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पति से तलाक लेने वालीं कौन हैं BJP सांसद हिमाद्री सिंह? कोर्ट के आदेश पर 9 साल का खत्म हुआ रिश्ता

मध्यप्रदेश के शहडोल से दो बार की भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र मरावी का 9 साल बाद तलाक हो गया है. कोर्ट ने दोनों की अर्जी पर डिक्री जारी कर वैवाहिक रिश्ते को कानूनी रूप से खत्म कर दिया है. जानिए बड़े आदिवासी राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वालीं हिमाद्री सिंह और उनके पति से जुड़े पूरे सफर की कहानी.

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मध्यप्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है. शहडोल संसदीय सीट से दो बार की भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता कानूनी तौर पर खत्म हो गया है. कोर्ट ने तलाक की अर्जी पर अंतिम मुहर लगाते हुए डिक्री पारित कर दी है. दोनों पिछले कई सालों से अलग-अलग रह रहे थे. हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी की शादी 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में हुई थी. दोनों की करीब नौ साल पुरानी शादी अब औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है. दंपति की एक बेटी है, जिसका नाम गिरिशा कुमारी सिंह है और वह मां हिमाद्री सिंह के साथ ही रहती हैं.

सियासी घराने से ताल्लुक रखती हैं हिमाद्री

हिमाद्री सिंह मध्यप्रदेश के एक प्रतिष्ठित आदिवासी राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके पिता दलवीर सिंह कांग्रेस के दिग्गज आदिवासी नेता थे और राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे. वहीं उनकी मां राजेश नंदिनी सिंह कोतमा से विधायक और शहडोल से सांसद रहीं. हिमाद्री की शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में हुई है. वह देश के प्रमुख युवा आदिवासी चेहरों में गिनी जाती हैं और समरकंद में आयोजित युवा सांसदों के वैश्विक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं.

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सास के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं पति नरेंद्र मरावी

नरेंद्र सिंह मरावी की पृष्ठभूमि भी राजनीति से जुड़ी रही है. वे छात्र राजनीति करते हुए ABVP से उभरे और मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रहे. दिलचस्प बात यह है कि नरेंद्र मरावी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में हिमाद्री की मां स्वर्गीय राजेश नंदिनी सिंह के खिलाफ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद 2018 के विधानसभा चुनाव में भी वे पुष्पराजगढ़ से मैदान में उतरे, मगर जीत नहीं सके.

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कांग्रेस छोड़ भाजपा में आईं और लगातार दो बार जीतीं

हिमाद्री सिंह ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और 2016 का लोकसभा उपचुनाव लड़ा था. साल 2019 में वे कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गईं. माना जाता है कि उन्हें भाजपा में लाने में नरेंद्र मरावी की अहम भूमिका थी. हिमाद्री ने 2019 और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में शहडोल सीट से लगातार दो बार बड़ी जीत दर्ज की. समय के साथ जहां हिमाद्री का सियासी कद बढ़ता गया, वहीं पति से उनके मतभेद गहराते गए और अंततः दोनों ने अलग होने का फैसला किया.

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First published on: Sep 14, 2026 09:25 PM

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About the Author

Vijay Kumar

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.

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