भोपाल में जल संकट का खतरा? केरवा डैम से पानी बहने पर NGT सख्त, मांगी रिपोर्ट

Water Crisis Risk In Bhopal: भोपाल में जल संकट न हो इसके लिए शहर काफी हद तक केरवा डैम पर निर्भर है, आरोप है कि इस बांध से हद से ज्यादा पानी बताया जा रहा है, ऐसे में डर है कि यही सिलसिला जारी रहा तो मध्य प्रदेश की राजधानी में वाटर क्राइसिस न हो जाए.

Kaliasot Dam PTI File Photo

कलियासोत डैम (PTI File Photo)

Bhopal News: भोपाल में पानी की जरूरतों में अहम रोल अदा करने वाले केरवा डैम को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने सख्ती दिखाई है. एनवायरनमेंटलिस्ट सुभाष चंद्र पांडे की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने डैम से लगातार पानी बहने की शिकायत पर चिंता जताई. NGT ने मध्य प्रदेश सरकार और जल संसाधन विभाग से 15 दिन के अंदर रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

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केरवा और कलियासोत डैम की जांच

मामला केरवा और कलियासोत डैम के फुल टैंक लेवल (FTL) से जुड़ा है. NGT ने दोनों जलाशयों के FTL की असल लिमिट तय करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ड्रोन सर्वे और मौके पर जाकर जांच की. इंवेस्टिगेशन के दौरान कलियासोत डैम के FTL के आसपास कई पक्के निर्माण, डेयरी, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां सामने आईं. वहीं केरवा डैम के पास एक बड़े नाले से लगातार पानी बाहर निकलने की बात भी सामने आई.

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नाले से बह रहा पानी

पिटीशनर के मुताबिक डैम के किनारे बने नाले के कारण पानी लगातार बाहर जा रहा है. इससे केरवा का जलस्तर FTL तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है. उनका कहना है कि जब तक पानी निर्धारित स्तर तक नहीं पहुंचेगा, तब तक FTL की सही सीमा का सीमांकन करना भी मुश्किल रहेगा.

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सुभाष चंद्र पांडे ने दावा किया कि जब वह मौके पर FTL के डिमार्केशन और मार्किंग का प्रॉसेस देखने पहुंचे, तो अधिकारियों की ओर से प्रक्रिया रोकने की कोशिश की गई. अधिकारियों का कथित तौर पर कहना था कि डैम का पानी FTL तक पहुंचने के बाद ही सीमांकन किया जा सकता है.

NGT ने मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

सुभाष चंद्र पांडे ने सुनवाई के दौरान डैम से पानी बहने से जुड़े फोटो और वीडियो भी पेश किए. इसके बाद NGT ने पानी की निकासी रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने और उनकी जानकारी रिपोर्ट के जरिए देने को कहा. ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार और जल संसाधन विभाग से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है. इसमें केरवा डैम के संरक्षण, पानी की निकासी रोकने और FTL क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देनी होगी.

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याचिका में इस मामले को सिर्फ पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि भोपाल के अहम जल स्रोत के संरक्षण से जुड़ा मुद्दा बताया गया है. हालांकि जल संकट की आशंका और पानी की बर्बादी से जुड़े दावों पर आगे की स्थिति इससे जुड़े विभाग की रिपोर्ट और कार्रवाई से साफ होगी.

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लेखक के बारे में

Shariqul Hoda

Shariqul Hoda

न्यूज़ 24 डिजिटल में शारिकुल होदा सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. मुख्य तौर पर वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें लिखते हैं. शारिकुल ने 2008 में दूरदर्शन में बतौर इंटर्न अपनी शुरुआत की, इसके बाद वह दैनिक जागरण, टीवी टुडे नेटवर्क, जनसंदेश, श्री न्यूज़, भारत खबर, स्पोर्ट्सकीड़ा, WION और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उन्होंने 3 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव से लेकर देश की बड़ी घटनाओं को कवर किया है. अपने डेढ़ दशक के मीडिया करियर में शारिकुल ने देश की राजनीति, इंटरनेशनल डिप्लोमेसी, खेलकूद से जुड़ी घटनाओं की अच्छी समझ हासिल की है. कितने साल का तजुर्बा: 16 साल शिक्षा: शारिकुल ने बैंगलोर यूनिवर्सिटी (आचार्य इंस्टीट्यूट) से बीए जर्नलिज्म और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी (एपीजे इंस्टीट्यूट) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई की है.
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