Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

मुंबई

महिला आरक्षण पर महाराष्ट्र की राजनीति में उबाल, सीएम देवेंद्र फडणवीस और संजय राऊत में हुई जुबानी जंग

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े घटनाक्रम के बाद बीजेपी देशभर में विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी और एनडीए के नेता विपक्ष पर “महिला विरोधी” होने का आरोप लगा रहे हैं।

Author
Written By: Indrajeet Singh Updated: Apr 21, 2026 14:05

मुंबई के वर्ली में महायुति की एक बड़ी सभा आयोजित की जा रही है, जहां मुख्यमंत्री फडणवीस कार्यकर्ताओं को यह समझाने वाले हैं कि किस तरह विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को बाधित किया। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ता घर-घर जाकर इस मुद्दे पर जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहे हैं।

इस बीच फडणवीस ने विपक्ष को महिला आरक्षण के मुद्दे पर “ओपन डिबेट” की खुली चुनौती दे दी है, जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राऊत ने इस चुनौती पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को पहले तथ्यों का अध्ययन करना चाहिए। राऊत ने स्पष्ट किया कि Women’s Reservation Bill 2023 पहले ही संसद से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है, साथ ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। ऐसे में महिला आरक्षण के नाम पर आंदोलन की प्रासंगिकता पर उन्होंने सवाल उठाया।

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: नासिक के बाद अब शिरडी में धर्मांतरण का बवाल… डीमार्ट के कर्मचारी अश्विन पर ‘मुस्तफा’ बनने का आरोप; हिंदू संगठनों ने किया हंगामा

राऊत ने जवाबी तेवर में कहा कि मुख्यमंत्री पहले संसद में हुई बहस को सुने और फिर मुंबई में किसी सक्षम प्रतिनिधि को बहस के लिए बुलाएं। उन्होंने यहां तक कहा कि वो चाहे तो प्रधानमंत्री को भी चर्चा में शामिल कर सकते हैं।

---विज्ञापन---

इस सियासी घमासान के बीच सुप्रिया सुले ने भी मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने फडणवीस की चुनौती स्वीकार करते हुए कहा कि वह बहस के लिए तैयार हैं और समय तय होते ही पहुंच जाएंगी। सुले ने यह भी कहा कि जब यह बिल संसद में पेश हुआ था, तब वह खुद दिल्ली में मौजूद थीं और पूरी प्रक्रिया से भली-भांति अवगत हैं।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल विधायी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक नैरेटिव और जनसंपर्क की लड़ाई में बदल चुका है—जहां एक ओर सत्ता पक्ष विपक्ष को कटघरे में खड़ा कर रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार के दावों की तथ्यात्मकता पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज़ होने के संकेत साफ़ दिखाई दे रहे हैं।

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में मराठी नहीं जानने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के रोजी रोटी का संकट

First published on: Apr 21, 2026 01:46 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.