
MP के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समझाया अध्यात्म का मतलब, बोले- आत्मसात करो, सफल होगा जीवन
CM Mohan Yadav Explained Spirituality Importance: सीएम मोहन यादव ने कहा कि आध्यात्मिकता ही भारतीय विचार प्रक्रिया का मूल तत्व है।
Edited By Pooja Mishra

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CM Mohan Yadav Explained Spirituality Importance: मध्य प्रदेश में भाजपा की मोहन यादव की सरकार लगातार तेजी से प्रदेश की जनता के हितों से जुड़े काम कर रही हैं। बीते दिन ही सीएम मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर झाबुआ में 7550 करोड़ रुपये से अधिक के विकास परियोजनाओं का लोकार्पण किया। प्रदेश का विकास करने के साथ-साथ सीएम मोहन यादव अक्सर राज्य के लोगों को आध्यात्मिकता का महत्व समझाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में सीएम मोहन ने एक कार्यक्रम में बताया कि आध्यात्मिकता ही भारतीय विचार प्रक्रिया का मूल तत्व है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उज्जैन में आयोजित विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की अखिल भारतीय अधिकारी बैठक में “हे भारत! आध्यात्मिकता से विश्व विजयी बनो” विषय पर केन्द्रित विमर्श सत्र में सहभागिता की।
इस बैठक में विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष पद्मश्री… pic.twitter.com/qiABB1e6yk
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) February 11, 2024
दरअअसल, सीएम मोहन यादव विमर्श कार्यक्रम में शामिल हुए, यहां उन्होंने विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी के विद्यार्थियों द्वारा एकनाथ रनाडे के विचारों पर लिखी किताब ‘ध्येयनिष्ठ जीवन’ का विमोचन किया। इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम मोहन यादव ने आध्यात्मिकता का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता ही भारतीय विचार प्रक्रिया का मूल तत्व है। पूरी प्रकृति में परमेश्वर व्याप्त है, ऐसे में आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ही हम उन्हें महसूस कर सकते हैं। हम भारतीयों का ज्ञान-विज्ञान बहुत ही पुराना और प्राचीन है। कुंभ का मेला नक्षत्र के अनुसार होता है। हर 12 साल में उज्जैन में सिंहस्थ मेला का आयोजन किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि आध्यात्मिकता की यात्रा ही भारत के विकास की यात्रा है। उज्जैन में स्थित डोंगला में स्टैण्डर्ड टाइम की गणना होती है।
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सीएम मोहन यादव ने आगे कहा कि वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु ने बताया था कि पेड़-पौधों में भी जान होती हैं। वहीं मुख्यमंत्री के संबोधन को पूरा करते हुए विवेकानन्द केन्द्र कन्याकुमारी की वाइस प्रेजीडेंस पद्मश्री डॉ. निवेदिता भिंड ने कहा कि आध्यात्मिकता केवल एक उपासना तंत्र नहीं है बल्कि आपका स्वभाव ही आध्यात्मिकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने खुद यह बात गीता में कही है।आध्यात्मिकता वह है, जो अपनेपन के दायरे में आता है, जो व्यक्ति परिवार, समाज और देश के बारे में सोचता है।
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