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ADGP वाई पूरन कुमार केस: FIR में DGP, IG, कमिश्नर समेत 12 नामजद, सामने आए नाम

आईपीएस पूरन कुमार सुसाइड केस में 12 अफसरों पर मामला दर्ज किया गया है। शुक्रवार सुबह उनके नाम भी सामने आ गए हैं। इसमें डीजीपी के अलावा अंबाला आईजी, पंकज नैन, रोहतक एसपी समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

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हरियाणा में एडीजीपी आत्महत्या केस में पुलिस ने अब की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। चंड़ीगढ़ पुलिस ने सूबे के डीजीपी शत्रुजीत कपूर, पंचकूला कमिश्नर, अंबाला आईजी, रोहतक एसपी समेत 12 आला कमान अधिकारियों के नाम दर्ज किए हैं। पुलिस ने गुरुवार देर रात मामला दर्ज किया था। अब सभी आरोपी अधिकारियों के नाम सामने आए हैं।

पुलिस ने हरियाणा के डीजीपी शत्रुजीत कपूर, एडीजीपी संदीप खिरवार, एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों, एडीजीपी लैंड ऑर्डर संजय कुमार, एडीजीपी माटा रवि किरण ,पंचकूला पुलिस आयुक्त सिवास कविराज, अंबाला रेंज के आईजी पंकज नैन, रोहतक एसपी नरेंद्र बिजरानिया आईपीएस कल रामचंद्रन को मामले में नामजद किया है। इसके अलावा केस में कुछ पूर्व नौकरशाह भी हैं। इसमें पूर्व डीजीपी मनोज यादव ,पूर्व डीजीपी पीके अग्रवाल, पूर्व मुख्य सचिव टीवीएस एन प्रसाद, पूर्व एसीएस राजीव अरोड़ा शामिल हैं।

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केजरीवाल ने उठाई सख्त सजा की मांग

आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मामले में सख्त सजा की मांग की है। केजरीवाल ने एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा कि हरियाणा के IPS अफसर पूरन कुमार को अपनी जाति को लेकर इतना उत्पीड़न झेलना पड़ा कि उन्होंने आत्महत्या कर ली। दोषी लोगों को जल्द से जल्द सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट घटना का जिक्र करते हुए लिखा कि देश के मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंका गया तो इनके ट्रोल सोशल मीडिया पर दलितों को बेइज्जत कर रहे हैं।

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सांसद प्रियंका गांधी ने भी किया ट्वीट

मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी ट्वीव किया है। उन्होंने कहा कि जातीय प्रताड़ना से परेशान होकर हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या से पूरा देश स्तब्ध है। देश भर में दलितों के खिलाफ जिस तरह अन्याय,अत्याचार और हिंसा का सिलसिला चल रहा है, वह भयावह है। रायबरेली का जिक्र करते हुए कहा कि पहले रायबरेली में हरिओम वाल्मीकि की हत्या, फिर मुख्य न्यायाधीश का अपमान और अब एक वरिष्ठ अधिकारी की आत्महत्या यह साबित करती है कि भाजपा राज दलितों के लिए अभिशाप बन गया है। कहा कि चाहे कोई आम नागरिक हो या ऊंचे पद पर हो, अगर वह दलित समाज से है तो अन्याय और अमानवीयता उसका पीछा नहीं छोड़ते। जब ऊंचे ओहदे पर बैठे दलितों का यह हाल है तो सोचिए आम दलित समाज किन हालात में जी रहा होगा।

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First published on: Oct 10, 2025 09:36 AM

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