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राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग पर बड़े सवाल, 220 करोड़ के निर्माण में खामियां; अब तक 5 गिरफ्तार

जोधपुर में 220 करोड़ रुपये की लागत से बनी राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग में निर्माण और सुरक्षा को लेकर गंभीर खामियां सामने आई हैं. मामले में अब तक 5 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं.

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जोधपुर के झालामंड में स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की नई इमारत के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. (Image- ANI/X)

जोधपुर में मौजूद राजस्थान हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के निर्माण में बड़ी एवं गंभीर कमियां सामने आई हैं. यह बिल्डिंग तकरीबन 220 करोड़ रुपये की लागत से बनी है. जिसमें निर्माण और उससे जुड़े कार्यों में लापरवाही पता चलने पर पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है. 5 आरोपियों को पुलिस ने अभी तक गिरफ्तार कर लिया है. राजस्थान हाईकोर्ट में 15 सितंबर को इस मामले की अहम सुनवाई होनी है.

हैंडओवर करने के बाद आने लगी शिकायतें

जोधपुर के झालामंड में बनी हाईकोर्ट की इस नई इमारत का निर्माण कार्य शुरू होने के बाद दिसंबर 2019 में इसे हैंडओवर किया गया था. लेकिन हैंडओवर के बाद से ही भवन की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे. कोर्ट रूम, जजों के चैंबर, बिल सेक्शन, लिफ्ट के पास और कॉरिडोर समेत कई जगहों पर छत और फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं सामने आईं. कोर्ट नंबर-2 में आग लगने की घटना भी हुई.

IIT जोधपुर एवं IIT बॉम्बे ने करी जांच

इस मामले में हद तो तब हो गई जब इमारत के बीच में बने 21 मीटर ऊंचे सेंट्रल डोम में क्रैक, सीलन और दरारें आ गईं. हाईकोर्ट ने खुद मामले पर गंभीरता लेते हुए भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. जांच में IIT जोधपुर, IIT बॉम्बे और PTMES से ऑडिट और तकनीकी सर्वे कराया गया. जांच रिपोर्ट में निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर काफी कमियां सामने आई. रिपोर्ट के मुताबिक निरीक्षण किए गए हिस्सों में करीब 40 फीसदी क्षेत्र कंक्रीट के अचानक उखड़ने यानी स्पॉलिंग के खतरे की श्रेणी में पाया गया. IIT बॉम्बे ने यह भी चेतावनी दी कि नमी बढ़ने पर सरिया में जंग की प्रक्रिया तेज हो सकती है और कंक्रीट का बाहर का हिस्सा अचानक गिर सकता है.

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कई आरोपी गिरफ्तार

इसके बाद पुलिस ने निर्माण का सामान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों, निर्माण एजेंसियों, फायर सिस्टम इंस्टॉलेशन से जुड़े लोगों और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जांच शुरू की. मामले में RSRDC के तीन अधिकारियों और इलेक्ट्रिकल ठेकेदार कंपनी के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों का नाम रामेश्वर दयाल खंडेलवाल और गोपाल लाल खंडेलवाल के अलावा जितेंद्र शर्मा, नवीनचंद्र के राय और राजेश पुरोहित हैं. पुलिस के अनुसार इन सभी पर हाईकोर्ट भवन के निर्माण की अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं.

ब्रीच ऑफ ट्रस्ट का मामला एवं निर्माण कंपनी का मालिक गिरफ्तार

जांच में जोधपुर पुलिस कमिश्नर के अनुसार क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट किए जाने का मामला सामने आया है. पुलिस ने 12 विशेष टीमों और 4 साइबर टीमों बनाई हैं. टीमों ने जोधपुर के अलावा जयपुर, कोटा, बूंदी, अजमेर, अलवर, दिल्ली-एनसीआर, गुरुग्राम, नोएडा, पंजाब और उत्तराखंड तक दबिश दी है. पुलिस ने मुख्य निर्माण कंपनी VCL ग्रुप के मालिक वरिंदर गर्ग को हरिद्वार से पकड़ा. वह 50 हजार रुपये का इनामी था. 15 सितंबर को राजस्थान हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होनी है. ऐसे में पुलिस की जांच रिपोर्ट, गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और भवन की सुरक्षा को लेकर कोर्ट के निर्देशों पर सभी की नजर रहेगी.

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