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लाई डिटेक्टर टेस्ट से खुलेगा केतन हत्याकांड का राज! सिया और चेतन का पकड़ा गया झूठ, तो क्या होगा?

18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले पर घूमने के दौरान केतन अग्रवाल को करीब 400 मीटर गहरी खाई में कथित तौर पर धक्का दे दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई.

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पुणे के मशहूर रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस अब विज्ञान का सहारा लेने जा रही है. इस मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने लाइ डिटेक्टर टेस्ट कराने के लिए अपनी सहमति दे दी. लोनावला ग्रामीण पुलिस ने अब इस टेस्ट को कराने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है.

शादी से बचने के लिए रची थी साजिश!

केतन अग्रवाल की इसी साल फरवरी में सिया गोयल से सगाई हुई थी और नवंबर में दोनों की शादी होने वाली थी. लेकिन पुलिस के मुताबिक, सिया इस शादी को नहीं चाहती थी क्योंकि वह चेतन चौधरी से प्यार करती थी. आरोप है कि शादी से बचने के लिए सिया और चेतन ने मिलकर एक खौफनाक साजिश रची. 18 जून को पुणे के पास लोहागढ़ किले पर घूमने के दौरान केतन अग्रवाल को करीब 400 मीटर गहरी खाई में कथित तौर पर धक्का दे दिया गया, जिससे उनकी मौत हो गई.

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पुलिस क्यों चाहती है लाई डिटेक्टर टेस्ट?

केतन अग्रवाल मर्डर केस पूरी तरह से परिस्थितियों और तकनीकी सबूतों पर टिका हुआ है, जिसके कारण पुलिस के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं. जिस पहाड़ी और खाई से केतन गिरे, वहां न तो कोई चश्मदीद गवाह है और न ही कोई सीसीटीवी कैमरा. इसके अलावा, आरोपियों ने पुलिस से बचने के लिए वारदात के पहले और बाद के सारे मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स डिलीट कर दिए थे, यहां तक कि उन्होंने फोन के रीसायकल बिन को भी साफ कर दिया था. वहीं, शादी की प्लानिंग को लेकर आरोपियों और उनके परिजनों के बयानों में काफी अंतर है. ऐसे में सच सामने लाने के लिए पुलिस इनका पॉलीग्राफ टेस्ट करा रही है.

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क्या कोर्ट में मान्य होता है लाई डिटेक्टर टेस्ट?

कानूनी तौर पर पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजों को अदालत में सीधे तौर पर मुख्य सबूत नहीं माना जाता है. हालांकि, जांच अधिकारियों के लिए यह एक बड़ा हथियार होता है. टेस्ट के दौरान जब आरोपी से सवाल पूछे जाते हैं, तो मशीन उसके दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर, सांस लेने के पैटर्न और पसीने के स्तर को रिकॉर्ड करती है. इससे पुलिस को झूठ पकड़ने और मामले में नए सुराग ढूंढने में मदद मिलती है.

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क्या कहता है कानून?

किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफ, नार्को या ब्रेन-मैपिंग टेस्ट उसकी मर्जी के बिना नहीं किया जा सकता. यही वजह है कि पुलिस को इस टेस्ट के लिए सिया और चेतन की लिखित सहमति लेनी पड़ी है. दोनों आरोपी फिलहाल 3 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में हैं.

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First published on: Jul 02, 2026 09:00 PM

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About the Author

Arif Khan

आरिफ खान मंसूरी न्यूज 24 में बतौर डिप्टी न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. आरिफ को डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा अनुभव हैं. उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लगातार तीन लोकसभा चुनाव के अलावा पिछले 15 सालों में देशभर में हुए विधानसभा चुनावों की भी व्यापक कवरेज की है. न्यूज 24 से पहले उन्होंने देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की थी, यहां देश, दुनिया और पॉलिटिक्स की खबरों पर काम किया. आरिफ ने इसके बाद इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप की हिंदी वेबसाइट जनसत्ता के साथ अपनी पारी शुरू की. इसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स की हिंदी न्यूज वेबसाइट लाइवहिंदुस्तान ज्वाइन कर लिया. लाइवहिंदुस्तान.कॉम के बाद वह एनडीटीवी ग्रुप के साथ जुड़ गए. एनडीटीवी में करीब छह साल तक काम करने के बाद न्यूज24 के साथ जुड़ गए. न्यूज24 में भी होमपेज की जिम्मेदारी संभालते हैं. शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कला संकाय में स्नातक और मास्टर ऑफ जर्नलिज्म की डिग्री हासिल की है. आरिफ देश, विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों के अलावा एक्सप्लेनर लिखने में भी माहिर हैं.

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