दिग्गज टेक कंपनी गूगल (Google) में नौकरी करने का सपना लाखों लोग देखते हैं, लेकिन अब कंपनी अपने खर्चों पर लगाम लगाने और एक नया बड़ा दांव खेलने के लिए एक अनोखा रास्ता अपना रही है. गूगल अपने कर्मचारियों को खुद ही स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने (Voluntary Exit) की पेशकश कर रहा है और इसके बदले में शानदार सेवरेंस पैकेज (Severance Package) भी ऑफर कर रहा है. रॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने इस स्कीम का दायरा बढ़ाते हुए इसे दुनिया के 5 बड़े देशों में लागू कर दिया है.
आखिर गूगल अपने कर्मचारियों को खुद नौकरी छोड़ने का ऑफर क्यों दे रहा है? किन्हें यह ऑफर मिल रहा है और कौन-सी टीमें इससे पूरी तरह बाहर हैं? जानिये इसके पीछे का पूरा मामला क्या है.
किन 5 देशों में गूगल दे रहा है Voluntary Exit का ऑफर?
गूगल ने इस स्वैच्छिक निकास (Voluntary Exit) कार्यक्रम को जून के बाद से कई बड़े बाजारों में विस्तारित किया है. यह ऑफर यहां दिये गए 5 देशों के कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराया गया है:
- कनाडा
- फ्रांस
- जर्मनी
- जापान
- स्विट्जरलैंड
गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट (Alphabet) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही है. ऐसे में कंपनी अन्य गैर-जरूरी विभागों से अपना खर्च कम करके उस पैसे को सीधे AI टेक्नोलॉजी के विकास में लगाना चाहती है.
स्विट्जरलैंड में दिखा असर: हर 1 साल की नौकरी पर 1 महीने की सैलरी का ऑफर
स्विट्जरलैंड में गूगल के करीब 5,000 कर्मचारी काम करते हैं और ज्यूरिख में उनका एक बहुत बड़ा इंजीनियरिंग सेंटर है. वहां जून में कर्मचारियों को यह ऑफर दिया गया था और जिन लोगों ने इसे स्वीकार किया, वे अगस्त से कंपनी छोड़ने लगे हैं. कर्मचारियों को हर 1 साल की सेवा के बदले 1 महीने की सैलरी देने की पेशकश की गई, यानी ज्यादा से ज्यादा 12 महीने की सैलरी तक का पेआउट. बताया जा रहा है कि लगभग 50 लोगों की एक टीम में से कम से कम 4 कर्मचारियों ने इस ऑफर को स्वीकार कर कंपनी को अलविदा कह दिया.
किन टीमों को नहीं मिलेगा नौकरी छोड़ने का ऑफर?
गूगल सभी विभागों से लोगों को नहीं निकाल रहा है. कंपनी ने अपने दो सबसे महत्वपूर्ण और भविष्य के बिजनेस को इस बायआउट ऑफर से पूरी तरह बाहर रखा है. वो हैं गूगल की मुख्य AI रिसर्च विंग Google DeepMind और गूगल की क्लाउड सेवाएं Google Cloud. गूगल इन दोनों ही सेक्टर्स में नई और बड़े पैमाने पर हायरिंग कर रहा है. यानी जहां भविष्य है, वहां नए लोगों को लाया जा रहा है और जहां ज़रूरत कम है, वहां कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज देकर विदा किया जा रहा है.
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) भी चल रहा है यही राह
अकेले गूगल ही ऐसा नहीं कर रहा है. AI में भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर्स का खर्च उठाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट भी अपने कर्मचारियों को बायआउट ऑफर दे रहा है. माइक्रोसॉफ्ट ने हाल ही में यूएस, कनाडा, भारत और यूके में अपने लगभग 60,000 कर्मचारियों, जो लेवल 70 या उससे नीचे वाले हैं, उनके लिए स्वैच्छिक बायआउट योजना का ऐलान किया था. यह माइक्रोसॉफ्ट के कुल वर्कफोर्स का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा है.