बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस को फटकार लगाई है और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के 2 पदाधिकारियों को तड़ीपार किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की कार्रवाई करे अवैध, कठोर और भेदभावपूर्ण बताते हुए सवाल किया कि क्या पुलिस एक ही धर्म के लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है? क्या दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने एक्शन सिर्फ इसलिए लिया है, क्योंकि वे एक विशेष धर्म से ताल्लुक रखते हैं.
3 दिसंबर 2025 को पुलिस ने किया था तड़ीपार
बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस माधव जे. जामदार की सिंगल बेंच ने सुनवाई की. याचिकाकर्ता फिरोज अब्दुल वहाब खान और मोहम्मद रफीक गुलाम रसूल अंसारी ने अपनी याचिका में कोर्ट का बताया कि मुंबई पुलिस ने 3 दिसंबर 2025 को दोनों को एक साल के लिए तड़ीपार करने का आदेश जारी किया गया था. मुंबई पुलिस को इसी आदेश को उन्होंने चुनौती दी है. उन्होंने विरोध प्रदर्शन में सिर्फ नारेबाजी ही की थी, उन्होंने किसी शख्स या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया था.
अन्य दलों पर कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठाए
जस्टिस जामदार ने भी मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई FIR में सिर्फ नारेबाजी का जिक्र है. विरोध प्रदर्शन में शिवसेना, UBT, NCP, कांग्रेस के वर्करों और नेताओं समेत स्थानीय लोग भी थे, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई क्यो? बिना अनुमति के आंदोलन या विरोध प्रदर्शन करने पर तड़ीपार नहीं किया जा सकता और न ही इस तरह सिर्फ नारेबाजी करने पर कार्रवाई या तड़ीपार किया जा सकता है.
पुलिस के वकील ने कार्रवाई की सही-जायज ठहराया
जस्टिस जामदार की कोर्ट में पुलिस के वकील शिशिर हिरे ने तड़ीपार की कार्रवाई को सही ठहराया. इस दलील के लिए उन्होंने याचिकाकर्ताओं के प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से कनेक्शन का हवाला दिया. लेकिन याचिकाकर्ताओं के वकील इब्राहिम हरबत ने पुलिस के वकील की दलील को सिरे से खारिज कर दिया. इस दलील पर भी जस्टिस जामदार ने कहा कि पुलिस के डॉक्यूमेंट में याचिकाकर्ताओं के PFI से कनेक्शन का जिक्र नहीं है और न ही ऐसा आरोप लगाया गया है.
CJP प्रोटेस्ट खत्म होने के बाद एक और छात्रा ने की आत्महत्या, NEET रिजल्ट के बाद उठाया खौफनाक कदम
कोर्ट ने कार्रवाई को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया
पुलिस के वकील ने दलील दी कि पुलिस ने SDPI के दोनों पदाधिकारियों पर धर्म के आधार पर कार्रवाई नहीं की है, लेकिन दोनों पदाधिकारी धर्म के नाम पर हंगामा कर रहे थे, जो निंदनीय है. PFI पर प्रतिबंध लगने के बाद SDPI वजूद में आई है. तड़ीपार करना संविधान के तहत लोगों को मिले मौलिक अधिकारों के खिलाफ है. तड़ीपार किया जाना नागरिकों से उनके घूमने-फिरने की आजादी छीनने जैसा है. इसलिए मुंबई पुलिस का तड़ीपार किए जाने का आदेश को गैर-कानूनी मानकर खारिज किया जाता है.
संबंधित खबरें
धारावी के लोगों को मिलेंगे 10,432 नए घर, अदाणी ग्रुप ने किया भूमिपूजन
1 hr agoलापरवाही! चलती एंबुलेंस से सड़क पर स्ट्रेचर समेत गिरा मरीज, VIDEO वायरल
5 hrs agoमहाराष्ट्र सरकार ने मानी MPSC प्रर्दशनकारियों की मांग, आंदोलन खत्म
7 hrs agoमुंबई में 400 से ज्यादा प्रदर्शनकारी हिरासत में, एक्टर इमरान खान भी डिटेन
2 days ago'PM मोदी तानाशाह...', CJP प्रदर्शन के लिए दिल्ली निकलने से पहले बोले दीपके
2 days agoकभी राजनीति में क्यों नहीं उतरे नाना पाटेकर? बने किसानों की आवाज
4 days agoमहाराष्ट्र में बढ़ी अक्टूबर की गर्मी, मुंबई लोकल भी हुई प्रभावित
4 days agoपेट्रोल पंप सील करने गया था अधिकारी, मालिक के बेटे ने चाकू घोंपकर मार डाला
4 days agoडिटर्जेंट और केमिकल से बना रहे थे दूध, महाराष्ट्र में FDA ने मारा छापा
4 days ago120 रुपये किलो भिंडी, अदरक 280 के पार, आसमान पर पहुंचे सब्जियों के दाम
5 days agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines