Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में हर पल रंग बदलते घटनाक्रम के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. पार्टी के दो प्रमुख सांसदों नासिक से राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इन दोनों सांसदों के बयानों के बाद उद्धव ठाकरे गुट पर मंडरा रहा बगावत का तात्कालिक संकट फिलहाल टलता हुआ नजर आ रहा है.
अफवाहों पर सांसदों ने लगाया पूर्णविराम
पिछले कुछ घंटों से सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदलने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. इस बीच राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने खुद सामने आकर इन खबरों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने साफ किया कि वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं. संजय राउत ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा कि राजाभाऊ वाजे केवल एक आधिकारिक समिति की बैठक के सिलसिले में दिल्ली गए हैं, जिसे गलत रंग दिया जा रहा है.
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने बगावत की खबरों को पूरी तरह अफवाह और बीजेपी की दबाव की राजनीति बताया है. उन्होंने कहा कि बागी खेमे के पास जरूरी नंबर (6 सांसद) नहीं हैं. इसके जवाब में राउत ने विरोधियों को मात देने के लिए "ऑपरेशन वोल्फ" शुरू करने की चेतावनी दी है.
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली में बागी सांसदों के जुटने की खबरें आईं और मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में कुछ सांसद नहीं पहुंचे. दलबदल कानून से बचने के लिए बागियों को 7 सांसदों की जरूरत है. ऐसे में राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल के इस खंडन के बाद विरोधी खेमे के दावों को बड़ा झटका लगा है और उद्धव गुट ने राहत की सांस ली है. इस बयान के बाद अब महाराष्ट्र के सियासी समीकरणों में नंबर गेम एक बार फिर उलझ गया है.
अब तक के ताजा अपडेट
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद उनके संपर्क में हैं और पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं. बगावत की चर्चाओं के बीच, शिवसेना (UBT) के कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी कल देर रात अचानक दिल्ली पहुंचे हैं, जिससे इस ऑपरेशन के अंतिम चरण में होने की अटकलों को हवा मिली है. शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे द्वारा अपने बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी में और बड़ा पद या कमान सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे कई वरिष्ठ सांसद नाराज चल रहे हैं.
दलबदल कानून का गणित
नियमानुसार, अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए किसी भी धड़े को अलग गुट बनाने या विलय करने के लिए कुल सांसदों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत चाहिए. चूंकि उद्धव गुट के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, इसलिए कानूनी रूप से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों का एक साथ टूटना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट इसी आंकड़े (6 सांसद) के पूरा होने का इंतजार कर रहा है. यह पूरा घटनाक्रम 19 जून (अविभाजित शिवसेना के स्थापना दिवस) तक अंजाम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है.
उद्धव गुट (UBT) का पलटवार
स्पीकर ओम बिरला को पत्र: किसी भी संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव गुट के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक विस्तृत पत्र भेजा है. इसमें मांग की गई है कि संविधान के तहत अब पार्टी में 'स्प्लिट' (टूट) को कोई कानूनी मान्यता नहीं है, इसलिए किसी भी बागी गुट को अलग से मान्यता न दी जाए.
उद्धव गुट ने अपने सभी सांसदों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए दिल्ली में मौजूद रहने का कड़ा व्हिप जारी किया है.
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में हर पल रंग बदलते घटनाक्रम के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. पार्टी के दो प्रमुख सांसदों नासिक से राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की अटकलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इन दोनों सांसदों के बयानों के बाद उद्धव ठाकरे गुट पर मंडरा रहा बगावत का तात्कालिक संकट फिलहाल टलता हुआ नजर आ रहा है.
अफवाहों पर सांसदों ने लगाया पूर्णविराम
पिछले कुछ घंटों से सियासी गलियारों में यह चर्चा गर्म थी कि उद्धव गुट के कई सांसद पाला बदलने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. इस बीच राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने खुद सामने आकर इन खबरों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने साफ किया कि वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं. संजय राउत ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा कि राजाभाऊ वाजे केवल एक आधिकारिक समिति की बैठक के सिलसिले में दिल्ली गए हैं, जिसे गलत रंग दिया जा रहा है.
शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने बगावत की खबरों को पूरी तरह अफवाह और बीजेपी की दबाव की राजनीति बताया है. उन्होंने कहा कि बागी खेमे के पास जरूरी नंबर (6 सांसद) नहीं हैं. इसके जवाब में राउत ने विरोधियों को मात देने के लिए “ऑपरेशन वोल्फ” शुरू करने की चेतावनी दी है.
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब दिल्ली में बागी सांसदों के जुटने की खबरें आईं और मुंबई में उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई बैठक में कुछ सांसद नहीं पहुंचे. दलबदल कानून से बचने के लिए बागियों को 7 सांसदों की जरूरत है. ऐसे में राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल के इस खंडन के बाद विरोधी खेमे के दावों को बड़ा झटका लगा है और उद्धव गुट ने राहत की सांस ली है. इस बयान के बाद अब महाराष्ट्र के सियासी समीकरणों में नंबर गेम एक बार फिर उलझ गया है.
अब तक के ताजा अपडेट
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दावा है कि उद्धव ठाकरे गुट (UBT) के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद उनके संपर्क में हैं और पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं. बगावत की चर्चाओं के बीच, शिवसेना (UBT) के कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं. वहीं, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी कल देर रात अचानक दिल्ली पहुंचे हैं, जिससे इस ऑपरेशन के अंतिम चरण में होने की अटकलों को हवा मिली है. शिंदे गुट के नेताओं का दावा है कि उद्धव ठाकरे द्वारा अपने बेटे आदित्य ठाकरे को पार्टी में और बड़ा पद या कमान सौंपने की तैयारी की जा रही है, जिससे कई वरिष्ठ सांसद नाराज चल रहे हैं.
दलबदल कानून का गणित
नियमानुसार, अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए किसी भी धड़े को अलग गुट बनाने या विलय करने के लिए कुल सांसदों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत चाहिए. चूंकि उद्धव गुट के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं, इसलिए कानूनी रूप से बचने के लिए कम से कम 6 सांसदों का एक साथ टूटना जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट इसी आंकड़े (6 सांसद) के पूरा होने का इंतजार कर रहा है. यह पूरा घटनाक्रम 19 जून (अविभाजित शिवसेना के स्थापना दिवस) तक अंजाम दिए जाने की संभावना जताई जा रही है.
उद्धव गुट (UBT) का पलटवार
स्पीकर ओम बिरला को पत्र: किसी भी संभावित टूट को रोकने के लिए उद्धव गुट के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक विस्तृत पत्र भेजा है. इसमें मांग की गई है कि संविधान के तहत अब पार्टी में ‘स्प्लिट’ (टूट) को कोई कानूनी मान्यता नहीं है, इसलिए किसी भी बागी गुट को अलग से मान्यता न दी जाए.
उद्धव गुट ने अपने सभी सांसदों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए दिल्ली में मौजूद रहने का कड़ा व्हिप जारी किया है.