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मुंबई के मीरा रोड में चाकूबाजी: लोन वुल्फ अटैक की आशंका, ISIS लिंक की जांच में ATS

मुंबई के मीरा रोड में चाकूबाजी की घटना में लोन वुल्फ अटैक और ISIS कनेक्शन की आशंका जताई जा रही है. दो सुरक्षा गार्ड घायल हुए, आरोपी ज़ुबैर अंसारी गिरफ्तार, मामले की जांच महाराष्ट्र ATS कर रही है.

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Written By: Indrajeet Singh Updated: Apr 28, 2026 11:36

मुंबई के मीरा रोड में हुई चाकूबाजी की घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है. बल्कि इसमें कट्टरपंथ और संभावित आतंकी कनेक्शन की आशंका ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है. दो सिक्योरिटी गार्ड्स पर जानलेवा हमला ‘कलमा’ पढ़ने को लेकर विवाद और आरोपी के घर से संदिग्ध नोट्स की बरामदगी. इन सबके बाद अब इस केस की जांच महाराष्ट्र ATS कर रही है.

घटना मुंबई के मीरा रोड ईस्ट, नया नगर इलाके की है. जहां वॉकहार्ट अस्पताल के पीछे एक निर्माणाधीन इमारत में तैनात दो सिक्योरिटी गार्ड्स पर एक युवक ने ताबड़तोड़ चाकू से हमला कर दिया. घायल गार्ड्स—राजकुमार मिश्रा और सुब्रतो सेन—को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां दोनों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.

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पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले मौके पर पहुंचा और मस्जिद का रास्ता पूछकर वहां से चला गया. कुछ देर बाद वह फिर लौटा. इस बार उसने गार्ड से उसका धर्म पूछा और फिर कथित तौर पर ‘कलमा’ पढ़ने को कहा जैसे ही गार्ड ने ऐसा करने से इनकार किया आरोपी ने अचानक चाकू से हमला कर दिया. इसके बाद वह सिक्योरिटी केबिन में घुसा जहां मौजूद दूसरे गार्ड पर भी इसी तरह हमला किया गया.

घटना के तुरंत बाद पुलिस हरकत में आई और आसपास लगे CCTV कैमरों की मदद से आरोपी की पहचान कर ली गई. महज डेढ़ घंटे के भीतर 31 वर्षीय आरोपी ज़ुबैर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया. उसे अदालत में पेश किया गया… जहां से उसे पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

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मामले ने उस वक्त बड़ा मोड़ ले लिया जब पुलिस ने आरोपी के घर की तलाशी ली. तलाशी के दौरान कुछ ऐसे नोट्स और दस्तावेज मिले जिनमें कथित तौर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS से जुड़ी विचारधारा के संकेत पाए गए. कुछ नोट्स में ‘लोन वुल्फ’, ‘जिहाद’ और ‘गाज़ा’ जैसे शब्द लिखे मिले साथ ही अंग्रेजी में धमकी भरे वाक्य भी पाए गए.

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई साधारण अपराधी नहीं ज़ुबैर अंसारी एक साइंस ग्रेजुएट है. वह कई साल तक अमेरिका में रह चुका है. भारत लौटने के बाद वह मीरा रोड में अकेले रह रहा था और ऑनलाइन केमिस्ट्री पढ़ाने का काम कर रहा था. बताया जा रहा है कि नौकरी नहीं मिलने और अकेलेपन के दौरान वह धीरे-धीरे ऑनलाइन कट्टरपंथी कंटेंट की तरफ झुक गया.

जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी सोशल मीडिया, वीडियो प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ऐसे कंटेंट के संपर्क में आया जो कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देता है. अब ATS आरोपी के—मोबाइल डेटा, इंटरनेट हिस्ट्री, सोशल मीडिया अकाउंट्स और कॉल रिकॉर्ड्स
सभी की गहराई से जांच कर रही है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Maharashtra Anti-Terrorism Squad को सौंप दी गई है. ATS अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है— क्या आरोपी ने यह हमला अकेले किया या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि हमला पहले से प्लान किया गया था या अचानक हुई घटना का नतीजा था.

मीरा रोड की यह घटना सिर्फ एक क्राइम नहीं बल्कि एक गंभीर संकेत है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कट्टरपंथ समाज में प्रवेश कर रहा है.अब पूरा मामला ATS के हाथ में है और आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि—अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर भ्रामक या भड़काऊ जानकारी साझा न करें. उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है.

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मीरा रोड की यह वारदात कई सवाल खड़े करती है—क्या यह एक ‘लोन वुल्फ’ अटैक है? या फिर किसी बड़े नेटवर्क की झलक? और सबसे अहम— क्या डिजिटल दुनिया में फैलता कट्टरपंथ अब हमारी सुरक्षा के लिए नया खतरा बन चुका है? इन सवालों के जवाब अब ATS की जांच से ही सामने आएंगे.

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First published on: Apr 28, 2026 11:35 AM

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