महाराष्ट्र के धुले जिले में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वन्यजीव भी इसकी चपेट में आने लगे हैं. पिंपलनेर के देशशिरवाडे गांव में लगभग छह महीने के एक नर तेंदुए के शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. वन विभाग की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि शावक की मौत हीटस्ट्रोक के कारण हुई हो सकती है.
जानकारी के अनुसार, देशशिरवाडे गांव में एक किसान को गन्ने के खेत से सटे इलाके में तेंदुए का शावक मृत अवस्था में मिला. घटना की सूचना मिलते ही पिंपलनेर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में अनुमान व्यक्त किया है कि भोजन और पानी की तलाश में जंगल से गांव की ओर भटककर आए शावक की मौत भीषण गर्मी और लू लगने से हुई हो सकती है. हालांकि वन विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है. तेंदुए के शावक की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए. वन विभाग ने पंचनामा कर शव को अपने कब्जे में लिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी.
जंगल छोड़ गांवों की ओर क्यों आ रहे हैं तेंदुए?
पिंपलनेर और आसपास के इलाकों में तेंदुओं के देखे जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. कई बार तेंदुए खेतों के कुओं में गिर जाते हैं, तो कई मौकों पर उनकी मौत की खबरें भी सामने आई हैं. ऐसे में किसानों की ओर से खेतों के खुले कुओं को सुरक्षित करने और उन पर सुरक्षा-कठड़े लगाने की मांग तेज हो गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी, जंगलों में पानी के स्रोतों का सूखना और भोजन की कमी वन्यजीवों को मानव बस्तियों की ओर आने पर मजबूर कर रही है. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर तेंदुए बार-बार गांवों का रुख क्यों कर रहे हैं? वन विभाग को इस दिशा में गंभीर अध्ययन कर ठोस उपाय करने की आवश्यकता है. छह महीने के इस मासूम शावक की मौत ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी का असर अब वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं.
महाराष्ट्र के धुले जिले में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वन्यजीव भी इसकी चपेट में आने लगे हैं. पिंपलनेर के देशशिरवाडे गांव में लगभग छह महीने के एक नर तेंदुए के शावक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. वन विभाग की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि शावक की मौत हीटस्ट्रोक के कारण हुई हो सकती है.
जानकारी के अनुसार, देशशिरवाडे गांव में एक किसान को गन्ने के खेत से सटे इलाके में तेंदुए का शावक मृत अवस्था में मिला. घटना की सूचना मिलते ही पिंपलनेर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया. डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में अनुमान व्यक्त किया है कि भोजन और पानी की तलाश में जंगल से गांव की ओर भटककर आए शावक की मौत भीषण गर्मी और लू लगने से हुई हो सकती है. हालांकि वन विभाग मामले की विस्तृत जांच कर रहा है. तेंदुए के शावक की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए. वन विभाग ने पंचनामा कर शव को अपने कब्जे में लिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी.
जंगल छोड़ गांवों की ओर क्यों आ रहे हैं तेंदुए?
पिंपलनेर और आसपास के इलाकों में तेंदुओं के देखे जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं. कई बार तेंदुए खेतों के कुओं में गिर जाते हैं, तो कई मौकों पर उनकी मौत की खबरें भी सामने आई हैं. ऐसे में किसानों की ओर से खेतों के खुले कुओं को सुरक्षित करने और उन पर सुरक्षा-कठड़े लगाने की मांग तेज हो गई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी, जंगलों में पानी के स्रोतों का सूखना और भोजन की कमी वन्यजीवों को मानव बस्तियों की ओर आने पर मजबूर कर रही है. ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर तेंदुए बार-बार गांवों का रुख क्यों कर रहे हैं? वन विभाग को इस दिशा में गंभीर अध्ययन कर ठोस उपाय करने की आवश्यकता है. छह महीने के इस मासूम शावक की मौत ने एक बार फिर यह चिंता बढ़ा दी है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी का असर अब वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी साफ दिखाई देने लगा है. इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवर भी भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं.