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BMC में किंगमेकर बना शिंदे गुट, ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के डर से पार्षदों को 5 स्टार होटल में किया गया शिफ्ट

BMC Elections: बीएमसी चुनाव में शिंदे गुट ने 29 सीटें हासिल की हैं, जबकि बीजेपी अपने बूते बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी. राजनीतिक समीकरणों में अब शिंदे सेना ही निर्णायक शक्ति बन गई है, और सत्ता की चाबी उसके हाथ में मानी जा रही है.

Author Written By: Akarsh Shukla Updated: Jan 17, 2026 17:23
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बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव नतीजों ने मुंबई की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने किंगमेकर की भूमिका निभाई है, लेकिन ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के खतरे को भांपते हुए अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को बांद्रा के ताज लैंड्स एंड्स होटल में शिफ्ट कर दिया. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दोपहर तीन बजे तक सभी पार्षदों को होटल पहुंचने का आदेश था और अगले तीन दिनों तक वे वहीं रहेंगे जिससे किसी भी तरह से विपक्ष उन्हें अपने खेमे में शामिल न कर सके.

शिंदे सेना ही निर्णायक शक्ति


बीएमसी चुनाव में शिंदे गुट ने 29 सीटें हासिल की हैं, जबकि बीजेपी अपने बूते बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी. राजनीतिक समीकरणों में अब शिंदे सेना ही निर्णायक शक्ति बन गई है, और सत्ता की चाबी उसके हाथ में मानी जा रही है. जानकारों का कहना है कि बीजेपी के लिए मेयर पद व सरकार गठन शिंदे गुट के समर्थन के बिना मुश्किल है. यही वजह है कि शिंदे गुट किसी जोखिम से बचना चाहता है.

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घटनाक्रम पर एकनाथ शिंदे की नजर


एकनाथ शिंदे खुद पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं. उनका ‘नो रिस्क’ वाला रुख साफ झलक रहा है कि जब तक सत्ता का औपचारिक दावा न हो जाए, पार्षदों को एकजुट रखना जरूरी है. शिंदे गुट को विपक्षी दलों या अन्य राजनीतिक ताकतों से पार्षदों को तोड़ने की आशंका है, जो समीकरण बिगाड़ सकती है. इस रणनीति से सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है.

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कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन का तीखा प्रहार

नसीर हुसैन ने तंज कसते हुए पूछा, ‘शिंदे को डर किससे है? कौन उनके पार्षदों को तोड़ सकता है? और किसे तोड़फोड़ का सबसे ज्यादा अनुभव है, यह तो सब जानते हैं.’ हुसैन ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह सहयोगी दलों व टूटे गुटों की कीमत पर ही आगे बढ़ी है. महाराष्ट्र और बिहार में किसका ‘स्ट्राइक रेट’ सबसे बढ़िया रहा, यह साफ है. शिंदे इसे जितनी जल्दी समझ लें, उतना बेहतर.’

First published on: Jan 17, 2026 05:23 PM

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