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’11 अप्रैल को बेटी को पकड़ा और 13 तक खबर नहीं दी’, आकृति चौधरी के पिता का छलका दर्द

नोएडा से गिरफ्तार आकृति चौधरी के पिता अरुण चौधरी ने उस दौर का दर्द साझा किया जब पुलिस ने दो दिनों तक बेटी की गिरफ्तारी छिपाई. हाईकोर्ट के फैसले और 5 लाख रुपये के मुआवजे के बाद पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने सिर्फ शांतिपूर्ण बात की थी. उन्होंने जेल में बंद अन्य निर्दोष छात्रों और युवाओं को भी तुरंत रिहा करने की मांग की.

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आकृति चौधरी की गिरफ्तारी और उसके बाद जेल में बिताए दिनों को याद करते हुए उनके पिता अरुण चौधरी ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक दौर था. उनका आरोप है कि उनकी बेटी को 11 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, लेकिन पुलिस की ओर से परिवार को 13 अप्रैल तक इसकी जानकारी नहीं दी गई. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अरुण चौधरी ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बावजूद उनका न्यायपालिका पर भरोसा कायम रहा.
अरुण चौधरी के मुताबिक, “हमें 11 अप्रैल को पता ही नहीं चला था. आकृति को 11 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन पुलिस ने हमें 11 अप्रैल को नहीं बताया, 12 अप्रैल को भी नहीं बताया और 13 अप्रैल को भी हमें इसकी कोई जानकारी नहीं दी.

13 अप्रैल की रात दोस्त से मिली गिरफ्तारी की जानकारी

आकृति के पिता ने बताया कि 13 अप्रैल की सुबह से उनकी पत्नी लगातार बेटी को फोन कर रही थीं, लेकिन फोन स्विच ऑफ मिल रहा था. शाम करीब 8 बजे जब वह घर पहुंचे तो पत्नी ने उन्हें बताया कि आकृति का फोन सुबह से बंद है. इसके बाद उन्होंने आकृति के उस दोस्त से संपर्क किया, जिसके साथ वह रहती थी. दोस्त ने उन्हें बताया कि आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसकी जमानत हो चुकी है. अगले दिन जमानत का बॉन्ड जमा किया जाना था.
अरुण चौधरी के मुताबिक, उन्हें अपनी बेटी की गिरफ्तारी की जानकारी 13 अप्रैल की रात करीब 8:30 बजे मिली. अगले दिन 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के कारण अदालत बंद थी. 15 अप्रैल की शाम करीब 5 बजे परिवार को जानकारी मिली कि आकृति की जमानत मंजूर हो गई है और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उसे रिहा किया जाएगा. लेकिन करीब 10 मिनट बाद ही स्थिति बदल गई. परिवार को बताया गया कि पुलिस अदालत पहुंच गई है और आकृति के खिलाफ दो और धाराएं 191(1) और 191(2) जोड़ दी गई हैं. इसके बाद उसकी जमानत खारिज हो गई और सेशन कोर्ट से जमानत लेने की जरूरत बताई गई.

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उस समय लगा मामला बेहद गंभीर हो चुका है

आकृति के पिता ने कहा कि इसी घटनाक्रम के बाद उन्हें महसूस हुआ कि मामला अब बेहद गंभीर हो चुका है. उन्होंने बताया कि 13 अप्रैल की घटना उन्होंने टीवी पर देखी और उसके बारे में सुना भी था. इसके बाद 16 अप्रैल को वह नोएडा के लिए रवाना हुए. उनके मुताबिक, 16 अप्रैल से 26 मई तक वह दिल्ली और नोएडा में रहे. इस दौरान उन्हें और उनके परिवार को मानसिक और भावनात्मक तौर पर काफी परेशानियों से गुजरना पड़ा.

किसी भी पिता के लिए यह बेहद दर्दनाक दौर था

अरुण चौधरी ने पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह उनकी बेटी के साथ व्यवहार किया जा रहा था, उसे देखकर उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे आकृति कोई बहुत बड़ा अपराधी या देशद्रोही हो. उन्होंने बताया कि आकृति, मनीषा चौहान, सृष्टि गुप्ता और ऑटो चालक रूपेश रॉय-इन चार युवाओं को पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा. उनके मुताबिक, लॉकअप से अदालत तक ले जाते समय चारों तरफ बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पुलिसकर्मी तैनात थे.
पिता ने कहा कि यह दृश्य उनके लिए बेहद पीड़ादायक था. उन्होंने इन युवाओं को “राजनीतिक बंदी” बताते हुए कहा कि ये पढ़े-लिखे युवा हैं और अपने अधिकारों तथा मांगों को लेकर आवाज उठा रहे थे.

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मेरी बेटी ने कहीं भी तोड़फोड़ की बात नहीं कही

आकृति के पिता ने अपनी बेटी पर लगाए गए आरोपों को लेकर कहा कि उसके भाषण और वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं. उनका कहना है कि अगर आकृति के भाषण को ध्यान से सुना जाए तो कहीं भी वह हिंसा या तोड़फोड़ के लिए लोगों को उकसाती नजर नहीं आती.
उनके मुताबिक, 11 अप्रैल को दिए गए भाषण में आकृति ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने की अपील की थी. उन्होंने कहा कि आकृति ने प्रदर्शनकारियों को आगाह किया था कि कुछ लोग हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन उन्हें उकसावे में नहीं आना चाहिए और अपनी मांगें शांतिपूर्ण तरीके से रखनी चाहिए.
अरुण चौधरी ने कहा, “मुझे अपनी परवरिश पर पूरा भरोसा था. मुझे विश्वास था कि मेरी बेटी ऐसा कोई काम कर ही नहीं सकती. मुझे पूरा भरोसा था कि देर-सबेर हमें न्याय जरूर मिलेगा और न्याय व्यवस्था पर मेरा विश्वास बना रहा.

जेल में बंद छात्रों और मजदूरों की रिहाई की मांग

हाईकोर्ट के फैसले के बाद आकृति के पिता ने सरकार से उन छात्रों और मजदूरों की तत्काल रिहाई की मांग की, जो अभी भी जेल में बंद हैं. उन्होंने उनके खिलाफ लगाए गए कथित फर्जी मुकदमों को वापस लेने की भी अपील की. उन्होंने कहा कि जेल में बंद कई लोग शिक्षित और युवा हैं. उन्होंने हिमांशु ठाकुर, आदित्य आनंद, योगेश मीणा और सत्यम वर्मा जैसे नामों का उल्लेख किया. अरुण चौधरी के मुताबिक, आदित्य आनंद एनआईटी जमशेदपुर से पढ़े हैं और एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर चुके हैं. योगेश मीणा कानून के छात्र हैं और उन्हें कथित तौर पर परीक्षा हॉल से ही ले जाया गया. वहीं सत्यम वर्मा एएनआई के साथ काम कर चुके हैं और रिपोर्टर, लेखक तथा अनुवादक के तौर पर भी काम कर चुके हैं.

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हाईकोर्ट के फैसले को बताया पूरे देश के लिए राहत

हाईकोर्ट के उस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें सरकार के कथानक को मनगढ़ंत बताते हुए 5 लाख रुपये के मुआवजे का आदेश दिया गया, आकृति के पिता ने इसे बेहद महत्वपूर्ण फैसला बताया. उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों के लिए राहत लेकर आया है जिनके बच्चे जेल में बंद हैं.
उनके मुताबिक, अदालत के फैसले ने यह भरोसा मजबूत किया है कि प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद देश की न्यायपालिका नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में सक्षम है. उन्होंने कहा कि इस फैसले ने उनके अनुसार पूरे घटनाक्रम से जुड़े कथित झूठे नैरेटिव को सामने ला दिया है.

जेल में बीता आकृति का 25वां जन्मदिन

अरुण चौधरी ने बेटी के साथ अपने भावनात्मक रिश्ते को याद करते हुए बताया कि जेल में रहते हुए आकृति का 25वां जन्मदिन आया. वह 25 साल पूरे कर 26वें वर्ष में प्रवेश कर रही थी. उन्होंने कहा कि इससे पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था कि बेटी के जन्मदिन पर परिवार उससे दूर रहा हो. लेकिन उस समय आकृति जेल में थी और परिवार उसके साथ जन्मदिन नहीं मना सका. बेटी का हौसला बढ़ाने के लिए उन्होंने एक भावनात्मक पत्र लिखा. आकृति के कुछ दोस्त जेल में उससे मिलने गए और उन्होंने वह पत्र उसे पढ़कर सुनाया.
उन्होंने बताया कि आकृति उन्हें प्यार से “मोटू पापा” कहती थी, जबकि परिवार में उसे प्यार से “सोनी” कहा जाता था.
पिता ने कहा कि उनके और बेटी के बीच बेहद खास रिश्ता रहा है. अरुण चौधरी ने कहा कि उन्हें हमेशा भरोसा था कि उनकी बेटी कोई गलत काम नहीं कर सकती. उनके मुताबिक, आकृति अपने जीवन और गतिविधियों से जुड़ी बातें परिवार के साथ खुलकर साझा करती थी.

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आज मुझे अपनी बेटी पर गर्व है

भावुक होते हुए आकृति के पिता ने कहा कि आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है कि उसने लोगों की आवाज बनने की कोशिश की.
उन्होंने कहा, “आज मुझे अपनी बेटी पर गर्व है कि वह लोगों की आवाज बनी है. मैं चाहता हूं कि वह हमेशा इसी तरह दूसरों के लिए अपनी आवाज उठाती रहे.”
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अरुण चौधरी के बयान में एक तरफ बेटी की गिरफ्तारी और जेल में बिताए दिनों का दर्द दिखाई देता है, तो दूसरी तरफ न्यायपालिका में उनका भरोसा भी स्पष्ट नजर आता है. उनका कहना है कि कठिन दौर के बावजूद उन्हें विश्वास था कि अंततः न्याय मिलेगा.

First published on: Sep 04, 2026 10:15 PM

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