8 दिन तक पोस्टमार्टम का इंतजार करता रहा 'मुर्दा', यूपी पुलिस और अस्पताल की लापरवाही की हद

Bundelkhand delay in post mortem: बुंदेलखंड के महोबा में तबीयत खराब होने पर इकबाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें इकबाल से मिलने नहीं दिया। 3 मार्च को इकबाल की मौत हो गई। लेकिन उसकी मौत के 8 दिन बाद 11 मार्च तक पुलिस शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया।

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Bundelkhand delay in post mortem (कफील अहमद): बुंदेलखंड के महोबा में पुलिस की संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। यहां एक मुर्दा 8 दिनों तक अपने पोस्टमार्टम का इंतजार करता रहा। पुलिस की इस लापरवाही को लेकर मृतक के परिजनों ने सवाल खड़े किए हैं। परिजनों का कहना है कि यूपी की पुलिस से जीवित व्यक्ति ही न्याय के लिए नहीं भटक रहा बल्कि एक मुर्दे को भी 8 दिन तक अपने पोस्टमार्टम का इंतजार करना पड़ा है। परिजनों के हंगाम के बाद सोमवार को शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। परिजनों ने जिला अस्पताल स्टाफ और कोतवाली पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। जानकारों का कहना है नियम है कि किसी भी शव का मरने के तीन दिन के भीतर पोस्टमार्टम कर दिया जाना चाहिए।

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पुलिस ने दी मौत की सूचना

यह घटना बुंदेलखंड के महोबा की है। यहां कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत नैकानापूरा में 40 वर्षीय निवासी इकबाल रहता था। तबीयत खराब होने पर 22 फरवरी को उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उन्हें इकबाल से मिलने नहीं दिया। पूछने पर उन्हें कहा गया कि वह इलाज के लिए कहीं और चला गया है। परिजनों का कहना है कि 3 मार्च को ही इकबाल की मौत हो गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी हाउस में सुरखित रखवा दिया गया है। परिजनों का आरोप है कि उसके बाद 11 मार्च तक पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया।

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अस्पताल का पक्ष

परिजनों का आरोप है कि इकबाल की मौत के पीछे कोई साजिश है। उनका आरोप है कि अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में इकबाल की फर्जी एंट्री की गई है। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर जिला अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर पवन अग्रवाल ने कहा कि शव रखे होने की सूचना पुलिस को दे दी गई थी। पुलिस ने मृतक के परिवार को तलाश कर पोस्टमार्टम कराया है। मामले में किसी प्रकार की लापरवाही नही की गई है।

मामले में जांच की मांग

वहीं, मामले में नैकानापुरा वार्ड सभासद जिशान कहा कि उन्होंने खुद अस्पताल में जाकर मृतक को भर्ती कराया गया था और उसका पता भी दर्ज कराया गया मगर इसके बावजूद भी हुई लापरवाही से 8 दिन तक शव मोर्चरी हाउस में रखा रहा। वहीं, इस संवेदनशील मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता योगेश यादव ने कहा है कि सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक नागरिक की स्वास्थ्य और सुरक्षा की व्यवस्था करें। लेकिन जिला अस्पताल की लापरवाही से शव पोस्टमार्टम के लिए आठ दिन तक पड़ा रहा।

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लेखक के बारे में

Amit Kasana

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अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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