मध्य प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को समान नागरिक संहिता UCC बिल पास हो गया. इस दौरान विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ. इन सबके बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकार का पक्ष रखा. सीएम ने कहा कि भगवान ने सभी को एक जैसा बनाया है तो इंसानों के बनाए गए कानून में भी समानता होनी चाहिए. हंगामे के बीच मोहन यादव ने कहा कि राज्य अब राम से रहीम तक और एंथोनी से अकबर तक एक ही संविधान से चलेगा. CM ने दावा किया कि 76% मुस्लिम बहनों और 40% मुस्लिम भाइयों ने UCC का समर्थन किया है.  

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क्या है प्रावधान?

रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इस बिल को तैयार किया है. इसमें कुल 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं. कमेटी को जनता से 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव मिले थे. इस नए कानून के तहत मध्य प्रदेश में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, जमीन-जायदाद के उत्तराधिकार, गोद लेने और सरोगेसी जैसे पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम लागू होंगे. इसमें खास बात ये है कि लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा और टेस्ट ट्यूब बेबी से पैदा होने वाले बच्चों को भी समान कानूनी दर्जा मिलेगा.

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बाकी राज्यों में क्या है प्रावधान?

सबसे पहले UCC बिल उत्तराखंड में लागू हुआ. इसके अलावा गुजरात, असम में भी ये बिल लागू हो गया है. यूसीसी का मतलब ऐसे समान नागरिक कानूनों से है जो शादी, तलाक, संपत्ति, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों को सभी नागरिकों के लिए एक समान नियमों के तहत लाते हैं. इससे धर्म के आधार पर कानून नहीं बनते बल्कि एक समान कानूनी ढांचा लागू होता है. उत्तराखंड, गुजरात और असम में शादी को लेकर एक जैसा कानून है. तीनों राज्यों में पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल और महिलाओं के लिए 18 साल है. वहीं उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य बना, जिसने लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता दी और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया. असम ने भी उत्तराखंड का ही मॉडल अपनाया. लेकिन गुजरात में इसके लिए कानून थोड़े और सख्त हैं.

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उत्तराधिकार को लेकर क्या है नियम?

असम, गुजरात और उत्तराखंड ने यूसीसी लागू कर उत्तराधिकार के प्रोसेस को आसान बना दिया. जिसके मुताबिक पति-पत्नी, बेटा, बेटी को समान अधिकार मिलेगा. लेकिन अगर किसी ने पहले से ही वसीहत तैयार कर ली है. उस केस में यूसीसी लागू नहीं होता. यूसीसी तभी मान्य होता है, जब कोई व्यक्ति बिना वसीहत बनाए मर जाता है. इन तीनों राज्यों में सबसे बड़ा अंतर सज़ा और नियम लागू करने के तरीकों में है. उत्तराखंड का फोकस नियम बनाने और रजिस्ट्रेशन जैसे तरीकों से उनका पालन सुनिश्चित करन पर है. अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे सज़ा दी जाती है. गुजरात में शादी या लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन ना कराने पर कड़ा जुर्माना लगाने का प्रावधान है. असम में जुर्माने के साथ-साथ जेल की भी सज़ा होती है.

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