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प्राण प्रतिष्ठा से पहले ‘आचार्यवर्णम’ अनुष्ठान क्यों जरूरी? राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कारण

What Is Acharyavarnam Ritual Ahead Of Pran Pratishtha: श्री रामजन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले होने वाले आचार्यवर्णम अनुष्ठान के बारे में जानकारी दी है।

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What Is Acharyavarnam Ritual Ahead Of Pran Pratishtha : अयोध्या में 22 नवंबर को भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और उद्घाटन होना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शिरकत करेंगे इसे लेकर गुरुवार को राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा क्या होती है और यह क्यों जरूरी है।

आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा एक पवित्र आयोजन है जिसमें प्राण के नाम से जाने जाने वाले दिव्य सार का किसी मंदिर में भगवान की प्रतिमा या तस्वीर में आह्वान किया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य मूर्ति में भगवान के अंश का संचार करती है। साथ ही उन्होंने आचार्यवर्णम अनुष्ठान के बारे में भी जानकारी दी।

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आचार्यवर्णन अनुष्ठान में क्या होता है?

सत्येंद्र दास ने कहा कि अनुष्ठान में यजमान आचार्य का वर्णन करता है। इसमें जो कुछ भी किया जाता है, मंत्र जपे जाते हैं उसका फल उसे मिलता है जो वर्णन करता है। यजमान आचार्य का मंत्रों के द्वारा वर्णन करता है कि आप जो भी कार्य करेंगे उसका फल यजमान को मिलेगा। इसीलिए इसे आचार्यवर्णम अनुष्ठान कहते हैं।

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मंदिर को लेकर आचार्य दास का कहना है कि हमें मंदिर बनने की उम्मीद थी लेकिन हमने यह कभी नहीं सोचा था कि इतना बड़ा और भव्य मंदिर बनेगा। राम राज्य अब आ रहा है। रामलला को मंदिर के गर्भगृह में बैठाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने उन दिनों पर भी बात की जब विवादित भूमि पर रामलला की प्रतिमा मिली थी।

1949 में मिली थी रामलला की प्रतिमा

उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर 1949 को विवादित भूमि पर रामलला की प्रतिमा दिखी थी। इसके बाद अदालत के आदेश पर लोग पूजा करने लगे थे। 1 मार्च 1992 को मैं रामलला का पुजारी बना था। उससे पहले कारसेवकों पर हमले जैसी कई घटनाएं हुई थीं। बाबरी मस्जिद के ढहने के बाद 6 दिसंबर 1992 को रामलला को एक टेंट में ले जाया गया था।

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First published on: Jan 18, 2024 10:52 PM

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