परिवार और उनकी मां से मुलाकात की. UP कांग्रेस ने X प्लेटफॉर्म पर एक ट्वीट कर कहा, ‘साल 2003 में मणिपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना (शौर्य चक्र एवं राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित) के बलिदान को भाजपा सरकार किस कदर भूल चुकी है, इसका उदाहरण लखनऊ में देखने को मिला.’
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भाजपा सरकार की बेरुखी: 23 साल बाद भी न्याय के लिए भटक रही हैं शहीद की 80 वर्षीया मां!
वर्ष 2003 में मणिपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले अमर शहीद सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना (शौर्य चक्र एवं राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित) के बलिदान… pic.twitter.com/gENwvGz3Pl